मेरठ में स्वाइन फ्लू के तीन नए मरीज, मां-बेटे समेत संक्रमितों की संख्या 7 पहुंची

WhatsApp Image 2026-08-19 at 1.08.54 PM

Digital UP News Desk

मेरठ: मेरठ में स्वाइन फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और उपचार की तैयारियां तेज कर दी हैं। मां-बेटे समेत तीन नए मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही जिले में अब तक सामने आए संक्रमित मरीजों की संख्या सात हो गई है। लगातार नए मामलों के सामने आने से स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और मरीजों की समय पर पहचान के लिए कदम उठाए हैं। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग संक्रमण की रोकथाम के लिए मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में मरीजों के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था कर रहा है।

इसी बीच मेरठ के एसपी सिटी विनायक गोपाल भौंसले के भी संक्रमण की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बीमारी से निपटने के लिए आवश्यक दवाओं और उपचार संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। वहीं, संभावित मरीजों की पहचान के लिए स्वास्थ्य टीमें भी सक्रिय की जा रही हैं।

तीन नए मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

मां-बेटे समेत तीन नए मरीजों में संक्रमण की पुष्टि के बाद मेरठ में स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अपनी निगरानी व्यवस्था बढ़ा दी है। विभाग का फोकस फिलहाल संक्रमित लोगों की पहचान, उनके उपचार और संक्रमण को दूसरे लोगों तक पहुंचने से रोकने पर है।

सीएमओ डॉ. रामप्रसाद के अनुसार, स्वाइन फ्लू से बचाव और उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार है। मरीजों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली टेमी फ्लू दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने की बात कही गई है। इसके अलावा अस्पतालों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की समीक्षा की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की तैयारी है। खास तौर पर ऐसे इलाकों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां आबादी अधिक है और लोगों के बीच संपर्क ज्यादा रहता है। इसके साथ ही लोगों को फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी जा रही है।

मलिन बस्तियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगेंगे स्वास्थ्य शिविर

नोडल अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार के मुताबिक, मलिन बस्तियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के जरिए लोगों की जांच की जाएगी और फ्लू जैसे लक्षण मिलने पर चिकित्सकीय सलाह तथा आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

दरअसल, किसी संक्रामक बीमारी की रोकथाम में शुरुआती स्तर पर मरीजों की पहचान महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग का जोर ऐसे लोगों की पहचान पर है जिनमें बुखार, खांसी, गले में खराश या नाक से संबंधित लक्षण दिखाई दे रहे हैं।

इसके अलावा लोगों को संक्रमण से बचाव के सामान्य उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना, हाथों की नियमित सफाई रखना और बीमार होने पर दूसरों के संपर्क को सीमित करना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इन्फ्लुएंजा संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के जरिए फैल सकता है।

श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है H1N1 वायरस

वरिष्ठ फिजिशियन और पूर्व IMA अध्यक्ष डॉ. तनुराज सिरोही के अनुसार, स्वाइन फ्लू को आम तौर पर इन्फ्लुएंजा A(H1N1) से जोड़ा जाता है। हालांकि, WHO के अनुसार, 2009 के बाद A(H1N1) वायरस मानव आबादी में मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस के रूप में लगातार प्रसारित हो रहा है। इसलिए विशेषज्ञ अब ‘स्वाइन फ्लू’ के बजाय इन्फ्लुएंजा A(H1N1) या मौसमी इन्फ्लुएंजा जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।

इन्फ्लुएंजा मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। इसके सामान्य लक्षणों में अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, मांसपेशियों और शरीर में दर्द तथा थकान शामिल हो सकते हैं। WHO के अनुसार, ज्यादातर लोग लगभग एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

इसीलिए लगातार नाक बहने, छींक आने, नाक बंद होने, गले में खराश, बुखार या शरीर में दर्द जैसे लक्षणों को सामान्य मौसमी बीमारी मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर यदि लक्षण बढ़ रहे हों या व्यक्ति पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

बुखार और गले में खराश वाले मरीजों की संख्या बढ़ी

मेरठ के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में बुखार, नाक बहने, खांसी और गले में खराश जैसी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। हालांकि, ऐसे सभी मरीजों को स्वाइन फ्लू या H1N1 से संक्रमित मानना सही नहीं है।

