भारत के IT निर्यात को मिली रफ्तार, STPI इकाइयों का निर्यात 2025-26 में 7.73 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और IT-enabled Services (ITES) क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में सरकार की पहल का असर अब निर्यात के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (STPI) के तहत पंजीकृत इकाइयों का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर करीब 7.74 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2024-25 के करीब 6.88 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में यह जानकारी दी। सरकार के अनुसार, STPI योजना भारत से सॉफ्टवेयर और IT/ITES सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण 100 प्रतिशत निर्यात-उन्मुख योजना है।
STPI योजना का क्या है उद्देश्य?
सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (STP) योजना का मुख्य उद्देश्य भारत से सॉफ्टवेयर और IT/ITES सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देना है। इसके तहत STPI कंपनियों को आवश्यक वैधानिक सेवाएं और एकल-खिड़की मंजूरी व्यवस्था उपलब्ध कराता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य कंपनियों के लिए कारोबार को आसान बनाना, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल करना और निर्यातकों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके अलावा, डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से अनुपालन व्यवस्था को भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है।
तीन वर्षों में बढ़ा STPI इकाइयों का निर्यात
सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में STPI इकाइयों के निर्यात में लगातार वृद्धि हुई है।
वित्त वर्ष 2023-24 में STPI इकाइयों का कुल निर्यात 6,36,619.87 करोड़ रुपये रहा। इसके बाद वित्त वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 6,88,194.11 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित निर्यात 7,73,898.97 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
इससे स्पष्ट है कि STPI से जुड़ी IT और ITES इकाइयों की निर्यात गतिविधियों में लगातार विस्तार हुआ है। खास बात यह है कि यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब वैश्विक स्तर पर तकनीकी सेवाओं और डिजिटल कारोबार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
STPI इकाइयों की संख्या भी बढ़ी
निर्यात के साथ-साथ STPI योजना के तहत पंजीकृत इकाइयों की संख्या में भी बदलाव देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2023-24 में कुल 2,059 STPI इकाइयां थीं। वित्त वर्ष 2024-25 में इनकी संख्या 2,042 रही, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 2,125 इकाइयां हो गई।
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, STPI इकाइयों द्वारा घोषित कुल निवेश वित्त वर्ष 2023-24 में 10,709.92 करोड़ रुपये था। वर्ष 2024-25 में यह 8,870.78 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित 7,362.86 करोड़ रुपये रहा।
वहीं, STPI इकाइयों का कुल आयात वित्त वर्ष 2023-24 में 9,947.47 करोड़ रुपये, 2024-25 में 9,482.27 करोड़ रुपये और 2025-26 में अनुमानित 9,960.26 करोड़ रुपये रहा।
कर्नाटक IT निर्यात में सबसे आगे
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कर्नाटक STPI इकाइयों के निर्यात के मामले में सबसे आगे रहा। वित्त वर्ष 2025-26 में कर्नाटक की STPI इकाइयों का अनुमानित निर्यात करीब 3,50,184.78 करोड़ रुपये रहा।
इसके बाद महाराष्ट्र का स्थान रहा, जहां STPI इकाइयों का निर्यात करीब 1,62,594.11 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। तेलंगाना में यह आंकड़ा करीब 1,13,101.83 करोड़ रुपये, तमिलनाडु में 60,591.28 करोड़ रुपये और उत्तर प्रदेश में करीब 28,442.69 करोड़ रुपये रहा।
हरियाणा की STPI इकाइयों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य का अनुमानित IT निर्यात करीब 26,885.28 करोड़ रुपये रहा।
इससे पता चलता है कि भारत के प्रमुख तकनीकी और औद्योगिक राज्यों के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी IT निर्यात का आधार विकसित हो रहा है।
उत्तर प्रदेश की STPI इकाइयों का भी बढ़ा योगदान
उत्तर प्रदेश के आंकड़े भी खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं। राज्य में STPI इकाइयों की संख्या वित्त वर्ष 2023-24 में 104 थी। वर्ष 2024-25 में यह संख्या घटकर 99 हुई, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 107 हो गई।
