कांग्रेस दफ्तर में ‘वंदे मातरम’ को लेकर विवाद, BJP के वीडियो पर जयराम रमेश ने दी सफाई

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Digital UP News

नई दिल्ली: कांग्रेस कार्यालय में ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से एक वीडियो जारी किए जाने के बाद कांग्रेस ने इस मामले पर सफाई दी है। भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया कि कांग्रेस कार्यालय में ‘वंदे मातरम’ का गायन बीच में रोक दिया गया। हालांकि, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यालय में राष्ट्रगीत का अपमान नहीं हुआ और न ही उसके गायन को बीच में रोका गया।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि भाजपा द्वारा जारी किया गया वीडियो मामले की पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे काफी देर से खड़े थे। इसी दौरान सोनिया गांधी को लगा कि इतनी देर तक उन्हें खड़े नहीं रहना चाहिए। इसलिए वह खरगे के लिए कुर्सी मंगाना चाहती थीं। हालांकि, खरगे ने खुद कुर्सी लेने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें खड़े रहने में कोई परेशानी नहीं है।

BJP ने वीडियो जारी कर उठाए सवाल

कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम का एक वीडियो भाजपा की ओर से जारी किया गया। भाजपा ने इसी वीडियो के आधार पर कांग्रेस पर ‘वंदे मातरम’ के गायन को बीच में रोकने का आरोप लगाया। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई।

भाजपा नेताओं की ओर से सवाल उठाया गया कि कांग्रेस कार्यालय में राष्ट्रगीत के सम्मान और उसके गायन को लेकर पार्टी का क्या रुख है। वीडियो के जरिए कांग्रेस पर निशाना साधते हुए भाजपा ने मामले को राजनीतिक मुद्दा बना दिया।

इसके बाद कांग्रेस की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी नेता जयराम रमेश ने कहा कि भाजपा की ओर से लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने घटनाक्रम का दूसरा पक्ष सामने रखते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ का गायन बीच में नहीं रोका गया था।

जयराम रमेश ने दी पूरे घटनाक्रम पर सफाई

जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस कार्यालय में ‘वंदे मातरम’ का अपमान नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे काफी देर से खड़े थे। कार्यक्रम के दौरान सोनिया गांधी को लगा कि खरगे को लंबे समय तक खड़े रहने में असुविधा हो सकती है।

इसी वजह से सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी मंगाना चाहती थीं। हालांकि, खरगे ने कुर्सी लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि खड़े होने में उन्हें कोई परेशानी नहीं है।

कांग्रेस की ओर से दी गई इस सफाई के बाद पार्टी ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक विवाद पैदा करने की कोशिश बताया। पार्टी का कहना है कि पूरे घटनाक्रम को संदर्भ से अलग करके देखने के कारण भ्रम की स्थिति बनी।

‘वंदे मातरम’ को लेकर क्या है विवाद?

‘वंदे मातरम’ भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में जाना जाता है और देश के स्वतंत्रता आंदोलन में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में राष्ट्रभावना और एकजुटता की भावना को मजबूत करने में भूमिका निभाई थी।

इसी कारण सार्वजनिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में इसके गायन को लेकर विशेष संवेदनशीलता देखने को मिलती है। जब किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ के गायन से जुड़ा कोई वीडियो सामने आता है तो स्वाभाविक रूप से उस पर राजनीतिक चर्चा शुरू हो जाती है।

इस मामले में भी भाजपा द्वारा वीडियो जारी किए जाने के बाद कांग्रेस को सफाई देनी पड़ी। हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि वीडियो के आधार पर लगाया गया आरोप सही नहीं है और गीत का गायन बीच में नहीं रोका गया।

सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के बीच क्या हुआ?

कांग्रेस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान सोनिया गांधी ने देखा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे काफी समय से खड़े हैं। इसके बाद उन्होंने उनके लिए कुर्सी मंगाने की इच्छा जताई।

हालांकि, खरगे ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि उन्हें खड़े रहने में कोई परेशानी नहीं है। कांग्रेस के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम केवल खरगे की सुविधा से जुड़ा था और इसका ‘वंदे मातरम’ के सम्मान या उसके गायन को रोकने से कोई संबंध नहीं था।

यही बिंदु कांग्रेस की सफाई का मुख्य आधार है। पार्टी का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान जो कुछ हुआ, उसे राष्ट्रगीत के अपमान के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है।

BJP और कांग्रेस के बीच बढ़ी राजनीतिक बहस

इस घटनाक्रम के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा ने वीडियो के जरिए कांग्रेस पर सवाल उठाए, जबकि कांग्रेस ने इसे गलत तरीके से पेश किया गया घटनाक्रम बताया।

दरअसल, राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रभावना से जुड़े मुद्दे अक्सर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते रहे हैं। ऐसे मामलों में दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे के रुख पर सवाल उठाते हैं। इस बार भी ‘वंदे मातरम’ को लेकर सामने आए वीडियो ने राजनीतिक बहस को बढ़ा दिया है।

भाजपा की ओर से जहां वीडियो के आधार पर कांग्रेस को घेरा गया, वहीं कांग्रेस ने घटनाक्रम की परिस्थितियों का हवाला देकर आरोपों को खारिज किया। इस तरह, एक ही घटना को लेकर दोनों दलों के बीच अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

कांग्रेस ने कहा- राष्ट्रगीत का नहीं हुआ अपमान

जयराम रमेश ने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस कार्यालय में ‘वंदे मातरम’ का अपमान नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि गायन को बीच में रोकने का आरोप सही नहीं है।

उनकी सफाई के अनुसार, मल्लिकार्जुन खरगे के लंबे समय तक खड़े रहने को लेकर सोनिया गांधी ने उनकी सुविधा का ध्यान रखा था। वह उनके लिए कुर्सी मंगाना चाहती थीं, लेकिन खरगे ने खुद ऐसा करने से मना कर दिया।

इस स्पष्टीकरण के जरिए कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों का जवाब देने की कोशिश की है। पार्टी का कहना है कि पूरे वीडियो और कार्यक्रम के संदर्भ को समझे बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा

भाजपा की ओर से वीडियो जारी किए जाने के बाद इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई। राजनीतिक समर्थकों और विरोधियों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

ऐसे मामलों में वीडियो का एक छोटा हिस्सा तेजी से वायरल होने के कारण घटनाक्रम की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए कांग्रेस ने अपने पक्ष को स्पष्ट करते हुए कार्यक्रम के दौरान हुई पूरी स्थिति की जानकारी साझा की।

फिलहाल इस विवाद में भाजपा का आरोप और कांग्रेस की सफाई दोनों सामने आ चुके हैं। भाजपा वीडियो को आधार बनाकर सवाल उठा रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ के गायन को बीच में नहीं रोका गया और न ही इसका अपमान किया गया।

आगे क्या?

‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले समय में राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रह सकता है। खासतौर पर तब, जब दोनों प्रमुख दल इस मुद्दे पर अपने-अपने पक्ष को जनता के सामने रख रहे हैं।

कांग्रेस की ओर से जयराम रमेश की सफाई के बाद अब भाजपा की ओर से इस पर आगे प्रतिक्रिया आ सकती है। फिलहाल कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि उसके कार्यालय में ‘वंदे मातरम’ का अपमान नहीं हुआ और गायन बीच में नहीं रोका गया।

इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ है कि राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रभावना से जुड़े विषय राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हैं। इसलिए ऐसे मामलों में किसी वीडियो या घटना का पूरा संदर्भ समझना महत्वपूर्ण होता है। कांग्रेस ने इसी आधार पर भाजपा के आरोपों को खारिज किया है।

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