शहजाद पूनावाला ने बीजेपी छोड़ने की बताई वजह, बोले- घर चलाना भी जरूरी है

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: बीजेपी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद शहजाद पूनावाला ने पहली बार अपने फैसले की वजहों पर विस्तार से बात की है। एक इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी छोड़ने के पीछे मुख्य कारण उनकी आर्थिक स्थिति, निजी जिम्मेदारियां और परिवार के प्रति बढ़ती जिम्मेदारियां हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों में सक्रिय कार्यकर्ताओं को नियमित वेतन नहीं मिलता और ऐसे में लंबे समय तक 24 घंटे पार्टी के लिए समर्पित रहना उनके लिए व्यावहारिक रूप से कठिन हो गया था।

शहजाद पूनावाला बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर लंबे समय तक पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे। टीवी डिबेट, सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर वह बीजेपी का पक्ष मजबूती से रखते दिखाई देते थे। हालांकि, अब उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद उनके फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हुईं।

आर्थिक जिम्मेदारियों का दिया हवाला

एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में शहजाद पूनावाला ने कहा कि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी निजी और आर्थिक जिम्मेदारियों को संभालने की थी। उन्होंने अपने मकान मालिक का उदाहरण देते हुए कहा कि महीने की पहली तारीख को किराया देना होता है और मकान मालिक यह नहीं देखता कि कोई व्यक्ति बीजेपी में है या किसी अन्य राजनीतिक संगठन से जुड़ा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह बीजेपी से अपने खर्च उठाने की अपेक्षा नहीं रखते। उनके अनुसार, किसी राजनीतिक आंदोलन या पार्टी से जुड़ना नौकरी करने जैसा नहीं है। इसलिए पार्टी से नियमित वेतन या घर चलाने की आर्थिक जिम्मेदारी की उम्मीद करना भी उचित नहीं होगा।

पूनावाला ने कहा कि बीजेपी या कोई भी राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं को नौकरी की तरह वेतन नहीं देता। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को अपने परिवार और रोजमर्रा के खर्चों की जिम्मेदारी भी निभानी है, तो उसके लिए लगातार राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहना मुश्किल हो सकता है।

मां की देखभाल भी बनी अहम वजह

शहजाद पूनावाला ने अपने फैसले के पीछे पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पार्टी की गतिविधियों और सार्वजनिक जीवन में लगातार व्यस्त रहने के कारण वह अपनी मां को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे थे।

उनका कहना था कि जीवन की वास्तविक जिम्मेदारियों से लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। परिवार के प्रति जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी किसी राजनीतिक संगठन के प्रति प्रतिबद्धता। यही वजह है कि उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं पर दोबारा विचार किया और बीजेपी से अलग होने का निर्णय लिया।

दरअसल, किसी भी राजनीतिक दल के प्रमुख प्रवक्ता की भूमिका में लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों, टीवी डिबेट, सोशल मीडिया गतिविधियों और पार्टी के मुद्दों पर प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता होती है। ऐसे में व्यक्तिगत जीवन के लिए समय निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

बीजेपी की विचारधारा से दूरी नहीं

हालांकि, शहजाद पूनावाला ने अपने इस्तीफे को बीजेपी की विचारधारा या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से दूरी के तौर पर पेश नहीं किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी छोड़ने के बावजूद उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता बरकरार है।

उन्होंने कहा कि बीजेपी से अलग होना और बीजेपी की विचारधारा से अलग होना दो अलग बातें हैं। उनके अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से वह अब भी बीजेपी और उसके विचारों के समर्थन में अपनी बात रखते रहेंगे।

पूनावाला का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह लंबे समय तक बीजेपी के प्रमुख मीडिया चेहरों में शामिल रहे हैं। टीवी चैनलों की बहसों से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक उन्होंने पार्टी के पक्ष को सामने रखने में सक्रिय भूमिका निभाई।

‘घर चलाना बीजेपी का काम नहीं’

इंटरव्यू में शहजाद पूनावाला ने यह बात भी दोहराई कि किसी राजनीतिक पार्टी के लिए काम करना और नौकरी करना एक जैसी चीजें नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति राजनीतिक आंदोलन से जुड़ता है तो उसे इसे नौकरी के रूप में नहीं देखना चाहिए।