क्योंकि फ्लू जैसे लक्षण कई अन्य श्वसन संक्रमणों में भी दिखाई दे सकते हैं। WHO के मुताबिक, इन्फ्लुएंजा की पुष्टि के लिए जरूरत पड़ने पर श्वसन नमूने की प्रयोगशाला जांच की जाती है और RT-PCR जैसी जांच का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसलिए विशेषज्ञों की सलाह है कि लक्षणों के आधार पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लिया जाए। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में फ्लू के कारण जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है।

मेडिकल कॉलेज में अलग वार्ड और जांच की सुविधा

मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अलग वार्ड की सुविधा उपलब्ध है। वार्ड में वेंटिलेटर सहित उपचार के जरूरी संसाधन, दवाएं और मास्क उपलब्ध कराए गए हैं।

इसके साथ ही H1N1 की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में भी व्यवस्था होने की जानकारी दी गई है। नए मरीज सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने उपलब्ध संसाधनों और व्यवस्थाओं की समीक्षा और तेज कर दी है।

अलग वार्ड की व्यवस्था का उद्देश्य संभावित संक्रमित मरीजों को अन्य मरीजों से अलग रखते हुए उपचार उपलब्ध कराना है। इससे अस्पताल में संक्रमण के संभावित प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

टेमी फ्लू दवा को लेकर क्या है जानकारी?

स्वास्थ्य विभाग ने टेमी फ्लू दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने की बात कही है। आम तौर पर टेमी फ्लू नाम से जानी जाने वाली दवा ओसेल्टामिविर (oseltamivir) एक एंटीवायरल दवा है, जिसका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर इन्फ्लुएंजा के कुछ मामलों में किया जाता है।

WHO के अनुसार, गंभीर बीमारी के जोखिम वाले मरीजों में एंटीवायरल दवाएं लक्षण शुरू होने के शुरुआती समय में अधिक प्रभावी हो सकती हैं। इसलिए ऐसी दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

साथ ही, एंटीबायोटिक दवाएं वायरस के खिलाफ काम नहीं करतीं। इसलिए फ्लू जैसे वायरल संक्रमण में बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं है।

बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान?

मेरठ में बढ़ते मामलों के बीच लोगों के लिए सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है। फ्लू के लक्षण होने पर आराम करना, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना और दूसरों के संपर्क को सीमित रखना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है।

खांसते और छींकते समय मुंह-नाक ढकना, हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोना और भीड़भाड़ वाली जगहों पर आवश्यक सावधानी बरतना उपयोगी हो सकता है। WHO के अनुसार, फ्लू से बचाव के लिए मौसमी इन्फ्लुएंजा वैक्सीन सबसे प्रभावी रोकथाम उपायों में से एक है।

विशेष रूप से बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को फ्लू के लक्षणों को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है। यदि सांस लेने में परेशानी, लगातार बिगड़ते लक्षण या गंभीर कमजोरी जैसी स्थिति हो तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर टिकी नजर

फिलहाल मेरठ में तीन नए मरीजों की पुष्टि के बाद कुल संक्रमितों की संख्या सात पहुंच गई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी, समय पर जांच और अस्पतालों की तैयारी इस संक्रमण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मलिन बस्तियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्वास्थ्य शिविर लगाने की योजना से शुरुआती स्तर पर लक्षण वाले लोगों की पहचान में मदद मिल सकती है। वहीं, मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में अलग वार्ड तथा जांच की व्यवस्था मरीजों को समय पर उपचार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कुल मिलाकर, मेरठ में H1N1 संक्रमण के नए मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियां बढ़ा दी हैं। हालांकि, फ्लू जैसे लक्षण दिखने मात्र से घबराने की जरूरत नहीं है। सही समय पर चिकित्सकीय सलाह, जांच और आवश्यक उपचार के साथ अधिकांश लोग ठीक हो जाते हैं। WHO के अनुसार, ज्यादातर मौसमी इन्फ्लुएंजा मरीज लगभग एक सप्ताह में स्वस्थ हो जाते हैं, जबकि गंभीर लक्षण या अधिक जोखिम वाले मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।

You may have missed