ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर पलटवार, बोले- सीटों की चिंता छोड़ गठबंधन बचाने पर ध्यान दें

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Digital UP News Desk

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी क्रम में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया है। राजभर ने अखिलेश यादव की उस सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए के सहयोगी दलों के बीच सीटों के संभावित बंटवारे पर टिप्पणी की थी।

ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव से कहा कि उन्हें एनडीए में सहयोगी दलों को मिलने वाली सीटों की चिंता करने के बजाय अपने गठबंधन और पार्टी की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अपने जवाब में अखिलेश यादव पर राजनीतिक तंज कसते हुए उन्हें ‘मसखरा’ तक कह दिया। हालांकि, यह बयान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के संदर्भ में है और आने वाले समय में दोनों पक्षों की ओर से इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

अखिलेश यादव की पोस्ट के बाद शुरू हुआ विवाद

दरअसल, अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए उत्तर प्रदेश में एनडीए के सहयोगी दलों के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर दावा किया था। उन्होंने लिखा कि सूत्रों के हवाले से सामने आई खबर के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी अपने सहयोगी दलों को आगामी विधानसभा चुनाव में कुछ निश्चित संख्या में सीटें देने की योजना पर काम कर रही है।

अखिलेश यादव की पोस्ट में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के लिए 73 सीटें, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के लिए 39 सीटें, निषाद पार्टी के लिए 31 सीटें और अपना दल के लिए 19 सीटों का अनुमान बताया गया। हालांकि, ये आंकड़े अखिलेश यादव की ओर से लगाए गए अनुमान के तौर पर सामने आए हैं। इन्हें आधिकारिक सीट बंटवारा नहीं माना जा सकता।

अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में यह भी दावा किया कि एनडीए के सहयोगी दलों को सीटें देने की संभावित रणनीति ‘पीडीए’ के दबाव से जुड़ी हुई है। उन्होंने सरकार और भाजपा पर कई राजनीतिक आरोप भी लगाए और दावा किया कि आगामी चुनाव में जनता सत्ता पक्ष को जवाब देगी।

ओपी राजभर ने अखिलेश यादव को दिया जवाब

अखिलेश यादव की पोस्ट के बाद ओमप्रकाश राजभर ने एक्स पर लंबी प्रतिक्रिया पोस्ट की। उन्होंने कहा कि उन्हें एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे की चिंता करने की जरूरत नहीं है। राजभर के मुताबिक, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और भाजपा के बीच सीटों को लेकर बातचीत उचित समय पर होगी और इस संबंध में फैसला दोनों पक्षों के बीच चर्चा के आधार पर किया जाएगा।

राजभर ने अपने पोस्ट में एयरहोस्टेस की घोषणा का उदाहरण देते हुए अखिलेश यादव पर राजनीतिक कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में भी पहले अपने गठबंधन और संगठन की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने अखिलेश यादव को ‘मसखरा’ कहकर संबोधित किया।

राजभर का कहना था कि उनकी पार्टी और भाजपा के बीच सीटों को लेकर जो भी निर्णय होगा, वह आपसी बातचीत के आधार पर होगा। इसलिए सपा अध्यक्ष को इस विषय पर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

‘गठबंधन कैसे बचाएं, कांग्रेस को कैसे मनाएं’

ओमप्रकाश राजभर ने अपने जवाब में अखिलेश यादव के सामने कई राजनीतिक चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सपा अध्यक्ष को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उनका गठबंधन कैसे मजबूत रहे और कांग्रेस के साथ तालमेल किस तरह बेहतर किया जाए।

राजभर ने अपने पोस्ट में परिवार और पार्टी के भीतर की राजनीतिक चुनौतियों का भी जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने बागियों को रोकने, विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ समीकरण बनाने और आगामी चुनाव में संगठन को मजबूत रखने जैसे मुद्दों पर भी अखिलेश यादव पर तंज कसा।

