कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 23वें दिन भी मरम्मत, बारिश के बाद कई जगह धंसी सड़क

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Digital UP News Desk

लखनऊ: करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने और उखड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लोकार्पण के महज कुछ दिनों बाद शुरू हुई सड़क की मरम्मत का काम 23वें दिन भी अलग-अलग स्थानों पर जारी रहा। खास बात यह है कि एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड हिस्से में करीब 80 प्रतिशत सड़क पर मरम्मत और पैचिंग का काम होने के बाद भी हल्की बारिश के बाद नई जगहों पर सड़क दबने और उखड़ने की समस्या सामने आ रही है।

रविवार को भी एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में सड़क की ऊपरी परत खराब मिलने के बाद निर्माण एजेंसी की ओर से मरम्मत शुरू कराई गई। इनमें कुछ स्थान कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर हैं, जबकि लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन पर भी सड़क की स्थिति प्रभावित हुई है। इससे एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता, जलनिकासी व्यवस्था और सड़क के किनारे किए गए कार्यों पर सवाल उठने लगे हैं।

अड़ेरुआ गांव के पास 30 मीटर सड़क धंसी

कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर आजाद मार्ग टोल प्लाजा की ओर किमी संख्या 62 के पास अड़ेरुआ गांव में सड़क का करीब 30 मीटर हिस्सा जगह-जगह धंस गया। सड़क की ऊपरी परत को हटाकर दोबारा निर्माण का काम शुरू कराया गया है। इसी के आसपास किमी संख्या 62.5 पर भी सड़क के दबने के संकेत दिखाई देने लगे हैं।

निर्माण एजेंसी के कर्मचारी प्रभावित हिस्से की जांच के साथ मरम्मत में जुटे हैं। सड़क के धंसने से वाहनों की आवाजाही पर भी असर पड़ रहा है। हालांकि यातायात को नियंत्रित करते हुए वाहनों को एक्सप्रेसवे से निकाला जा रहा है।

नेवरना गांव के पास 100 मीटर हिस्से में बनीं गहरी नालियां

इसी लेन पर नेवरना गांव के पास किमी संख्या 58 से 59 के बीच करीब 100 मीटर सड़क दब गई है। इस हिस्से से गुजरते समय वाहनों के लहराने की स्थिति बन रही है। वाहन चालक अपनी रफ्तार कम करके सावधानी से यहां से निकल रहे हैं।

सड़क के इस हिस्से में पहियों के दबाव से ट्रैक जैसी गहरी लकीरें बन गई हैं। निर्माण कार्य में लगे इंजीनियर के अनुसार, सड़क के अंदर पानी पहुंचने से नीचे की मिट्टी और गिट्टी में नमी बढ़ गई। इसके कारण सड़क की मजबूती प्रभावित हुई और लगातार वाहनों के गुजरने से सड़क दबती चली गई।

इसी तरह किमी संख्या 49 के पास भटखेरवा गांव के नजदीक करीब 50 मीटर सड़क धंसने की बात सामने आई है। यहां भी प्रभावित हिस्से को उखाड़कर दोबारा सड़क बनाने का काम चल रहा है।

सहरावां नहर पुल पर पहली बारिश में उखड़ी परत

लखनऊ की ओर जाने वाले मार्ग पर भी सड़क की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। किमी संख्या 31.5 पर सहरावां नहर पुल के ऊपर बनी सड़क की डामर और गिट्टी की परत पहली ही बारिश के बाद उखड़ गई। गिट्टी सड़क पर फैलने के कारण वाहनों के लिए परेशानी की स्थिति बन गई।

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस स्थान पर मरम्मत शुरू कर दी गई है। फिलहाल दो लेन को बंद करके वाहनों को एक हाईस्पीड लेन से निकाला जा रहा है। इससे वाहन चालकों को इस हिस्से में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।

बाबाखेड़ा अंडरपास के पास डिवाइडर तिरछा

किमी संख्या 53.6 पर बाबाखेड़ा अंडरपास ज्वाइंट के पास सड़क दबने के कारण डिवाइडर भी तिरछा दिखाई दिया। इसके साथ ही डिवाइडर के पास दरार जैसी स्थिति और सड़क पर गड्ढा बनने से पानी भरने लगा।

हालांकि निर्माण एजेंसी के जेई का कहना है कि डिवाइडर में लगाए गए कंक्रीट बोल्डर टूटे नहीं हैं। उनके अनुसार, डिवाइडर का जोड़ खुला है, जिसे ठीक किया जा रहा है। इसके बावजूद सड़क के दबने और पानी जमा होने की स्थिति ने एक्सप्रेसवे की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जलनिकासी व्यवस्था पर उठे सवाल

एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक तकनीक से तैयार किए जाने का दावा किया गया था। लेकिन लोकार्पण के कुछ ही दिनों बाद सड़क पर जगह-जगह समस्या सामने आने के बाद निर्माण गुणवत्ता और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान सामने आए प्राथमिक निष्कर्षों में जलनिकासी व्यवस्था की कमजोरी को सड़क की समस्या का प्रमुख कारण माना जा रहा है। बारिश का पानी यदि सड़क की परतों के नीचे पहुंचता है तो मिट्टी और गिट्टी में नमी बढ़ने से सड़क की मजबूती प्रभावित हो सकती है। इसके बाद भारी यातायात के दबाव में सड़क धंसने लगती है।

इसी समस्या को देखते हुए निर्माण एजेंसी अब जलनिकासी व्यवस्था में सुधार के लिए बड़े स्तर पर काम कर रही है। सेफ्टी ग्रिल के पिलर को छोड़कर कई हिस्सों की कंक्रीट एजिंग हटाई जा रही है, ताकि बारिश का पानी बिना रुकावट बाहर निकल सके। बताया जा रहा है कि करीब 45 किलोमीटर के हिस्से में इसी तरह के सुधार कार्य किए जाने हैं।

ग्रीनफील्ड हिस्से में फुटपाथ भी किया जा रहा पक्का

एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड हिस्से में सड़क के दोनों तरफ बने कच्चे फुटपाथ को भी सड़क धंसने की समस्या से जोड़कर देखा जा रहा है। पहले यहां हार्वेस्टिंग सिस्टम तकनीक के आधार पर फुटपाथ तैयार किए जाने की बात कही गई थी।

हालांकि जांच के दौरान जलनिकासी व्यवस्था में कमी सामने आने के बाद अब दोनों तरफ के फुटपाथ को पक्का किया जा रहा है। असोहा क्षेत्र में सड़क के किनारे सीमेंट और कंक्रीट डालकर फुटपाथ को मशीन से समतल करने का काम चल रहा है। इसका उद्देश्य बारिश के पानी को सड़क के आसपास रुकने से रोकना और उसे निर्धारित जलनिकासी मार्ग तक पहुंचाना है।

निर्माण एजेंसी के अनुसार, करीब 45 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हिस्से में सड़क के दोनों किनारों पर आवश्यक सुधार किए जाएंगे। इसके अलावा जहां-जहां सड़क दब गई है, वहां क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर नई सड़क बनाई जा रही है।

ठेकेदारों की चूक भी मानी जा रही वजह

निर्माण एजेंसी के मैनेजर सत्य नारायण के मुताबिक एक्सप्रेसवे को यातायात के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने माना कि सड़क धंसने के पीछे कुछ स्थानों पर तकनीकी खामियां और कुछ जगहों पर ठेकेदारों की चूक हो सकती है।

उनके अनुसार, नालियों को ठीक कराया जा रहा है और सड़क के किनारे फुटपाथ को भी पक्का किया जा रहा है। जहां सड़क दब रही है, वहां पुराने हिस्से को उखाड़कर नई सड़क बनाई जा रही है। उनका कहना है कि मरम्मत का उद्देश्य एक्सप्रेसवे को बेहतर और सुरक्षित बनाना है।

लगातार मरम्मत से उठ रहे सवाल

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर लगातार सामने आ रही सड़क धंसने की घटनाओं ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और भविष्य में सड़क की टिकाऊ क्षमता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर तब, जब एक्सप्रेसवे का एक बड़ा हिस्सा बनने के कुछ समय बाद ही मरम्मत की जरूरत महसूस होने लगी है।

फिलहाल निर्माण एजेंसी की ओर से प्रभावित हिस्सों में मरम्मत और जलनिकासी सुधार का काम जारी है। बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति पर विशेष निगरानी रखने की जरूरत होगी। यदि जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान होता है और सड़क की परतों को तकनीकी मानकों के अनुरूप मजबूत किया जाता है, तभी एक्सप्रेसवे पर बार-बार होने वाली मरम्मत को रोका जा सकेगा।

इस बीच, वाहन चालकों के लिए जरूरी है कि वे मरम्मत वाले हिस्सों में निर्धारित गति सीमा का पालन करें और सड़क पर लगाए गए संकेतों के अनुसार ही वाहन चलाएं। आने वाले दिनों में बारिश के दौरान एक्सप्रेसवे की स्थिति यह तय करने में अहम होगी कि किए जा रहे सुधार कितने प्रभावी साबित होते हैं।

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