अमरोहा में महिला की संदिग्ध मौत, मायके पक्ष ने कब्र से शव निकालकर पोस्टमार्टम की रखी मांग

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रिपोर्ट – इकबाल अंसारी 

अमरोहा: डिडौली थाना क्षेत्र के चौधरपुर गांव में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला सामने आया है। मृतका के मायके पक्ष ने मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी अमरोहा से निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों ने आशंका जताई है कि महिला की मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए कब्र खुदवाकर शव को बाहर निकालने के बाद विधिवत पोस्टमार्टम कराया जाना चाहिए।

मायके पक्ष की ओर से जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में महिला के वैवाहिक जीवन और कथित उत्पीड़न से संबंधित कई आरोप लगाए गए हैं। परिजनों का कहना है कि यदि शव का पोस्टमार्टम कराया जाता है तो महिला की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अभी तक हत्या के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस व प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

2006 में हुई थी महिला की शादी

प्रार्थना पत्र के अनुसार, मृतका वकीला खातून की शादी 18 जून 2006 को चौधरपुर गांव निवासी मोहम्मद शफी पुत्र हाजी कल्लू के साथ हुई थी। मायके पक्ष का आरोप है कि शादी के बाद से ही वकीला को पति और ससुराल पक्ष के लोगों की ओर से कथित रूप से मानसिक उत्पीड़न और मारपीट का सामना करना पड़ा।

परिजनों के मुताबिक, वकीला ने कई बार अपने मायके वालों को ससुराल में होने वाली कथित परेशानियों के बारे में जानकारी दी थी। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी बहन की स्थिति को लेकर समय-समय पर चिंता भी जताई थी।

हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के स्तर पर होना बाकी है। पुलिस द्वारा दोनों पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जा सकती है।

दूसरी शादी के बाद बढ़ी परेशानी का आरोप

मायके पक्ष ने अपने प्रार्थना पत्र में दावा किया है कि करीब दो वर्ष पहले मोहम्मद शफी ने खुशनुमा नाम की महिला से दूसरी शादी की थी। इसके बाद वकीला खातून की परेशानियां कथित तौर पर और बढ़ गईं।

परिजनों का आरोप है कि दूसरी शादी के बाद वकीला के साथ व्यवहार में कथित रूप से बदलाव आया और उसे पहले की तुलना में अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार का कहना है कि इसी वजह से उन्हें महिला की सुरक्षा और स्थिति को लेकर चिंता बनी रहती थी।

हालांकि, दूसरी शादी और उसके बाद हुए कथित घटनाक्रम से जुड़े आरोपों की पुष्टि भी जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन के सामने रखी गई शिकायत में मायके पक्ष ने इन परिस्थितियों को महिला की मौत से जोड़कर देखने की मांग की है।

10 अगस्त को हुई महिला की मौत

परिजनों के अनुसार, वकीला खातून की मौत 10 अगस्त 2026 को हुई। मौत की सूचना मिलने के बाद मायके पक्ष ने घटना की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए।

परिजनों का कहना है कि उन्हें महिला की मौत सामान्य परिस्थितियों में होने की बात स्वीकार नहीं है। उन्होंने आशंका जताई है कि महिला के साथ कोई ऐसी घटना हुई हो सकती है, जिसके कारण उसकी मौत हुई।

इसी आशंका के आधार पर मायके पक्ष ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मौत का वास्तविक कारण सामने लाने के लिए शव को कब्र से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम कराया जाना आवश्यक है।

कब्र से शव निकालकर पोस्टमार्टम की मांग

मायके पक्ष की सबसे प्रमुख मांग शव को कब्र से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम कराने की है। परिवार का कहना है कि महिला के शव को मौत के बाद दफना दिया गया और पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। ऐसे में मौत के कारण से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट नहीं हो सके।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि प्रशासन अनुमति देता है तो शव को नियमानुसार कब्र से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम कराया जा सकता है। इससे मौत के कारण और परिस्थितियों को लेकर सामने आए सवालों की जांच में मदद मिल सकती है।