उनके मुताबिक, “मुझे या किसी अन्य कार्यकर्ता का घर चलाना बीजेपी का काम नहीं है।” इसी संदर्भ में उन्होंने अपनी मौजूदा परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब उनके लिए पार्टी के लिए पहले की तरह 24 घंटे उपलब्ध रहना संभव नहीं था।

इस बयान से यह संकेत मिलता है कि उनका इस्तीफा तत्काल राजनीतिक असहमति के बजाय व्यक्तिगत और व्यावहारिक परिस्थितियों से जुड़ा फैसला है। हालांकि, राजनीति में किसी बड़े चेहरे के पार्टी छोड़ने के बाद स्वाभाविक रूप से उसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी चर्चा होती है।

क्या कांग्रेस में लौटेंगे?

शहजाद पूनावाला से जब यह सवाल पूछा गया कि क्या वह भविष्य में कांग्रेस में वापसी के बारे में सोच सकते हैं, तो उन्होंने पहले तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आर यू क्रेजी?” हालांकि, इसके बाद उन्होंने अपने जवाब को आगे बढ़ाया।

पूनावाला का राजनीतिक सफर कांग्रेस से जुड़ाव के बाद बीजेपी तक पहुंचा था। इसलिए उनके बीजेपी छोड़ने के बाद कांग्रेस में वापसी की अटकलें लगना स्वाभाविक है। हालांकि, उनके मौजूदा बयानों से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि उन्होंने अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत परिस्थितियों से जोड़कर देखा है।

इसलिए उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने बीजेपी से अलग होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और पार्टी की विचारधारा के प्रति अपने समर्थन की बात कही है।

सोशल मीडिया पर जारी रखेंगे सक्रियता

पूनावाला ने यह भी संकेत दिया कि बीजेपी की औपचारिक सदस्यता छोड़ने के बावजूद सोशल मीडिया पर उनकी राजनीतिक सक्रियता खत्म नहीं होगी। वह अपने विचारों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सामने रखते रहेंगे।

यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव जरूर है, क्योंकि अब वह पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में नहीं बल्कि एक स्वतंत्र राजनीतिक आवाज के तौर पर अपनी बात रख सकते हैं। इससे उनके बयानों को लेकर राजनीतिक और मीडिया जगत की दिलचस्पी भी बनी रह सकती है।

इस्तीफे के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा

शहजाद पूनावाला का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है जब राजनीतिक दलों में नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर लगातार बहस होती रहती है। राजनीति में सक्रिय रहने वाले लोगों के सामने सार्वजनिक जीवन और निजी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होती है।

पूनावाला के मामले में भी यही मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। उन्होंने किसी राजनीतिक विवाद को अपने इस्तीफे का मुख्य कारण नहीं बताया, बल्कि आर्थिक जरूरतों और परिवार की जिम्मेदारियों को प्राथमिक वजह के तौर पर रखा है।

इसके अलावा, उन्होंने यह भी साफ करने की कोशिश की है कि बीजेपी से इस्तीफा लेने का मतलब उनके लिए राजनीतिक विचारों का पूरी तरह बदल जाना नहीं है। वह सोशल मीडिया पर अपनी गतिविधियां जारी रखने और अपने विचारों को सार्वजनिक रूप से रखने की बात कह चुके हैं।

आगे क्या होगा, इस पर नजर

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहजाद पूनावाला का अगला कदम क्या होगा। क्या वह सक्रिय राजनीति में किसी अन्य भूमिका के साथ आगे बढ़ेंगे या फिलहाल अपने निजी जीवन और आर्थिक जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

फिलहाल उनके बयानों से इतना जरूर संकेत मिलता है कि उन्होंने बीजेपी से अलग होने का फैसला व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया है। साथ ही, उन्होंने पार्टी की विचारधारा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के प्रति अपने समर्थन को भी दोहराया है।

इस तरह शहजाद पूनावाला का इस्तीफा केवल राजनीतिक बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन और निजी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की चुनौती के उदाहरण के तौर पर भी देखा जा सकता है। आने वाले दिनों में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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