पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर पोषण जानकारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश, FSSAI के सामने बढ़ी जिम्मेदारी – जरूर पढ़ें
Digital Up News Desk
नई दिल्ली: डिब्बाबंद और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर पोषण संबंधी जानकारी को उपभोक्ताओं के लिए अधिक स्पष्ट और आसानी से समझने योग्य बनाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश ने खाद्य नियामक एफएसएसएआई (FSSAI) के सामने नियमों को लेकर विकल्प सीमित कर दिए हैं। पैकेट के सामने की तरफ पोषक तत्वों से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने का मुद्दा उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और उनके खानपान से जुड़े फैसलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आज बाजार में बड़ी संख्या में ऐसे खाद्य उत्पाद उपलब्ध हैं, जिनकी पैकेजिंग पर पोषण संबंधी जानकारी दी जाती है। हालांकि, उपभोक्ताओं के लिए उस जानकारी को खरीदारी के समय तुरंत समझ पाना हमेशा आसान नहीं होता। ऐसे में फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग यानी पैकेट के सामने पोषण संबंधी जानकारी देने की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हुई है।
खानपान और स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंता
भारत में बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के बीच अधिक वजन, मोटापा और डायबिटीज जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर चिंता बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 28.6 फीसदी लोग सामान्य से अधिक वजन या मोटापे की स्थिति में हैं।
इसके अलावा, देश की करीब 11.4 फीसदी आबादी यानी लगभग 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से प्रभावित बताए जाते हैं। दो दशक पहले यह आंकड़ा करीब सात फीसदी था। इसी तरह लगभग 15.3 फीसदी आबादी प्री-डायबिटीज की स्थिति में बताई गई है।
इन आंकड़ों के बीच विशेषज्ञों की ओर से संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और खाद्य पदार्थों की पोषण संबंधी जानकारी को समझने पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। ऐसे में पैकेट पर पोषक तत्वों की जानकारी को अधिक स्पष्ट बनाने की मांग को उपभोक्ता जागरूकता से जोड़कर देखा जा रहा है।
फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग क्यों महत्वपूर्ण है?
पैक किए गए खाद्य पदार्थों की खरीदारी करते समय उपभोक्ता अक्सर पैकेट के सामने मौजूद जानकारी के आधार पर उत्पाद का चुनाव करते हैं। वहीं, पोषण संबंधी विस्तृत जानकारी कई बार पैकेट के पीछे या छोटे अक्षरों में दी जाती है।
फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग का उद्देश्य यह है कि उत्पाद में मौजूद महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की जानकारी उपभोक्ता को पैकेट के सामने ही आसानी से मिल सके। इससे खरीदारी के समय अलग-अलग उत्पादों की तुलना करना भी आसान हो सकता है।
उदाहरण के लिए, किसी उत्पाद में चीनी, नमक या संतृप्त वसा की मात्रा अधिक है या नहीं, इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से मिलने पर उपभोक्ता अपने खानपान से जुड़े फैसले अधिक जानकारी के आधार पर ले सकता है।
हालांकि, लेबलिंग का तरीका ऐसा होना भी जरूरी है जिसे आम उपभोक्ता आसानी से समझ सके। इसी कारण फ्रंट-ऑफ-पैक पोषण जानकारी को लेकर नियामकीय व्यवस्था पर लगातार चर्चा होती रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद FSSAI की भूमिका अहम
सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद अब एफएसएसएआई के सामने खाद्य पैकेजिंग से संबंधित नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण हो गई है। नियामक संस्था को यह सुनिश्चित करना होगा कि पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर उपभोक्ताओं के लिए जरूरी पोषण संबंधी जानकारी स्पष्ट और निर्धारित नियमों के अनुरूप उपलब्ध हो।
इसके लिए नियमों में स्पष्टता, लेबलिंग की एकरूपता और कंपनियों द्वारा अनुपालन जैसे विषय महत्वपूर्ण होंगे। साथ ही, उपभोक्ताओं को भी पैकेट पर दी गई जानकारी को पढ़ने और समझने के लिए जागरूक करना आवश्यक होगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह विषय केवल खाद्य उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा संबंध उपभोक्ता अधिकार और सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ता है।
बढ़ते डायबिटीज मामलों के बीच अहम कदम