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले चुनाव में उनकी पार्टी एनडीए के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरेगी और जनता के बीच जाकर समर्थन हासिल करने की कोशिश करेगी। राजभर ने दावा किया कि अखिलेश यादव की ओर से किए जा रहे राजनीतिक ‘माइंड गेम’ से उनके गठबंधन की रणनीति प्रभावित नहीं होगी।

कांग्रेस को लेकर भी उठाया सवाल

ओमप्रकाश राजभर ने अपने बयान में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने अखिलेश यादव से पूछा कि कांग्रेस को आगामी चुनाव में कितनी सीटें दी जाएंगी और कांग्रेस को गठबंधन में ‘छोटा भाई’ माना जाएगा या ‘बड़ा भाई’।

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे और गठबंधन की रणनीति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। लोकसभा चुनाव के दौरान सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था। अब विधानसभा चुनाव के लिए दोनों दलों के बीच तालमेल किस रूप में आगे बढ़ेगा, इस पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं।

अखिलेश यादव ने एनडीए पर लगाए कई आरोप

इससे पहले अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में उत्तर प्रदेश सरकार और भाजपा पर कई गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए थे। उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, किसानों, मजदूरों, सरकारी कर्मचारियों और कानून-व्यवस्था सहित कई मुद्दों का उल्लेख किया।

सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि इन मुद्दों को लेकर जनता में असंतोष है और आगामी विधानसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिल सकता है। उन्होंने भाजपा सरकार पर विभिन्न वर्गों की समस्याओं को लेकर भी सवाल उठाए।

हालांकि, अखिलेश यादव के इन दावों पर भाजपा और एनडीए के सहयोगी दलों की ओर से भी राजनीतिक प्रतिक्रिया आने की संभावना है। चुनावी माहौल में विभिन्न दल अपने-अपने मुद्दों को जनता के बीच प्रमुखता से रखने की तैयारी कर रहे हैं।

2027 के चुनाव को लेकर बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित है। चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सत्तारूढ़ एनडीए जहां अपने गठबंधन को मजबूत बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है, वहीं विपक्षी दल भी चुनावी समीकरण तैयार करने में जुटे हैं।

एनडीए में भाजपा के साथ अपना दल, निषाद पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और अन्य सहयोगी दल शामिल हैं। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले सीटों के बंटवारे का मुद्दा महत्वपूर्ण रहने वाला है। हालांकि, आधिकारिक रूप से सीटों की संख्या और बंटवारे को लेकर अंतिम निर्णय चुनाव के नजदीक होने वाली बातचीत के बाद ही सामने आने की उम्मीद है।

दूसरी ओर, विपक्षी खेमे में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चुनावी तालमेल को लेकर भी चर्चा जारी है। दोनों दलों के बीच सीटों का फार्मूला क्या होगा, यह आने वाले महीनों में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

यूपी की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले एक-दूसरे के गठबंधन और संगठन पर निशाना साधने का दौर तेज होना स्वाभाविक है। ओमप्रकाश राजभर और अखिलेश यादव के बीच ताजा बयानबाजी भी इसी राजनीतिक माहौल का हिस्सा मानी जा रही है।

एक तरफ अखिलेश यादव एनडीए के संभावित सीट बंटवारे पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ओमप्रकाश राजभर ने सपा के गठबंधन और कांग्रेस के साथ उसके संबंधों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इससे स्पष्ट है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति उत्तर प्रदेश में अहम भूमिका निभाने वाली है।

फिलहाल, एनडीए और विपक्षी गठबंधन दोनों की ओर से अंतिम चुनावी रणनीति स्पष्ट नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले समय में सीट बंटवारे, गठबंधन, उम्मीदवारों और चुनावी मुद्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है। अब देखना होगा कि भाजपा और उसके सहयोगी दल सीट बंटवारे को किस फार्मूले पर अंतिम रूप देते हैं और दूसरी ओर सपा-कांग्रेस समेत विपक्षी दल किस तरह का चुनावी गठबंधन तैयार करते हैं।

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