अमरोहा के बीलना गांव में सरकारी खलिहान की भूमि पर फिर निर्माण की तैयारी, शिकायत के बाद भी कार्रवाई पर सवाल

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रिपोर्ट – इकबाल अंसारी 

अमरोहा: जनपद की तहसील नौगांवा सादात क्षेत्र के गांव बीलना में सरकारी खलिहान की भूमि पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण का मामला एक बार फिर चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवा दिया था, लेकिन इसके बाद कथित रूप से कब्जा करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब कुछ समय बाद अधबने मकान पर दोबारा निर्माण की तैयारी किए जाने की बात सामने आई है।

ग्रामीणों के अनुसार, सरकारी खलिहान की भूमि पर कथित रूप से कब्जा कर मकान का निर्माण कराया जा रहा था। इसकी जानकारी मिलने पर ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से शिकायत की थी। शिकायत के बाद प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवाया। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण रुकने के बाद भी भूमि की स्थिति को लेकर स्थायी समाधान नहीं हुआ और कथित कब्जे के खिलाफ आगे की कार्रवाई नहीं की गई।

अब दोबारा निर्माण की तैयारी की सूचना सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी भूमि पर कब्जे की स्थिति बनी रहती है और केवल निर्माण कार्य रुकवाकर मामला छोड़ दिया जाता है, तो इससे सरकारी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

अधबने मकान पर फिर निर्माण की तैयारी का आरोप

ग्रामीणों के मुताबिक, जिस अधबने मकान का निर्माण पहले रोका गया था, वहां अब फिर से निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि मकान पर लिंटर डालने की तैयारी की जा रही है। निर्माण सामग्री और लिंटर से जुड़ी तैयारियों का वीडियो भी ग्रामीणों द्वारा बनाया गया है, जिसे सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने का दावा किया जा रहा है।

वीडियो सामने आने के बाद सरकारी खलिहान की भूमि पर कथित कब्जे का मामला एक बार फिर स्थानीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन वायरल वीडियो और मौके की स्थिति का संज्ञान लेते हुए जांच कराए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर के स्तर पर नहीं की गई है। इसलिए प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौके पर वास्तव में सरकारी भूमि पर निर्माण किया जा रहा है या नहीं।

शिकायत के बाद निर्माण रुकवाने का दावा

ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी उन्होंने संबंधित अधिकारियों से सरकारी खलिहान की भूमि पर निर्माण की शिकायत की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक स्तर से मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवाने की कार्रवाई की गई थी।

इसके बावजूद अब दोबारा निर्माण की तैयारी की बात सामने आने से ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी भूमि पर सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार खलिहान दर्ज है, तो वहां किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण नहीं होना चाहिए। वहीं, यदि भूमि की स्थिति को लेकर कोई विवाद है तो राजस्व अभिलेखों और मौके की पैमाइश के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में समय रहते कार्रवाई होने से विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता है। इसलिए प्रशासन को मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

सिर्फ निर्माण रोकना पर्याप्त नहीं, कब्जा हटाने की मांग

ग्रामीणों के अनुसार, सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे के मामलों में केवल निर्माण कार्य रुकवाना स्थायी समाधान नहीं है। उनका कहना है कि यदि जांच में सरकारी खलिहान की भूमि पर अवैध कब्जा प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार कब्जा हटाने की कार्रवाई भी होनी चाहिए।

इसके साथ ही, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की जा रही है। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि किसी सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिश को शुरुआत में ही प्रभावी तरीके से रोका जाए, तो भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा पैदा होने की संभावना कम होगी।

वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी भूमि का संरक्षण राजस्व और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है। ऐसे में मौके की जांच और अभिलेखों के सत्यापन के बाद उचित कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।

सरकारी जमीनों से कब्जे हटाने की नीति का भी सवाल

प्रदेश में सरकारी जमीनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने को लेकर प्रशासन की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की जाती रही है। सरकार की ओर से भी सरकारी संपत्तियों को कब्जामुक्त कराने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाता है।

ऐसे में नौगांवा सादात तहसील क्षेत्र के गांव बीलना में सरकारी खलिहान की भूमि पर कथित तौर पर दोबारा निर्माण की तैयारी की खबर स्थानीय प्रशासन के सामने चुनौती के रूप में देखी जा रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब पहले शिकायत के बाद निर्माण रुकवाया गया था, तो उसके बाद भूमि की स्थिति का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ।

हालांकि, इस मामले में प्रशासन की ओर से अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि राजस्व अभिलेखों में भूमि सरकारी खलिहान के रूप में दर्ज है और मौके पर अनधिकृत कब्जा पाया जाता है, तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

वायरल वीडियो के बाद फिर प्रशासन के संज्ञान में मामला

ग्रामीणों द्वारा बनाए गए बताए जा रहे वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला फिर से चर्चा में आया है। ग्रामीणों का कहना है कि वीडियो में अधबने मकान के आसपास निर्माण की तैयारी दिखाई दे रही है। उनका आरोप है कि कार्रवाई के अभाव में संबंधित लोगों ने दोबारा निर्माण का प्रयास किया है।

अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। वे चाहते हैं कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करें और यह स्पष्ट करें कि संबंधित भूमि सरकारी खलिहान की है या नहीं। इसके साथ ही राजस्व रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान भी कराया जाए।

यदि जांच में ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो प्रशासन द्वारा वास्तविक स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किए जाने से भी विवाद समाप्त हो सकता है।

ग्रामीणों ने उठाए कई सवाल

इस पूरे मामले में ग्रामीणों की ओर से कई सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि शिकायत के बाद निर्माण रुकवाया गया था, फिर दोबारा निर्माण की तैयारी कैसे शुरू हुई? यदि भूमि सरकारी है तो उसे कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई कब होगी? और यदि भूमि को लेकर कोई विवाद है तो प्रशासन उसकी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा है?

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन का उपयोग सार्वजनिक हित से जुड़ा होता है। इसलिए ऐसी भूमि की सुरक्षा और संरक्षण जरूरी है। उनका यह भी कहना है कि प्रशासन द्वारा समय रहते स्पष्ट कार्रवाई किए जाने से ग्रामीणों के बीच बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो सकती है।

फिलहाल, सोशल मीडिया पर वायरल बताए जा रहे वीडियो के बाद बीलना गांव में सरकारी खलिहान की भूमि का मामला फिर सुर्खियों में है। अब प्रशासन की जांच और मौके की वास्तविक स्थिति सामने आने का इंतजार है। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भूमि पर निर्माण नियमानुसार है या कथित तौर पर सरकारी जमीन पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है।

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