विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर बोले सीएम योगी, कहा- भारत आज भी विभाजन की कीमत चुका रहा

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Digital Up News Desk

लखनऊ: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 1947 में हुए भारत विभाजन को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विभाजन केवल देश के भू-भाग का बंटवारा नहीं था, बल्कि उस दौर में करोड़ों लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन के समय बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा, लेकिन उनकी पीड़ा को सुनने और समझने वाला कोई नहीं था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन काल से भारत एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इकाई के रूप में जुड़ा रहा है। इसके बावजूद राजनीतिक परिस्थितियों और तत्कालीन निर्णयों के कारण देश का विभाजन हुआ। उन्होंने कहा कि भारत को विभाजन की ओर धकेलने में उस समय के आपसी अंतर्विरोध और जातीय भेदभाव जैसे कारणों का भी फायदा उठाया गया।

विभाजन की पीड़ा को याद करने का अवसर

सीएम योगी ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को याद करने का उद्देश्य किसी के प्रति वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेना है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को यह जानकारी होनी चाहिए कि देश के विभाजन के दौरान समाज के सामने किस प्रकार की परिस्थितियां पैदा हुई थीं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, विभाजन के दौरान अनेक परिवारों को अपना घर, संपत्ति और परिचित सामाजिक परिवेश छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस समय जिन लोगों ने विस्थापन का दर्द झेला, उनकी पीड़ा को समझना और उनके अनुभवों को इतिहास में उचित स्थान देना आवश्यक है।

उन्होंने सवाल उठाया कि विभाजन के लिए जिम्मेदार लोगों में से कितने लोगों को सजा दी गई। साथ ही उन्होंने कहा कि कई ऐसे क्षेत्र भी पाकिस्तान में चले गए, जहां हिंदू आबादी महत्वपूर्ण संख्या में मौजूद थी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय के राजनीतिक नेतृत्व ने देशहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर सही निर्णय नहीं लिए।

कांग्रेस पर लगाया विश्वासघात का आरोप

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि पार्टी ने देश के साथ विश्वासघात किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में आम लोगों की भावनाओं और उनकी सुरक्षा से जुड़े विषयों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

सीएम योगी ने कहा कि जिन लोगों को देश के विभाजन और उससे उत्पन्न परिस्थितियों की गंभीरता को समझना चाहिए था, वे उस समय भी मौन रहे और आज भी उन विषयों पर बात करने से बचते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास को समझने के लिए उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों का निष्पक्ष अध्ययन जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से जिन क्षेत्रों की मांग नहीं की गई थी, वे भी विभाजन की प्रक्रिया में दे दिए गए। उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम ने भारत की सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था पर लंबे समय तक प्रभाव डाला।

आपसी अंतर्विरोध और जातीय भेदभाव का उल्लेख

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत की कमजोरी का एक कारण समाज में मौजूद आपसी अंतर्विरोध और जातीय भेदभाव भी रहा। उन्होंने कहा कि विदेशी शक्तियों और षड्यंत्रकारियों ने इन कमजोरियों का फायदा उठाया। इसलिए समाज को आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में एकजुट रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता और सांस्कृतिक एकता में रही है। इसलिए सामाजिक समरसता को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

विभाजन की कीमत आज भी चुकाने का दावा

सीएम योगी ने कहा कि भारत आज भी विभाजन के प्रभावों की कीमत चुका रहा है। उन्होंने आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को लंबे समय से विभिन्न प्रकार की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन से जुड़े इतिहास को केवल अतीत की घटना मानकर भूलना उचित नहीं होगा। इसके बजाय, उससे मिलने वाली सीख को वर्तमान और भविष्य के लिए उपयोगी बनाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्र की एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया।

संस्थाओं के नामकरण पर भी उठाए सवाल

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश की विभिन्न संस्थाओं और योजनाओं के नामकरण को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की अनेक संस्थाओं के नाम एक ही परिवार से जोड़ दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का निर्माण किसी एक परिवार ने नहीं, बल्कि करोड़ों देशवासियों, स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनिर्माताओं के योगदान से हुआ है।

उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में अनेक महान व्यक्तित्वों का योगदान रहा है। इसलिए इतिहास को व्यापक दृष्टिकोण से देखने और सभी प्रमुख योगदानकर्ताओं को उचित सम्मान देने की आवश्यकता है।

सपा सरकार को लेकर भी साधा निशाना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि उस समय उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार होती तो क्या प्रदेश दंगों की परिस्थितियों से उबर पाता? उन्होंने अपनी सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को लेकर किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में शांति और सुरक्षा का वातावरण बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी CAA के विरोध को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार और भाजपा की ओर से उस समय पूछा जाता था कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों पर जनता के बीच तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

इतिहास से सीख लेने पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य समाज में कटुता पैदा करना नहीं, बल्कि इतिहास के कठिन अध्यायों को याद करना है। उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए अतीत की घटनाओं से सीख लेना आवश्यक है।

उन्होंने लोगों से सामाजिक भेदभाव और आपसी अंतर्विरोध से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में काम करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की एकता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के संबोधन का केंद्र विभाजन की ऐतिहासिक परिस्थितियां, विस्थापित लोगों की पीड़ा, सामाजिक एकता और राष्ट्र की अखंडता रहा। उन्होंने कहा कि इतिहास को याद करने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि उससे सीख लेकर वर्तमान को मजबूत बनाया जाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त, एकजुट तथा समरस भारत का निर्माण किया जाए।

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