लखनऊ के सर्वोदय विद्यालय में शिक्षक कमी और अव्यवस्थाओं पर छात्रों का प्रदर्शन, मंत्री ने दिया समाधान का आश्वासन

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Digital UP News Desk

लखनऊ: पारा थाना क्षेत्र के मोहान रोड स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के छात्रों ने शुक्रवार सुबह विद्यालय में शिक्षकों की कमी और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र बुद्धेश्वर पेट्रोल पंप के सामने सड़क पर बैठ गए, जिससे बुद्धेश्वर से मोहान रोड जाने वाले मार्ग पर यातायात प्रभावित हो गया। छात्रों ने विद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की तैनाती और विद्यालय की अन्य व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की।

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पारा पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। काफी संख्या में छात्रों के सड़क पर बैठने के कारण मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। पुलिस ने छात्रों को सड़क से हटाकर यातायात व्यवस्था सामान्य कराने की कोशिश की। इसी बीच मामले की जानकारी मिलने पर समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण और प्रमुख सचिव अनुराग यादव भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान का आश्वासन दिया।

450 छात्रों पर सिर्फ सात शिक्षक होने का आरोप

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का मुख्य मुद्दा विद्यालय में शिक्षकों की कमी रहा। छात्रों के अनुसार, विद्यालय में करीब 450 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए वर्तमान में केवल सात शिक्षक उपलब्ध हैं। छात्रों का कहना है कि विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की संख्या बेहद कम होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

छात्रों ने बताया कि कई विषयों की नियमित कक्षाएं संचालित करने में परेशानी आती है। शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को पढ़ाई में पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। परीक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों को लेकर भी छात्रों के सामने दिक्कतें खड़ी हो रही हैं। इसलिए छात्रों ने विद्यालय में जल्द से जल्द पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती की मांग की।

छात्रों का कहना था कि शिक्षकों की कमी का असर सीधे उनकी शिक्षा पर पड़ रहा है। ऐसे में विद्यालय प्रशासन और संबंधित विभाग को इस समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके।

भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायत

छात्रों ने केवल शिक्षकों की कमी ही नहीं, बल्कि विद्यालय में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का आरोप है कि विद्यालय में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता कई बार संतोषजनक नहीं रहती। छात्रों ने दावा किया कि भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत भी सामने आई है।

विद्यार्थियों का कहना है कि इस तरह की शिकायतें सामने आने के बावजूद उनकी समस्याओं पर अपेक्षित स्तर पर सुनवाई नहीं हुई। छात्रों ने मांग की कि विद्यालय में उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की नियमित जांच हो और उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।

छात्रों का कहना है कि आवासीय विद्यालय में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए भोजन व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए भोजन की गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस मामले की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की।

स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विद्यालय में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी अपनी शिकायतें अधिकारियों के सामने रखीं। विद्यार्थियों ने विद्यालय के फार्मासिस्ट पर लापरवाही का आरोप लगाया। छात्रों का कहना है कि जब किसी विद्यार्थी की तबीयत खराब होती है तो पर्याप्त उपचार उपलब्ध कराने के बजाय कई बार केवल दवा देकर मामला समाप्त कर दिया जाता है।

छात्रों के मुताबिक, बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की स्थिति में उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा और आवश्यक उपचार मिलना चाहिए। उन्होंने विद्यालय में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने और जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।

हालांकि, छात्रों की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों की शिकायतों को सुना और उन्हें संबंधित समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया।

सड़क पर प्रदर्शन से यातायात प्रभावित

विद्यालय की समस्याओं को लेकर छात्र शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे सड़क पर उतर आए। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने बुद्धेश्वर से मोहान रोड जाने वाले मार्ग पर बैठकर प्रदर्शन किया। इससे सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था बाधित रही।

सूचना मिलने के बाद पारा पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने छात्रों से बातचीत करते हुए उन्हें सड़क से हटने के लिए समझाया। साथ ही यातायात को सामान्य कराने के प्रयास शुरू किए गए। प्रशासन की ओर से भी छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया।

स्थिति को देखते हुए समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण और प्रमुख सचिव अनुराग यादव मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत की। अधिकारियों ने पहले छात्रों को शांत कराया और इसके बाद उन्हें विद्यालय परिसर में ले जाकर उनकी समस्याएं विस्तार से सुनीं।

मंत्री ने समस्याओं के जल्द समाधान का दिया भरोसा

छात्रों से बातचीत के बाद समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंत्री के अनुसार, शिक्षकों से संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में प्रभावी पैरवी करेगी और एक सप्ताह के भीतर न्यायालय में मामले के निस्तारण के लिए प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालय से जुड़ी अन्य समस्याओं को भी जल्द दूर कराने का आश्वासन दिया गया।

मंत्री के आश्वासन के बाद छात्रों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और सड़क से हट गए। इसके बाद यातायात व्यवस्था धीरे-धीरे सामान्य हुई। अधिकारियों ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायतों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षकों की कमी का स्थायी समाधान जरूरी

जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय में छात्रों के प्रदर्शन ने एक बार फिर आवासीय विद्यालयों में शैक्षणिक और बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं। करीब 450 विद्यार्थियों वाले विद्यालय में शिक्षकों की संख्या कम होने का दावा सामने आने के बाद अब इस मामले में विभागीय स्तर पर ठोस कदम उठाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप शिक्षकों की उपलब्धता जरूरी है। इसके अलावा भोजन, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं की नियमित निगरानी भी आवश्यक है। खासकर आवासीय विद्यालयों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के साथ-साथ भोजन, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं भी प्राथमिकता में होनी चाहिए।

फिलहाल मंत्री के आश्वासन के बाद छात्रों का प्रदर्शन समाप्त हो गया है। अब विद्यार्थियों की नजर प्रशासन की ओर से किए जाने वाले अगले कदम पर है। यदि शिक्षकों की कमी और अन्य समस्याओं का समयबद्ध समाधान होता है तो इससे विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार आने की उम्मीद है। वहीं, छात्रों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना भी आवश्यक होगा।

प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती छात्रों की मांगों को केवल आश्वासन तक सीमित न रखते हुए उनका प्रभावी और स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। छात्रों ने भी स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता बेहतर शिक्षा और विद्यालय में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता है। ऐसे में आने वाले दिनों में विभाग की कार्रवाई यह तय करेगी कि विद्यालय की व्यवस्थाओं में कितना सुधार हो पाता है।

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