गाजियाबाद में चाइनीज मांझे का कहर, NH-9 पर बाइक सवार युवक की मौत से मचा हड़कंप
Digital UP News Desk
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे ने एक बार फिर गंभीर हादसे को जन्म दे दिया। 15 अगस्त की शाम नेशनल हाईवे-9 (NH-9) पर कौशांबी क्षेत्र में बाइक से दिल्ली के गाजीपुर की ओर जा रहे एक युवक की चाइनीज मांझे की चपेट में आने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि युवक अपने दोस्त के साथ बाइक पर सवार होकर जा रहा था। इसी दौरान अचानक रास्ते में आया मांझा उसके गले में फंस गया। तेज रफ्तार बाइक के कारण यह हादसा बेहद गंभीर हो गया और युवक की मौके पर ही जान चली गई।
घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हादसे की जानकारी मिलने पर संबंधित पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी जुटाई। यह घटना एक बार फिर प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री, इस्तेमाल और इसके खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
दिल्ली की ओर जा रहा था बाइक सवार युवक
जानकारी के अनुसार, 15 अगस्त की शाम एक युवक अपने दोस्त के साथ बाइक पर सवार होकर दिल्ली के गाजीपुर की तरफ जा रहा था। दोनों NH-9 के रास्ते से गुजर रहे थे। इसी दौरान कौशांबी क्षेत्र में अचानक प्रतिबंधित चाइनीज मांझा युवक के सामने आ गया।
बताया जा रहा है कि बाइक की रफ्तार अधिक होने के कारण युवक को संभलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका। मांझा उसके गले में उलझ गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा इतना अचानक हुआ कि बाइक सवार युवक और उसके साथी को तत्काल कुछ समझने का अवसर तक नहीं मिला।
इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों ने मदद की कोशिश की। हालांकि, युवक की हालत बेहद गंभीर थी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
चाइनीज मांझे की धार बनी हादसे की वजह
चाइनीज मांझा लंबे समय से लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाता रहा है। सामान्य पतंग की डोर की तुलना में यह मांझा अधिक मजबूत और धारदार होता है। यही वजह है कि सड़क पर चलते दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह विशेष रूप से खतरनाक साबित हो सकता है।
NH-9 जैसे व्यस्त मार्ग पर वाहनों की गति अधिक रहती है। ऐसे में यदि अचानक कोई पतंग की डोर या मांझा रास्ते में आ जाए तो वाहन चालक को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। यही स्थिति इस हादसे में भी सामने आने की बात कही जा रही है।
इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझा आखिर लोगों तक कैसे पहुंच रहा है। प्रशासन और पुलिस की ओर से समय-समय पर इसके खिलाफ कार्रवाई की जाती रही है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में इसकी उपलब्धता की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
प्रतिबंध के बावजूद इस्तेमाल पर सवाल
चाइनीज मांझे को लेकर प्रशासन की ओर से लगातार लोगों को जागरूक किया जाता है। इसके इस्तेमाल से इंसानों के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीवों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। सड़क और हाईवे के आसपास पतंग उड़ाने की स्थिति में यह खतरा और बढ़ जाता है।
खासकर दोपहिया वाहन चालक इसकी चपेट में आसानी से आ सकते हैं। बाइक या स्कूटर से सफर करने वाले व्यक्ति का चेहरा और गर्दन खुली रहती है। अचानक सामने आने वाली डोर को देख पाना कई बार संभव नहीं होता। परिणामस्वरूप छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
गाजियाबाद की यह घटना इसी खतरे की गंभीर तस्वीर सामने लाती है। एक परिवार ने अपने सदस्य को खो दिया और एक दोस्त ने अपनी आंखों के सामने साथी को खो दिया। हालांकि हादसे से जुड़े अन्य तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
हाईवे पर बढ़ जाता है खतरा
NH-9 गाजियाबाद और दिल्ली के बीच महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। इस मार्ग पर बड़ी संख्या में वाहन चलते हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालक कई बार तेज रफ्तार में सफर करते हैं। ऐसे में सड़क के ऊपर या सामने आई पतंग की डोर बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
यदि कोई डोर सड़क के ऊपर मौजूद हो और वाहन चालक को समय रहते दिखाई न दे, तो अचानक ब्रेक लगाने से भी दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, तेज गति से चलते वाहन पर सवार व्यक्ति के लिए डोर से बचना और भी मुश्किल हो जाता है।
इसलिए विशेषज्ञों और प्रशासन की ओर से समय-समय पर दोपहिया वाहन चालकों से सावधानी बरतने की अपील की जाती है। साथ ही पतंग उड़ाने वालों से भी कहा जाता है कि वे ऐसे स्थानों का चयन करें जहां सड़क, हाईवे, बिजली की लाइन और सार्वजनिक आवाजाही प्रभावित न हो।
हादसे के बाद फिर उठे सुरक्षा के सवाल
गाजियाबाद में हुए इस हादसे के बाद एक बार फिर प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने की जरूरत महसूस की जा रही है। केवल कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके स्रोत तक पहुंचना भी जरूरी है। इसके अलावा पतंग बेचने वाले दुकानदारों और इसका इस्तेमाल करने वालों को भी नियमों के बारे में लगातार जागरूक करने की आवश्यकता है।
दरअसल, त्योहारों और विशेष अवसरों के दौरान पतंगबाजी बढ़ जाती है। ऐसे समय में सड़क और हाईवे के आसपास पतंग उड़ाने से जुड़े जोखिम भी बढ़ जाते हैं। इसलिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस और नागरिकों की संयुक्त जिम्मेदारी बनती है कि प्रतिबंधित मांझे का इस्तेमाल न होने दिया जाए।
इसके साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों को सुरक्षित पतंगबाजी के बारे में जानकारी देनी चाहिए। पतंग उड़ाने के लिए खुले और सुरक्षित स्थानों का इस्तेमाल करना चाहिए तथा ऐसी डोर से पूरी तरह बचना चाहिए जो किसी व्यक्ति या पक्षी के लिए खतरा बन सकती है।
लोगों से सावधानी बरतने की अपील
गाजियाबाद की घटना यह संदेश देती है कि सड़क पर सफर करते समय केवल यातायात नियमों का पालन करना ही पर्याप्त नहीं है। आसपास के वातावरण पर भी नजर रखना जरूरी है। दोपहिया वाहन चालक हेलमेट के साथ गर्दन और चेहरे की सुरक्षा के लिए भी अतिरिक्त सावधानी बरत सकते हैं, खासकर उन इलाकों में जहां पतंगबाजी अधिक होती है।
वहीं, आम लोगों से अपील है कि प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री या इस्तेमाल की जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दें। सामूहिक जागरूकता और जिम्मेदारी से ही ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।
गाजियाबाद के NH-9 पर हुआ यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रतिबंधित और खतरनाक मांझे के इस्तेमाल से पैदा होने वाले जोखिम की गंभीर चेतावनी भी है। जरूरत है कि प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिक भी इस खतरे को समझें और सुरक्षित पतंगबाजी को बढ़ावा दें, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी दुखद घटना का सामना न करना पड़े।

