अमरोहा में अधिवक्ता को ईमेल से मिली जान से मारने की धमकी, जानिए कौन हो सकता है वो और क्या कर रही पुलिस

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रिपोर्ट – इकबाल अंसारी 

अमरोहा: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद में एक अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता को ईमेल के जरिए कथित तौर पर जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। मामला देहात थाना क्षेत्र के बागडपुर कलां गांव का है। यहां रहने वाले अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता आलम मलिक ने पुलिस को तहरीर देकर मामले की जांच और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अधिवक्ता के मुताबिक, उन्हें यह धमकी सोशल मीडिया पर मुस्लिम समाज में तलाक के बाद होने वाली हलाला की प्रक्रिया में बदलाव को लेकर किए गए एक पोस्ट के बाद मिली। इसके अलावा, पाकिस्तान के विरोध से संबंधित उनकी विचारधारा को लेकर भी ईमेल में आपत्तिजनक और धमकी भरी बातें किए जाने का आरोप है।

फेसबुक पोस्ट के बाद आया ईमेल

आलम मलिक का कहना है कि उन्होंने कुछ दिन पहले अपने फेसबुक अकाउंट पर मुस्लिम समाज में तलाक के बाद होने वाली हलाला की प्रक्रिया में बदलाव को लेकर एक पोस्ट साझा की थी। उनका दावा है कि इसी पोस्ट के बाद उन्हें ईमेल के माध्यम से धमकी दी गई।

तहरीर के अनुसार, 15 अगस्त की रात करीब 9:58 बजे अधिवक्ता के ईमेल पर एक संदेश प्राप्त हुआ। आरोप है कि संदेश में हलाला की प्रक्रिया में बदलाव की मांग करने और पाकिस्तान का विरोध करने को लेकर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

अधिवक्ता ने पुलिस को दी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि ईमेल भेजने वाले व्यक्ति ने खुद को प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल कायदा का सदस्य बताया। ईमेल में कथित तौर पर यह भी कहा गया कि संगठन के सदस्य आसपास मौजूद हैं।

हालांकि, ईमेल भेजने वाले व्यक्ति की वास्तविक पहचान और उसके दावे की सत्यता की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल मामला शिकायत और लगाए गए आरोपों के आधार पर जांच का विषय है।

धमकी मिलने के बाद पुलिस से शिकायत

ईमेल मिलने के बाद आलम मलिक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए देहात थाने में तहरीर दी। उन्होंने पुलिस से मामले की रिपोर्ट दर्ज करने और धमकी देने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

अधिवक्ता का कहना है कि धमकी मिलने के बाद वह चिंतित हैं और उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका है। उन्होंने पुलिस से ईमेल की तकनीकी जांच कराने, संदेश भेजने वाले व्यक्ति की पहचान करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।

पुलिस के लिए ऐसे मामलों में ईमेल के स्रोत, तकनीकी विवरण और संदेश भेजने वाले व्यक्ति की पहचान की जांच महत्वपूर्ण होती है। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाता है कि धमकी वास्तविक थी या किसी व्यक्ति ने भय पैदा करने के उद्देश्य से ऐसा संदेश भेजा।

सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बढ़ा विवाद

बताया गया है कि आलम मलिक सामाजिक मुद्दों पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी राय रखते रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने मुस्लिम समाज में तलाक के बाद होने वाली हलाला की प्रक्रिया में बदलाव को लेकर अपनी बात फेसबुक पर साझा की थी।

सोशल मीडिया पर धार्मिक और सामाजिक मुद्दों से जुड़े पोस्ट कई बार बहस का विषय बन जाते हैं। ऐसे में किसी भी विचार या टिप्पणी के जवाब में धमकी देना कानूनन उचित नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को किसी पोस्ट या विचार से आपत्ति है तो वह कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख सकता है।

इसी वजह से अधिवक्ता ने भी पुलिस के समक्ष शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की है, ताकि धमकी देने वाले व्यक्ति की वास्तविक पहचान सामने आ सके।

पाकिस्तान के विरोध का भी किया गया जिक्र

शिकायत के मुताबिक, कथित धमकी भरे ईमेल में पाकिस्तान के विरोध को लेकर भी आपत्ति जताई गई। अधिवक्ता का आरोप है कि इसी कारण उन्हें निशाना बनाने की बात कही गई।

मामले में यह पहलू भी जांच का विषय है कि ईमेल वास्तव में किस व्यक्ति या समूह की ओर से भेजा गया। पुलिस जांच में ईमेल के तकनीकी स्रोत, इस्तेमाल किए गए अकाउंट और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की जा सकती है।

डिजिटल माध्यम से दी गई धमकी के मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए ईमेल को सुरक्षित रखना और उसकी मूल जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराना जांच में उपयोगी हो सकता है।

पुलिस जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एक अधिवक्ता ने ईमेल के माध्यम से जान से मारने की धमकी मिलने की शिकायत पुलिस से की है। वहीं, धमकी देने वाले की पहचान और ईमेल में किए गए संगठन से जुड़े दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

ऐसे मामलों में पुलिस जांच के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ईमेल किसने भेजा और उसका उद्देश्य क्या था। साथ ही, जांच के दौरान यह भी सामने आ सकता है कि धमकी के पीछे कोई व्यक्तिगत विवाद, सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर प्रतिक्रिया या किसी अन्य कारण की भूमिका थी।

पुलिस यदि मामले में मुकदमा दर्ज करती है तो उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, अधिवक्ता की सुरक्षा को लेकर भी स्थानीय स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

अधिवक्ता ने मांगी सुरक्षा

आलम मलिक ने अपनी शिकायत में बताया है कि धमकी मिलने के बाद वह खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस से न केवल आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, बल्कि अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।

किसी भी नागरिक को अपनी बात रखने या सामाजिक मुद्दों पर विचार व्यक्त करने के कारण धमकी मिलना गंभीर विषय है। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। इसलिए पुलिस की जांच और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ईमेल की जांच से खुलेगा मामला

इस पूरे प्रकरण में ईमेल सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया जा रहा है। पुलिस जांच के दौरान संदेश के तकनीकी विवरण, भेजने वाले अकाउंट और उपलब्ध डिजिटल जानकारी की जांच कर सकती है। यदि आरोपी की पहचान होती है तो उसके खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं, अधिवक्ता की शिकायत के बाद स्थानीय स्तर पर भी मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल सभी की नजर पुलिस जांच पर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि धमकी के पीछे कौन था और उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था।

अमरोहा के बागडपुर कलां निवासी अधिवक्ता आलम मलिक द्वारा दी गई शिकायत ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि सोशल मीडिया पर संवेदनशील सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर विचार रखते समय असहमति को किस तरह लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से व्यक्त किया जाए। दूसरी ओर, यदि किसी व्यक्ति को वास्तव में धमकी दी गई है तो उसकी जांच कर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है।

नोट: इस खबर में धमकी और ईमेल से संबंधित सभी बातें शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। ईमेल भेजने वाले व्यक्ति की पहचान और उसके कथित संगठन से संबंध की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही मानी जाएगी।

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