राज्य की STPI इकाइयों का निर्यात 2023-24 में करीब 25,823.88 करोड़ रुपये रहा। इसके बाद 2024-25 में यह बढ़कर 28,901.73 करोड़ रुपये हुआ। वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित निर्यात करीब 28,442.69 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
वहीं, उत्तर प्रदेश की इकाइयों का आयात 2023-24 में 148.87 करोड़ रुपये और 2024-25 में 218.82 करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2025-26 में यह अनुमानित रूप से 159.84 करोड़ रुपये रहा।
STPI ने आसान की निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाएं
सरकार ने STPI इकाइयों के लिए कारोबार को आसान बनाने के उद्देश्य से कई प्रक्रियाओं को डिजिटल और सरल किया है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण कदमों में वैधानिक सेवाओं का स्वचालन शामिल है।
IT निर्यातकों के लिए SOFTEX दाखिल करने, उसकी स्वीकृति और अंतिम सूचना देने जैसी प्रक्रियाओं को स्वचालित किया गया है। इससे दस्तावेजी प्रक्रिया को आसान बनाने और सेवाओं की डिलीवरी में तेजी लाने में मदद मिली है।
इसके अलावा, STPI की ऑनलाइन प्रणाली को भारतीय रिजर्व बैंक के Export Data Processing and Monitoring System (EDPMS) के साथ जोड़ा गया है।
RBI के EDPMS से एकीकरण का फायदा
STPI और RBI के EDPMS के एकीकरण से IT निर्यात से संबंधित डेटा का इलेक्ट्रॉनिक तरीके से लगभग वास्तविक समय में आदान-प्रदान संभव हुआ है।
इससे निर्यात घोषणा से जुड़े आंकड़ों को तेजी से साझा करने के साथ-साथ डेटा की सटीकता और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिली है। साथ ही, मैन्युअल हस्तक्षेप कम हुआ है और निर्यात लेनदेन की निगरानी बेहतर हुई है।
इस व्यवस्था से IT और ITES निर्यातकों के लिए नियामकीय अनुपालन भी अधिक सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है। डिजिटल प्रक्रियाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह कदम कारोबार करने में आसानी को बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है।
आयात प्रक्रिया में भी किया गया बदलाव
STPI ने आयात प्रक्रियाओं को भी सरल किया है। पहले अलग-अलग मामलों के लिए आयात अनुमति लेने की व्यवस्था थी। अब संबंधित वित्तीय वर्ष के लिए एकमुश्त आयात अनुमति देने की व्यवस्था की गई है।
इस बदलाव से कंपनियों को बार-बार अनुमति की प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम हुई है। परिणामस्वरूप, समय की बचत और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सरलता आने की संभावना है।
इसी तरह STPI-पंजीकृत इकाइयों के लिए घरेलू टैरिफ क्षेत्र यानी DTA बिक्री के मामले में भी प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। पहले जहां अनुमति की आवश्यकता होती थी, अब संचालन के पहले वर्ष में अग्रिम DTA बिक्री को छोड़कर स्व-घोषणा प्रस्तुत करने की व्यवस्था लागू की गई है।
नागरिक चार्टर के तहत तय समयसीमा में सेवाएं
STPI के अनुसार, वह अपने नागरिक चार्टर में निर्धारित समयसीमा के अनुसार STP योजना के तहत सेवाओं के अनुमोदन और वितरण का प्रयास करता है। नागरिक चार्टर में सेवाओं से संबंधित निर्धारित समयसीमा और प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
IT निर्यातकों को जरूरी सेवाओं के लिए अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े। डिजिटल व्यवस्था और एकल-खिड़की प्रणाली के माध्यम से सरकार कारोबारी प्रक्रियाओं को अधिक सरल बनाने पर जोर दे रही है।
भारत के डिजिटल निर्यात को मिल सकता है और बल
भारत पहले से ही दुनिया के प्रमुख IT सेवा निर्यातकों में शामिल है। ऐसे में STPI जैसी योजनाएं छोटे और मध्यम स्तर के IT उद्यमों के लिए भी वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने में मददगार साबित हो सकती हैं।
STPI इकाइयों के निर्यात में लगातार वृद्धि यह संकेत देती है कि भारत की डिजिटल सेवाओं की वैश्विक मांग बनी हुई है। इसके अलावा, डिजिटल प्रक्रियाओं, ऑनलाइन अनुपालन और एकल-खिड़की मंजूरी जैसे सुधारों से कंपनियों के लिए कारोबारी वातावरण को और बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।
आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और अन्य डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग भारत के IT निर्यात को नई दिशा दे सकती है।
STPI इकाइयों का 2025-26 में करीब 7.74 लाख करोड़ रुपये का अनुमानित निर्यात भारत के IT क्षेत्र की मजबूत वैश्विक स्थिति को दर्शाता है। सरकार द्वारा प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और कारोबारी नियमों को सरल बनाने की कोशिशों के साथ देश के IT निर्यात को आने वाले वर्षों में और गति मिलने की उम्मीद है।

