अयोध्या राम मंदिर दान मामले में चंपत राय-अनिल मिश्रा को राहत, SIT रिपोर्ट में नाम नहीं

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Digital UP News

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े दान की कथित अनियमितता के मामले में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा को बड़ी राहत मिलने की खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली विशेष जांच टीम (SIT) की अंतिम रिपोर्ट में दोनों पदाधिकारियों का उल्लेख नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में उनके खिलाफ किसी प्रकार की प्रत्यक्ष भूमिका का जिक्र नहीं है।

हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित दूसरी SIT की जांच अभी जारी है। इसलिए मौजूदा रिपोर्ट को मामले की अंतिम न्यायिक स्थिति मानना उचित नहीं होगा। आगे की जांच और उससे जुड़े निष्कर्ष इस पूरे प्रकरण की दिशा तय कर सकते हैं।

SIT की अंतिम रिपोर्ट में दोनों का नाम नहीं

सूत्रों के अनुसार, विजय विश्वास पंत वाली SIT ने राम मंदिर दान से जुड़े मामले की जांच के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम शामिल नहीं होने की बात कही जा रही है।

बताया गया है कि जांच के दौरान जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, रिपोर्ट में मुख्य रूप से उन्हीं आरोपियों से संबंधित तथ्यों का उल्लेख किया गया है। वहीं, चंपत राय और अनिल मिश्रा की कथित भूमिका को लेकर रिपोर्ट में कोई उल्लेख नहीं होने की बात सामने आई है।

इससे दोनों पदाधिकारियों को फिलहाल राहत मिलती दिखाई दे रही है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट के सभी निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाने और संबंधित जांच एजेंसियों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।

गवाहों से पूछताछ को लेकर भी सवाल

मामले से जुड़े सूत्रों का दावा है कि SIT ने चंपत राय और अनिल मिश्रा से संबंधित आरोपों की जांच के दौरान किसी गवाह से पूछताछ नहीं की। यही वजह है कि अब इस जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, किसी जांच में किन लोगों से पूछताछ की गई और किन बिंदुओं को शामिल किया गया, इसका अंतिम आकलन पूरी रिपोर्ट और जांच रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही किया जा सकता है।

इसलिए फिलहाल सामने आई जानकारी को सूत्रों पर आधारित माना जा रहा है। आधिकारिक दस्तावेजों और जांच एजेंसी की ओर से विस्तृत जानकारी आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रिपोर्ट में दोनों पदाधिकारियों के नाम या भूमिका को लेकर क्या निष्कर्ष निकाला गया है।

पहले आठ लोगों की हुई थी गिरफ्तारी

राम मंदिर दान से जुड़े कथित मामले में इससे पहले आठ लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। आरोपों की जांच के दौरान पुलिस और जांच एजेंसियों ने कई लोगों से पूछताछ की और मामले से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य तथ्यों को खंगाला।

इस प्रकरण में कार्रवाई के बाद मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई स्तरों पर सवाल उठे थे। विशेष रूप से चंपत राय और अनिल मिश्रा को लेकर भी चर्चा हुई थी। हालांकि, अब सामने आई SIT की अंतिम रिपोर्ट में दोनों का नाम नहीं होने की बात कही जा रही है।

यदि रिपोर्ट की यह जानकारी आधिकारिक रूप से पुष्ट होती है, तो यह दोनों पदाधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण राहत मानी जाएगी।

आरोपों के बीच पद से इस्तीफे की चर्चा

मामले के दौरान चंपत राय और अनिल मिश्रा पर भी सवाल उठे थे। इसके बाद दोनों के पद से इस्तीफा देने की चर्चा सामने आई थी। हालांकि, पूरे प्रकरण में दोनों की वास्तविक भूमिका को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं।

अब विजय विश्वास पंत वाली SIT की रिपोर्ट में दोनों का उल्लेख नहीं होने की खबर ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

गौरतलब है कि मंदिर से जुड़ा दान और श्रद्धालुओं की ओर से मिलने वाला चढ़ावा अत्यंत संवेदनशील विषय है। ऐसे में इससे जुड़े किसी भी आरोप की जांच का पारदर्शी तरीके से होना महत्वपूर्ण माना जाता है।

दूसरी SIT की जांच अभी बाकी

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि एक अन्य SIT भी जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में दूसरी SIT गठित की गई थी और उसकी जांच अभी जारी है।

ऐसे में विजय विश्वास पंत वाली SIT की अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बावजूद मामला पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता। दूसरी जांच में सामने आने वाले तथ्य और निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होंगे।

यदि दूसरी SIT की जांच में किसी नए तथ्य या साक्ष्य का पता चलता है, तो उसका असर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इसलिए फिलहाल दोनों जांचों के निष्कर्षों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।

मंदिर ट्रस्ट को सौंपी गई रिपोर्ट

सूत्रों के मुताबिक, विजय विश्वास पंत के नेतृत्व वाली SIT की अंतिम रिपोर्ट अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में मामले की जांच से जुड़े निष्कर्षों को शामिल किया गया है।

बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में पहले गिरफ्तार किए गए लोगों से संबंधित तथ्यों का उल्लेख है। वहीं, चंपत राय और अनिल मिश्रा के संबंध में कोई उल्लेख नहीं होने की बात सामने आई है।

अब रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया क्या होगी, इस पर भी नजर रहेगी। ट्रस्ट और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर रिपोर्ट का परीक्षण किया जा सकता है।

मामले में आगे क्या होगा?

राम मंदिर दान मामले में आगे की कार्रवाई मुख्य रूप से जारी जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। एक तरफ विजय विश्वास पंत वाली SIT की रिपोर्ट सामने आ चुकी है, जबकि दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही SIT की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।

इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पूरे मामले में अंतिम रूप से किसकी क्या भूमिका रही। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

साथ ही, मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों के संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और जांच एजेंसियों के बयान का इंतजार करना जरूरी है।

अयोध्या के राम मंदिर दान से जुड़े कथित मामले में विजय विश्वास पंत वाली SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम नहीं होने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में दोनों की भूमिका का उल्लेख नहीं किया गया है और उन्हें इस जांच में राहत मिली है।

हालांकि, मामले की दूसरी जांच अभी जारी है। इसलिए यह प्रकरण पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। आने वाले समय में दूसरी SIT की रिपोर्ट और आधिकारिक स्तर पर सामने आने वाले तथ्यों से यह स्पष्ट होगा कि मामले में अंतिम निष्कर्ष क्या निकलता है।

नोट: इस खबर में SIT रिपोर्ट और दोनों पदाधिकारियों को मिली कथित राहत से जुड़ी जानकारी उपलब्ध सूत्रों के आधार पर दी गई है। अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

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