बहराइच में पहुँच गया नेपाल की बारिश का पानी, पढ़िए मोतीपुर के कई गांव में किस तरह की है परेशानी – पढ़ें यह खबर

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रिपोर्ट – महेश चंद्र गुप्ता 

बहराइच: नेपाल में लगातार हो रही बारिश का असर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिले बहराइच में भी दिखाई देने लगा है। तेज बारिश और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के चलते मोतीपुर तहसील क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांव बाढ़ और जलभराव की स्थिति से प्रभावित हुए हैं। वहीं, सुजौली क्षेत्र के कई गांवों में पानी भरने से ग्रामीणों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

बारिश और पानी के बढ़ाव के कारण कई संपर्क मार्गों पर भी जलभराव हो गया है। ऐसे में ग्रामीणों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, बाजार तक पहुंचने में भी लोगों को दिक्कत हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह पानी बढ़ता रहा तो आवागमन और दैनिक जरूरतों से जुड़ी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

नेपाल की बारिश का सीमावर्ती क्षेत्र पर असर

बहराइच का कुछ हिस्सा नेपाल सीमा से सटा हुआ है। इसलिए नेपाल के पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में होने वाली तेज बारिश का असर यहां की नदियों और जलधाराओं पर भी पड़ता है। लगातार बारिश के चलते पानी का दबाव बढ़ने से जिले के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन रही है।

मोतीपुर तहसील क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक गांवों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। विशेष रूप से सुजौली इलाके के कई गांवों में पानी पहुंचने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ी हैं। हालांकि, ग्रामीणों की प्राथमिक चिंता फिलहाल सुरक्षित आवागमन और आवश्यक सामान की उपलब्धता को लेकर है।

संपर्क मार्गों पर जलभराव से आवागमन प्रभावित

बाढ़ और जलभराव का सबसे ज्यादा असर गांवों को मुख्य मार्गों और बाजारों से जोड़ने वाले संपर्क रास्तों पर पड़ा है। कई स्थानों पर रास्तों पर पानी जमा होने के कारण ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। इसके चलते रोजमर्रा के काम के लिए बाजार जाने वाले लोगों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है।

ग्रामीणों के मुताबिक, सामान्य दिनों में जिन रास्तों से लोग आसानी से बाजार और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच जाते थे, अब उन्हीं रास्तों पर पानी होने के कारण आवागमन प्रभावित है। खासकर आवश्यक सामान खरीदने के लिए बाजार जाने में लोगों को कठिनाई हो रही है।

इसके अलावा, जलभराव के कारण छोटे वाहनों के आवागमन पर भी असर पड़ रहा है। ऐसे में स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही प्रभावित रास्तों की स्थिति का जायजा लेकर जरूरी कदम उठाएगा।

रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ा असर

जलभराव का प्रभाव केवल आवागमन तक सीमित नहीं है। गांवों में पानी पहुंचने के कारण लोगों की दैनिक दिनचर्या भी प्रभावित हुई है। खाद्य सामग्री, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए बाजार पर निर्भर रहने वाले ग्रामीणों के सामने पहुंचने की समस्या खड़ी हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि पानी के कारण रास्ते बाधित होने पर आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सामान की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। साथ ही, जिन इलाकों में लंबे समय तक पानी जमा रहने की आशंका है, वहां प्रशासन को लगातार स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है।

प्रशासन से राहत की मांग

बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने प्रशासन से जलभराव की समस्या से राहत दिलाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही, संपर्क मार्गों पर जमा पानी के कारण उत्पन्न परेशानी को देखते हुए वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था भी की जाए।

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन प्रभावित गांवों में स्थिति की नियमित निगरानी करे और जरूरत के अनुसार राहत एवं सहायता उपलब्ध कराए। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और ऐसे परिवारों की सुविधा पर ध्यान दिया जाए, जिन्हें बाजार या स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में अधिक परेशानी हो सकती है।

जलस्तर और बारिश पर निगरानी जरूरी

नेपाल में बारिश जारी रहने की स्थिति में बहराइच के सीमावर्ती क्षेत्रों में जलस्तर पर लगातार नजर रखना जरूरी है। स्थानीय स्तर पर पानी के बढ़ाव और बारिश की स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ाई जा सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सीमावर्ती जिलों में नेपाल की बारिश का असर स्थानीय जलधाराओं और नदियों के जलस्तर पर पड़ सकता है। इसलिए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, अनावश्यक रूप से जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचना भी जरूरी है।

ग्रामीणों को राहत का इंतजार

मोतीपुर और सुजौली क्षेत्र के प्रभावित गांवों में रहने वाले लोग अब प्रशासन से राहत की उम्मीद कर रहे हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि जलभराव वाले इलाकों में आवश्यक व्यवस्थाएं जल्द उपलब्ध कराई जाएं, ताकि दैनिक जरूरतों के लिए लोगों को अधिक परेशानी न उठानी पड़े।

वहीं, संपर्क मार्गों पर पानी जमा होने के कारण आवागमन की समस्या को देखते हुए स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था करना भी उपयोगी साबित हो सकता है। इसके अलावा, यदि पानी का स्तर बढ़ता है तो प्रभावित परिवारों की जरूरतों का आकलन कर समय रहते सहायता पहुंचाना जरूरी होगा।

फिलहाल बहराइच के मोतीपुर तहसील क्षेत्र में नेपाल की बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई है। सुजौली समेत आसपास के कई गांव प्रभावित हैं और ग्रामीणों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर इसका असर पड़ा है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश और जलस्तर की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।

प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखना और ग्रामीणों की आवश्यकताओं के अनुसार राहत व्यवस्था करना अहम होगा। वहीं, ग्रामीणों को भी स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सावधानी बरतनी चाहिए।

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