मुरादाबाद में महिला पंचायत सचिव से छेड़खानी का आरोप, जिला पंचायत सदस्य समेत चार पर केस
Digital UP News Desk
मुरादाबाद: मूंढापांडे थाना क्षेत्र में महिला पंचायत सचिव के साथ कथित छेड़खानी और सरकारी कार्य में बाधा डालने का मामला सामने आया है। महिला पंचायत सचिव की तहरीर के आधार पर पुलिस ने भाजपा के जिला पंचायत सदस्य अजयवीर यादव, प्रधान उस्मान समेत चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस ने मामले में छेड़खानी, सरकारी कार्य में बाधा डालने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है।
महिला पंचायत सचिव ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि जिला पंचायत सदस्य अजयवीर यादव अपने सहयोगियों के माध्यम से झूठी शिकायतें कराकर उनके सरकारी कार्यों में लगातार बाधा उत्पन्न करते हैं। सचिव के अनुसार, चार अप्रैल को वह अपने कार्यालय में बैठकर सरकारी काम निपटा रही थीं। इसी दौरान अजयवीर यादव अपने कुछ सहयोगियों के साथ कार्यालय पहुंचे।
कार्यालय में अभद्र व्यवहार का आरोप
महिला पंचायत सचिव का आरोप है कि कार्यालय पहुंचने के बाद आरोपितों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। आरोप है कि अजयवीर यादव उनके पास कुर्सी डालकर बैठ गए और कथित तौर पर अशोभनीय इशारे किए। सचिव ने इसका विरोध किया तो उनके साथ कथित रूप से छेड़खानी की गई।
तहरीर के मुताबिक, विरोध करने पर आरोपितों की ओर से उन्हें झूठी शिकायत के आधार पर निलंबित कराने की धमकी दी गई। इसके साथ ही जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। महिला सचिव का यह भी आरोप है कि कार्यालय में रखे सरकारी अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ की गई और उन्हें मोड़ दिया गया।
इस घटना के बाद महिला पंचायत सचिव ने पुलिस से मामले की शिकायत करते हुए आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामले को दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जन्म प्रमाणपत्र को लेकर शुरू हुआ विवाद
मामले की पृष्ठभूमि में जन्म प्रमाणपत्र बनाने को लेकर विवाद भी सामने आया है। महिला पंचायत सचिव के अनुसार, इससे पहले जिला पंचायत सदस्य अजयवीर यादव ने गांव के मनोहर और कुलवंत को अधूरे दस्तावेजों के साथ जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनके पास भेजा था।
सचिव का आरोप है कि दोनों के माध्यम से उन पर नियमों के विपरीत जन्म प्रमाणपत्र जारी करने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि उन्हें इसके लिए प्रलोभन भी दिया गया था। हालांकि, सचिव ने नियमों का हवाला देते हुए कथित तौर पर ऐसा प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद विवाद बढ़ने की बात सामने आई है। सचिव का आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार करने के बाद ही उनके खिलाफ शिकायतें करने और सरकारी कार्यों में बाधा डालने का सिलसिला शुरू हुआ।
जिला पंचायत सदस्य ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, भाजपा के जिला पंचायत सदस्य अजयवीर यादव ने महिला पंचायत सचिव की ओर से लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी तरह की छेड़खानी या अभद्रता नहीं की है।
अजयवीर यादव के मुताबिक, पंचायत सचिव के कार्यालय में कैमरे लगे हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई कैमरों की रिकॉर्डिंग से सामने आ सकती है। उनका आरोप है कि पंचायत सचिव ने बिना सुविधा शुल्क के जन्म प्रमाणपत्र जारी नहीं किया था। इसी वजह से उन्होंने मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की थी।
जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को शिकायत के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए निष्पक्ष जांच की बात कही है।
चार लोगों के खिलाफ पुलिस ने दर्ज की रिपोर्ट
मूंढापांडे थाना पुलिस के अनुसार, महिला पंचायत सचिव की तहरीर प्राप्त होने के बाद मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। थाना प्रभारी मोहित चौधरी ने बताया कि तहरीर के आधार पर भाजपा के जिला पंचायत सदस्य अजयवीर यादव, कुलवंत, मनोहर और प्रधान उस्मान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। जांच के दौरान घटनास्थल, कार्यालय में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग, संबंधित दस्तावेजों और दोनों पक्षों के बयानों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेजों और पूर्व में की गई शिकायतों की भी जांच की जा सकती है।
जांच के बाद सामने आएगी स्थिति
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि महिला पंचायत सचिव द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था। पुलिस जांच में उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक ओर सरकारी कार्यालय में महिला कर्मचारी के साथ कथित अभद्र व्यवहार और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप हैं, जबकि दूसरी ओर जिला पंचायत सदस्य ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों से जांच कराने की बात कही है।
नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी दस्तावेज को जारी करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और जरूरी अभिलेखों का पालन किया जाना आवश्यक होता है। इसलिए जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच भी पुलिस की कार्रवाई का अहम हिस्सा हो सकती है।
फिलहाल दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

