पटना में राजद का राजभवन मार्च, पुलिस ने किया वाटर कैनन का इस्तेमाल; तेजस्वी यादव समेत कई हिरासत में लिए गए

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Digital UP News Desk

पटना: बिहार की राजधानी पटना में बुधवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राजभवन मार्च के दौरान उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बैरिकेडिंग को लेकर टकराव हुआ। राजद ने यह मार्च परीक्षा पेपर लीक, बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और सीवान में छात्रों पर हुई फायरिंग के विरोध में निकाला। मार्च की अगुवाई बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद तेजस्वी यादव समेत कई राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दे पर राजद का प्रदर्शन

राजद की ओर से आयोजित इस मार्च का मुख्य केंद्र बिहार के छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे रहे। पार्टी का आरोप है कि राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं की शिकायतों ने अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, रोजगार और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल उठाता रहा है।

तेजस्वी यादव ने मार्च से पहले कहा था कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक की शिकायतों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की थी।

राजद का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र लंबे समय तक मेहनत और आर्थिक संसाधन खर्च करने के बाद परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो इसका सीधा असर अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है। इसलिए पार्टी ने परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग को मार्च में प्रमुखता दी।

सीवान छात्र फायरिंग का मुद्दा भी रहा प्रमुख

राजभवन मार्च में सीवान की घटना भी प्रमुख मुद्दा रही। तेजस्वी यादव ने इससे पहले छात्रों पर हुई कथित पुलिस फायरिंग को लेकर कई सवाल उठाए थे। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की थी कि घटना के दौरान हथियारों के इस्तेमाल और फायरिंग को लेकर जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की गई थी।

तेजस्वी यादव ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई थी। उनका कहना था कि केवल निचले स्तर के किसी कर्मचारी पर कार्रवाई से पूरे मामले की जवाबदेही तय नहीं हो सकती। उन्होंने घटना से जुड़े आदेश, हथियारों के इस्तेमाल और प्रशासनिक जिम्मेदारी को सार्वजनिक करने की मांग की थी।

हालांकि, सीवान की घटना को लेकर सरकार और विपक्ष के दावों में अंतर रहा है। इसलिए इस पूरे मामले में आधिकारिक जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना जरूरी है।

बैरिकेडिंग के बाद बढ़ा तनाव

राजभवन की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की ओर से भीड़ नियंत्रण के लिए ऐसे उपाय किए जाते हैं, लेकिन इस कार्रवाई को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए गए। राजद नेताओं ने इसे छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश बताया, जबकि प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना रही।

मार्च के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी। कार्यक्रम को देखते हुए पटना के महत्वपूर्ण मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी। राजद ने पहले मार्च के रूट और समय को लेकर भी जानकारी साझा की थी।

तेजस्वी यादव समेत कई कार्यकर्ता हिरासत में

प्रदर्शन के दौरान तेजस्वी यादव समेत कई राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इससे पहले तेजस्वी यादव ने मार्च को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित करने की बात कही थी। उन्होंने छात्रों और बेरोजगार युवाओं से भी इस अभियान से जुड़ने की अपील की थी।

राजद के लिए यह मार्च केवल एक विरोध कार्यक्रम नहीं बल्कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक स्तर पर मजबूती से उठाने का प्रयास भी माना जा रहा है। बिहार में चुनावी राजनीति के बीच रोजगार, शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सवाल पहले से ही महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।

सरकार से जवाबदेही की मांग

राजद ने सरकार से कई मुद्दों पर जवाब मांगते हुए परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि पेपर लीक या परीक्षा संबंधी किसी भी अनियमितता की स्थिति में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए।

इसके अलावा बेरोजगारी को लेकर भी विपक्ष सरकार पर निशाना साध रहा है। राजद का आरोप है कि युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हैं और भर्ती प्रक्रिया में देरी से अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ रही है।

वहीं, सरकार की ओर से इन राजनीतिक आरोपों का जवाब प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत दिए जाने की बात कही जाती रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

छात्रों के मुद्दे पर तेज हुई राजनीतिक सक्रियता

बिहार में छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है। पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, रोजगार और छात्र आंदोलनों से जुड़े सवाल लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बन रहे हैं।

तेजस्वी यादव ने इसी पृष्ठभूमि में राजभवन मार्च को सरकार पर दबाव बनाने के माध्यम के रूप में पेश किया। उनका कहना है कि छात्रों और युवाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए तथा परीक्षा व्यवस्था में ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी शिकायतों की गुंजाइश कम हो।

दरअसल, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार, परीक्षा संस्थाओं और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है।

आगे क्या होगा?

पटना में हुए इस राजभवन मार्च के बाद बिहार की राजनीति में परीक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और छात्र सुरक्षा के मुद्दे और तेज होने की संभावना है। राजद इन मुद्दों को आगे भी उठाने की बात कर रहा है। दूसरी ओर, सरकार और प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था तथा परीक्षा प्रक्रिया को लेकर अपने पक्ष को सामने रखा जाना महत्वपूर्ण होगा।

कुल मिलाकर, 19 अगस्त का राजभवन मार्च बिहार में छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष की सक्रियता का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन का इस्तेमाल और नेताओं की हिरासत ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इन मुद्दों पर क्या कदम उठाती है और सीवान की घटना समेत परीक्षा संबंधी शिकायतों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।