मथुरा में कांग्रेस का धरना, सामाजिक भेदभाव के खिलाफ उठाई आवाज – पढ़ने के लिए करें एक क्लिक

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज 

मथुरा: महानगर कांग्रेस कमेटी की ओर से शुक्रवार को विकास बाजार स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थल पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के खिलाफ अपनी बात रखी। इस दौरान वक्ताओं ने संविधान में निहित समानता और सामाजिक समरसता के मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता मथुरा-वृंदावन महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पं. यतेंद्र मुकद्दम ने की। कार्यक्रम में पूर्व सीएलपी लीडर एवं विधायक प्रदीप माथुर प्रमुख रूप से मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने अपने संबोधन में सामाजिक समानता, नागरिक अधिकारों और संविधान की मूल भावना से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

हल्द्वानी की घटना का किया उल्लेख

धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ से जुड़ी घटना का उल्लेख किया। कांग्रेस नेताओं ने इसे सामाजिक भेदभाव और असमानता की मानसिकता से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की।

महानगर कांग्रेस अध्यक्ष पं. यतेंद्र मुकद्दम ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की जाति या सामाजिक पहचान के आधार पर उसके साथ भेदभाव किया जाता है तो यह संविधान की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि छुआछूत को संविधान के तहत प्रतिबंधित किया गया है। ऐसे में समाज में किसी भी प्रकार के भेदभाव को बढ़ावा देने वाली सोच का विरोध किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कांग्रेस की ओर से सामाजिक समानता और संविधान के मूल्यों के पक्ष में आवाज उठाने की बात कही।

सामाजिक समानता को लेकर कांग्रेस का रुख

पं. यतेंद्र मुकद्दम ने कहा कि कांग्रेस सामाजिक भेदभाव और असमानता के खिलाफ लगातार आवाज उठाती रही है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को समान सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समाज में जन्म के आधार पर किसी व्यक्ति की स्थिति निर्धारित करने वाली सोच को समाप्त करने के लिए सामाजिक जागरूकता जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने संविधान की मूल भावना को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था समानता और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है। इसलिए किसी भी तरह के भेदभाव की शिकायत सामने आने पर उसका निष्पक्ष तरीके से परीक्षण होना चाहिए और संबंधित पक्ष को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।

प्रदीप माथुर ने भी रखी बात

धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पूर्व सीएलपी लीडर एवं विधायक प्रदीप माथुर ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार और सम्मान देता है। उन्होंने कहा कि छुआछूत और जातिगत भेदभाव के लिए लोकतांत्रिक भारत में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

उन्होंने हल्द्वानी से जुड़ी घटना का उल्लेख करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि सामाजिक सम्मान तथा समानता के मुद्दे पर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

प्रदीप माथुर ने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की आधारशिला है। इसलिए संविधान में दिए गए समानता और सम्मान के सिद्धांतों को व्यवहार में भी मजबूत किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। साथ ही, उन्होंने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी वर्गों के बीच संवाद और सहयोग को जरूरी बताया।

राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

धरना-प्रदर्शन समाप्त होने के बाद कांग्रेस महानगर अध्यक्ष पं. यतेंद्र मुकद्दम ने महामहिम राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस की ओर से सामाजिक समानता, नागरिक सम्मान और संविधान की भावना से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की मांग रखी गई।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सामाजिक भेदभाव से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।

ज्ञापन सौंपने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने संविधान और सामाजिक समानता से जुड़े नारों के माध्यम से अपनी मांगों को सामने रखा। कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

बड़ी संख्या में कांग्रेसजन रहे मौजूद

कार्यक्रम में कांग्रेस के कई पदाधिकारी, पार्षद और कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें मुकीम कुरैशी, ठाकुर वीरेंद्र सिंह सिसोदिया, राहुल चतुर्वेदी, पार्षद दल नेता धनंजय चौधरी, प्रवीण ठाकुर, दीपक पाराशर, पिंटू पुजारी, बनवारी सिसोदिया और देवेंद्र चतुर्वेदी लल्लू समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

इसके अलावा सिम्मी बेगम, राखी चौहान, दुर्गेश बघेल, राहुल, सलमान, राहुल मुकद्दम, तपिल सारस्वत, आशीष अरोड़ा, भावर प्रताप सिंह, विक्रम सिंह, नरेंद्र पहलवान, अनमोल चतुर्वेदी और बाबा प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए।

संविधान के मूल्यों पर जोर

कार्यक्रम में वक्ताओं ने बार-बार संविधान में निहित समानता, न्याय और सामाजिक सम्मान के मूल्यों का उल्लेख किया। नेताओं का कहना था कि समाज में किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, समुदाय या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता केवल राजनीतिक विषय नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक वर्ग की साझा जिम्मेदारी है। इसलिए नागरिकों के बीच संवाद बढ़ाने और संविधान के प्रति जागरूकता मजबूत करने की आवश्यकता है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सामाजिक असमानता से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन नागरिक सम्मान और संवैधानिक अधिकारों के मामले में सभी पक्षों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

राजनीतिक आरोपों के बीच सामाजिक मुद्दों पर जोर

मथुरा में आयोजित इस धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी और आरएसएस पर सामाजिक भेदभाव को लेकर आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित संगठनों की प्रतिक्रिया इस कार्यक्रम में उपलब्ध नहीं रही। कांग्रेस नेताओं ने अपने वक्तव्यों में हल्द्वानी की घटना को आधार बनाकर सामाजिक समानता और संविधान की रक्षा का मुद्दा उठाया।

कार्यक्रम के माध्यम से कांग्रेस ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आवाज उठाई जानी चाहिए। साथ ही, नेताओं ने नागरिकों के बीच समानता और आपसी सम्मान को मजबूत करने पर जोर दिया।

सामाजिक समरसता को मजबूत करने की अपील

धरना-प्रदर्शन के अंत में कांग्रेस नेताओं ने सामाजिक समरसता बनाए रखने और संविधान के मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की। उनका कहना था कि भारत की विविधता उसकी महत्वपूर्ण विशेषता है और सभी समुदायों एवं वर्गों के बीच सम्मान और सहयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करता है।

इस तरह मथुरा में आयोजित कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन में सामाजिक समानता, छुआछूत, नागरिक सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। कार्यक्रम के बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर कांग्रेस ने अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा।

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