भारत में डायबिटीज के बढ़ते मामलों के बीच खाद्य पदार्थों में मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी का महत्व और बढ़ जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं, जबकि 15.3 फीसदी आबादी प्री-डायबिटीज की स्थिति में बताई गई है।
प्री-डायबिटीज की स्थिति में व्यक्ति के रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक हो सकता है, लेकिन वह डायबिटीज की निर्धारित सीमा तक नहीं पहुंचता। ऐसे में जीवनशैली और खानपान में बदलाव महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य से जुड़े निर्णय केवल पैकेट के लेबल पर निर्भर नहीं होते। चिकित्सकीय सलाह, व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति और संतुलित जीवनशैली भी महत्वपूर्ण हैं। फिर भी, खाद्य पदार्थों की पोषण संबंधी जानकारी उपभोक्ता को अधिक जागरूक विकल्प चुनने में मदद कर सकती है।
उपभोक्ताओं को मिलेगी जानकारी समझने में आसानी
पैकेट के सामने पोषण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने का एक प्रमुख उद्देश्य उपभोक्ता को खरीदारी के समय त्वरित जानकारी देना है। यदि लेबल स्पष्ट और आसानी से पढ़े जा सकें, तो ग्राहक विभिन्न उत्पादों के बीच तुलना कर सकता है।
इसके अलावा, यह व्यवस्था खाद्य कंपनियों को भी अपने उत्पादों की पोषण संरचना को लेकर अधिक पारदर्शी रहने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।
हालांकि, यह भी जरूरी है कि लेबल पर इस्तेमाल होने वाली भाषा और प्रतीक आम लोगों के लिए समझने योग्य हों। अत्यधिक तकनीकी शब्दावली या जटिल प्रस्तुति उपभोक्ता के लिए जानकारी को कठिन बना सकती है। इसलिए सरलता और स्पष्टता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
खाद्य कंपनियों के सामने अनुपालन की चुनौती
नए नियामकीय बदलावों का असर खाद्य उत्पाद बनाने और बेचने वाली कंपनियों पर भी पड़ेगा। कंपनियों को अपने पैकेजिंग डिजाइन, लेबल और उत्पाद संबंधी जानकारी में आवश्यक बदलाव करने पड़ सकते हैं।
इसके लिए कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पैकेट पर दी जाने वाली पोषण संबंधी जानकारी निर्धारित मानकों के अनुरूप हो। साथ ही, नए नियमों के लागू होने के बाद उनकी निगरानी और अनुपालन भी महत्वपूर्ण होगा।
दूसरी ओर, उद्योग जगत के लिए यह जरूरी होगा कि वह उपभोक्ता हित और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के साथ तालमेल बनाकर चले। इससे बाजार में उपलब्ध उत्पादों के बारे में उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत हो सकता है।
जागरूकता भी उतनी ही जरूरी
केवल पैकेट पर जानकारी उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है। उपभोक्ताओं को यह समझना भी जरूरी है कि लेबल पर दी गई जानकारी का अर्थ क्या है और उसे अपने खानपान के संदर्भ में कैसे देखा जाए।
इसलिए आगे चलकर खाद्य लेबलिंग के साथ उपभोक्ता जागरूकता अभियान भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों के माध्यम से लोगों को संतुलित आहार और पोषण संबंधी जानकारी पढ़ने के बारे में जागरूक किया जा सकता है।
इसके साथ ही, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पोषण विशेषज्ञों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। वे लोगों को यह समझाने में मदद कर सकते हैं कि पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का सेवन संतुलित आहार का केवल एक हिस्सा होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आगे की राह
कुल मिलाकर, पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर सामने की तरफ पोषण संबंधी जानकारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश उपभोक्ता जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके बाद एफएसएसएआई के सामने स्पष्ट और प्रभावी नियमों को लागू करने की जिम्मेदारी होगी।
देश में अधिक वजन, मोटापा, डायबिटीज और प्री-डायबिटीज के बढ़ते आंकड़ों के बीच खाद्य पदार्थों की पोषण संबंधी जानकारी को आसानी से उपलब्ध कराना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, इसके साथ लोगों को संतुलित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना भी जरूरी रहेगा।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एफएसएसएआई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप फ्रंट-ऑफ-पैक पोषण लेबलिंग को किस तरह लागू करता है और खाद्य कंपनियां इन नियमों का कितना प्रभावी ढंग से पालन करती हैं। यदि जानकारी स्पष्ट, सरल और तुलनात्मक रूप में उपलब्ध होती है, तो उपभोक्ता अपने भोजन संबंधी विकल्प अधिक जागरूकता के साथ चुन सकेंगे।