परिजनों ने प्रशासन से इस मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका तर्क है कि समय बीतने के साथ जांच से जुड़े संभावित साक्ष्यों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, शव को कब्र से निकालने और पोस्टमार्टम कराने का निर्णय संबंधित प्रशासनिक व कानूनी प्रक्रिया के तहत ही लिया जाएगा।

कई लोगों पर संदेह जताया

शिकायत में मायके पक्ष ने महिला के पति मोहम्मद शफी, उसकी दूसरी पत्नी खुशनुमा, जेठ मोहम्मद रफी, जेठ की दूसरी पत्नी नाजमीन समेत कुछ अन्य लोगों पर संदेह जताया है।

परिजनों ने आरोप लगाया है कि महिला के साथ कथित रूप से लंबे समय से उत्पीड़न किया जा रहा था। इसी आधार पर उन्होंने मौत की परिस्थितियों की विस्तृत जांच की मांग की है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि शिकायत में लगाए गए आरोप फिलहाल आरोप ही हैं। किसी व्यक्ति की भूमिका या अपराध में संलिप्तता जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निर्धारित की जा सकती है। पुलिस की ओर से अभी किसी आरोपी को दोषी घोषित किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।

परिजनों ने लगाया दबंगई का आरोप

मायके पक्ष ने शिकायत में आरोपित पक्ष पर दबंगई का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मामले में तत्काल कार्रवाई की जरूरत है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

परिवार ने प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की मांग करते हुए कहा है कि मामले को गंभीरता से लिया जाए। साथ ही, उन्होंने महिला की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासन की ओर से शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

प्रशासन और पुलिस की जांच महत्वपूर्ण

इस पूरे मामले में अब प्रशासन और पुलिस की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। महिला की मौत की वास्तविक वजह जानने के लिए घटनाक्रम, परिजनों के बयान, संबंधित लोगों से पूछताछ और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।

यदि प्रशासन की अनुमति से शव को कब्र से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम कराया जाता है तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। रिपोर्ट के आधार पर मौत के कारण को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।

इसके अलावा, पुलिस महिला के वैवाहिक जीवन और उसके मायके पक्ष द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों की भी जांच कर सकती है। इस दौरान दोनों पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

निष्पक्ष जांच की मांग

मृतका के मायके पक्ष ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि उनकी प्राथमिकता महिला की मौत की वास्तविक वजह सामने लाना है।

परिजनों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। साथ ही, यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता या अपराध सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

फिलहाल, इस मामले में प्रशासन की ओर से विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आना बाकी है। इसलिए महिला की मौत को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आ सकती है स्थिति

यदि शव का पोस्टमार्टम कराया जाता है तो उसकी रिपोर्ट जांच के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। पोस्टमार्टम से मौत के चिकित्सकीय कारणों को समझने में सहायता मिल सकती है और जांच एजेंसियों को आगे की कार्रवाई के लिए आवश्यक जानकारी मिल सकती है।

इसके साथ ही, पुलिस द्वारा घटनास्थल और महिला की मौत से पहले की परिस्थितियों की जानकारी जुटाना भी जरूरी होगा। परिजनों के आरोपों की पुष्टि या खंडन भी जांच के दौरान उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया जाएगा।

कुल मिलाकर, अमरोहा के डिडौली थाना क्षेत्र के चौधरपुर गांव में वकीला खातून की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर मायके पक्ष ने गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार ने जिलाधिकारी से कब्र खुदवाकर शव को बाहर निकलवाने और पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। साथ ही, पति समेत ससुराल पक्ष के कुछ लोगों पर संदेह जताते हुए निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। फिलहाल ये आरोप जांच के अधीन हैं। अब प्रशासन और पुलिस की जांच तथा संभावित पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही महिला की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

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