आईआईटी कानपुर का बड़ा कदम, 3 लाख छात्रों को हिंदी में मिलेगी साइबर सुरक्षा की शिक्षा

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रिपोर्ट- कृष्णा शर्मा 

कानपुर: साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को जागरूक और प्रशिक्षित करने की दिशा में IIT Kanpur के C3iHub ने बड़ा कदम उठाया है। C3iHub ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (DBRAU), आगरा और विवेकानंद इन्क्यूबेशन फाउंडेशन (VIF) के साथ त्रिपक्षीय समझौता (MoU) किया है। इस समझौते के तहत विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए साइबर सुरक्षा का व्यावसायिक (वोकेशनल) पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा।

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य विश्वविद्यालय से संबद्ध 570 से अधिक कॉलेजों के 3 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों तक साइबर सुरक्षा की शिक्षा पहुंचाना है। खास बात यह है कि यह पाठ्यक्रम पूरी तरह ऑनलाइन और हिंदी भाषा में संचालित किया जाएगा। इससे अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अंग्रेजी भाषा के कारण तकनीकी शिक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रशिक्षण को समझने में कठिनाई होती है।

हिंदी में मिलेगा साइबर सुरक्षा का व्यावहारिक प्रशिक्षण

आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटनाओं को लेकर जागरूकता भी बेहद जरूरी हो गई है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा।

C3iHub, आईआईटी कानपुर अपने साइबर सुरक्षा क्षेत्र में शोध और प्रशिक्षण के अनुभव के आधार पर पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करेगा। साथ ही पाठ्यक्रम के संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दूसरी ओर, विवेकानंद इन्क्यूबेशन फाउंडेशन यानी VIF बड़े स्तर पर कार्यक्रम को संचालित करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगा।

इस पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया जाएगा कि विद्यार्थी साइबर सुरक्षा के केवल सैद्धांतिक पहलुओं को ही न समझें, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन में उपयोग होने वाले व्यावहारिक कौशल की भी जानकारी मिल सके।

साइबर अपराध से बचाव से लेकर डार्क वेब तक की जानकारी

प्रस्तावित पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा के कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया जाएगा। इसमें साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा के बुनियादी नियमों के साथ सोशल मीडिया से जुड़े खतरों पर विशेष जानकारी दी जाएगी।

इसके अलावा विद्यार्थियों को पहचान की चोरी, व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग, महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, डार्क वेब, साइबर हमलों और इंटरनेट से जुड़ी गैर-कानूनी गतिविधियों के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।

पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना भी होगा कि इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय किन सावधानियों को अपनाना चाहिए। मजबूत पासवर्ड, व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा, संदिग्ध लिंक और संदेशों से बचाव तथा सोशल मीडिया पर गोपनीयता बनाए रखने जैसे विषय भी साइबर सुरक्षा की बुनियादी समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण होंगे।

वर्चुअल लैब से मिलेगा व्यावहारिक अनुभव

इस साइबर सुरक्षा कार्यक्रम को केवल वीडियो लेक्चर तक सीमित नहीं रखा जाएगा। पाठ्यक्रम में प्रश्नोत्तरी, कार्यशालाएं और प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा विद्यार्थियों को विशेष वर्चुअल लैब की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

वर्चुअल लैब के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा से जुड़ी वास्तविक परिस्थितियों को समझने और उनके समाधान का व्यावहारिक अनुभव मिल सकेगा। इससे विद्यार्थियों में साइबर सुरक्षा को लेकर आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ डिजिटल दुनिया में सुरक्षित व्यवहार की आदत विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।

विश्वविद्यालय में बनेगा साइबर सुरक्षा परामर्श केंद्र

इस समझौते के तहत डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में एक समर्पित Cybersecurity Counselling Cell (CCC) भी स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों में जागरूकता और सहायता प्रदान करने की दिशा में काम करेगा।

साइबर अपराध की घटनाओं की रोकथाम, ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर जागरूकता और विद्यार्थियों को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना इस केंद्र की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर खतरों की पहचान करने और उनसे बचने के तरीकों की जानकारी भी दी जा सकेगी।

इन अधिकारियों ने किया समझौते पर हस्ताक्षर

त्रिपक्षीय समझौते पर आईआईटी कानपुर के कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर, C3iHub के कार्यक्रम निदेशक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र बसवाना, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के IQAC एवं VIF के निदेशक प्रो. संजय चौधरी तथा विश्वविद्यालय कंप्यूटर केंद्र (UCC) के निदेशक प्रो. अनिल गुप्ता ने हस्ताक्षर किए।

समझौता समारोह में आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। वहीं डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुईं। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के कुलपति एवं एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

विद्यार्थियों को लेकर कुलपति ने कही बड़ी बात

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने इस पहल के लिए C3iHub और विश्वविद्यालय की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से संबद्ध 570 से अधिक कॉलेजों में लाखों विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा केवल इंजीनियरों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक जीवन कौशल बन चुका है। C3iHub, आईआईटी कानपुर और विवेकानंद इन्क्यूबेशन फाउंडेशन के साथ साझेदारी से विद्यार्थियों को उनकी अपनी भाषा में बड़े स्तर पर साइबर सुरक्षा की महत्वपूर्ण शिक्षा देने का अवसर मिलेगा।

ग्रामीण और अर्ध-शहरी विद्यार्थियों को मिलेगा विशेष लाभ

इस पहल की एक अहम विशेषता इसका हिंदी माध्यम होना है। तकनीकी और साइबर सुरक्षा से जुड़े कई पाठ्यक्रम अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध होते हैं। ऐसे में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए उन्हें समझना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हिंदी में ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध होने से बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपनी सुविधानुसार साइबर सुरक्षा की जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें किसी विशेष स्थान पर जाकर प्रशिक्षण लेने की आवश्यकता नहीं होगी। ऑनलाइन माध्यम और वर्चुअल लैब की सुविधा इस कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में मदद करेगी।

डिजिटल युग में बढ़ेगी साइबर जागरूकता

डिजिटल तकनीक ने शिक्षा, रोजगार, बैंकिंग और संचार को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। ऐसे समय में युवाओं को शुरुआत से ही डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आईआईटी कानपुर के C3iHub, DBRAU आगरा और VIF की यह साझेदारी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है। यदि कार्यक्रम अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुसार लागू होता है, तो लाखों विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के बुनियादी सिद्धांतों के साथ-साथ व्यावहारिक जानकारी भी मिल सकेगी।

इस पहल से विद्यार्थियों में डिजिटल सुरक्षा की समझ विकसित होने के साथ वे अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूक कर सकते हैं। इस प्रकार इसका प्रभाव केवल विश्वविद्यालय और कॉलेज परिसरों तक सीमित न रहकर व्यापक समाज तक पहुंच सकता है।

1959 से तकनीकी शिक्षा में अग्रणी है आईआईटी कानपुर

आईआईटी कानपुर की स्थापना वर्ष 1959 में हुई थी और यह भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा के साथ-साथ संस्थान अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है।

संस्थान का लगभग 1,050 एकड़ में फैला परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान सुविधाओं से समृद्ध है। आईआईटी कानपुर में 21 विभाग, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम, 27 केंद्र और तीन विशेष स्कूल हैं। यहां इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा और शोध कार्य होते हैं।

590 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक विद्यार्थियों के साथ आईआईटी कानपुर देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शामिल है। ऐसे में C3iHub की यह नई पहल साइबर सुरक्षा शिक्षा को व्यापक स्तर पर विद्यार्थियों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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