जीएसटी सचल इकाइयों की कार्यप्रणाली पर व्यापार मंडल ने उठाए सवाल, अपर आयुक्त को सौंपा मांग-पत्र
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने व्यापारियों की विभिन्न समस्याओं और जीएसटी विभाग की सचल इकाइयों की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग को लेकर अपर आयुक्त, राज्य कर, कानपुर संध्या छाबड़ा को मांग-पत्र सौंपा। प्रदेश महामंत्री रवीन्द्र त्रिपाठी की अगुवाई में व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने व्यापारियों से जुड़ी शिकायतों और सुझावों को अधिकारियों के सामने रखते हुए उनके शीघ्र निस्तारण की मांग की।
व्यापार मंडल का कहना है कि प्रदेश के अलग-अलग जनपदों, विशेषकर कानपुर, उन्नाव और कानपुर देहात के व्यापारियों से जीएसटी विभाग की सचल इकाइयों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। संगठन ने मांग की है कि व्यापारियों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
मांग-पत्र में संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य व्यापारियों के हितों की रक्षा के साथ-साथ पारदर्शी और भरोसेमंद कर व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इसके लिए विभाग और व्यापार जगत के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
सचल इकाइयों की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री रवीन्द्र त्रिपाठी ने मांग-पत्र में कहा कि विभिन्न जनपदों के व्यापारियों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर संगठन ने यह मांग उठाई है। उनका आरोप है कि कुछ स्थानों पर जीएसटी विभाग की सचल इकाइयों द्वारा छोटी-छोटी तकनीकी कमियों को आधार बनाकर व्यापारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
संगठन के अनुसार, कुछ व्यापारियों ने कथित तौर पर यह शिकायत भी की है कि उनसे नियमित रूप से अवैध धनराशि देने का दबाव बनाया जाता है। हालांकि, ये सभी आरोप व्यापार मंडल की ओर से प्राप्त शिकायतों पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
व्यापार मंडल ने मांग की है कि ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि सचल दल में अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद नए अधिकारियों के आने पर कुछ व्यापारियों पर दबाव बनाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। व्यापार मंडल ने विभाग से इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
जेसी एसआईबी को लेकर भी जांच की मांग
मांग-पत्र में कानपुर में तैनात जेसी (एसआईबी) रन केंद्र सिंह के संबंध में प्राप्त शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। व्यापार मंडल ने दावा किया कि कुछ व्यापारियों ने उनके निर्देशन में व्यापारियों को कथित रूप से परेशान किए जाने की शिकायत संगठन तक पहुंचाई है।
संगठन की ओर से आरोप लगाया गया है कि कुछ ऐसे वाहनों के खिलाफ विशेष कार्रवाई किए जाने की शिकायत मिली है, जिनके संचालक कथित तौर पर अवैध धनराशि देने के लिए तैयार नहीं होते। इसके अलावा एक मामले में बातचीत के दौरान कथित रूप से अव्यावहारिक व्यवहार किए जाने की शिकायत का भी उल्लेख मांग-पत्र में किया गया है।
व्यापार मंडल ने इन शिकायतों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
इसके साथ ही संगठन ने संबंधित अधिकारी की आय और संपत्तियों की भी जांच कराने की मांग रखी है। हालांकि, यह मांग संगठन की ओर से की गई है और किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार का निष्कर्ष सक्षम जांच के आधार पर ही तय किया जा सकता है।
पीवी के नाम पर कथित वसूली का मुद्दा उठाया
मांग-पत्र में पीवी के नाम पर व्यापारियों से कथित रूप से धनराशि मांगे जाने की शिकायतों को भी प्रमुखता से उठाया गया। व्यापार मंडल के अनुसार, प्रदेश के कई जनपदों से इस तरह की शिकायतें पूर्व में प्राप्त हुई थीं।
संगठन का कहना है कि इस विषय को प्रमुख सचिव और आयुक्त की संयुक्त बैठक में भी उठाया गया था। उस समय कथित वसूली पर प्रभावी अंकुश लगाने का आश्वासन दिया गया था। व्यापार मंडल के अनुसार, कुछ जनपदों में स्थिति में सुधार देखने को मिला है, लेकिन कानपुर, उन्नाव और कानपुर देहात से अभी भी शिकायतें मिल रही हैं।
ऐसे में संगठन ने विभाग से मांग की है कि शिकायतों की गंभीरता से जांच कराकर यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए। इससे व्यापारियों के बीच विभाग के प्रति विश्वास मजबूत हो सकेगा।
वाहन चालकों के साथ व्यवहार को लेकर भी सवाल
व्यापार मंडल ने जीएसटी चेकिंग के दौरान वाहन चालकों और वाहन स्वामियों के साथ व्यवहार को लेकर भी चिंता जताई। संगठन के मुताबिक, कानपुर और उन्नाव समेत रेंज के विभिन्न जनपदों से शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि चेकिंग के दौरान कुछ सचल दल अधिकारियों द्वारा वाहन चालक अथवा वाहन स्वामी के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए जाते हैं।
संगठन ने इसे अनुचित बताते हुए पूरे जोन में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। व्यापार मंडल का कहना है कि चेकिंग प्रक्रिया के दौरान व्यापारियों और वाहन चालकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए तथा किसी भी कार्रवाई को निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, व्यापार मंडल ने शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच करने और दोषी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
व्यापारियों के प्रतिनिधियों से सम्मानजनक व्यवहार की मांग
मांग-पत्र में व्यापारियों के प्रतिनिधियों के साथ व्यवहार का मुद्दा भी शामिल किया गया है। संगठन ने मांग की कि जोन के अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि व्यापारी अथवा किसी व्यापारिक संगठन का प्रतिनिधि जब अपनी समस्या लेकर विभागीय अधिकारियों से संपर्क करे तो उसके साथ सम्मानजनक और शिष्ट व्यवहार किया जाए।
व्यापार मंडल के अनुसार, व्यापारियों की समस्याओं का विधिसम्मत और समयबद्ध समाधान होने से विभाग और व्यापार जगत के बीच बेहतर संबंध स्थापित हो सकते हैं। इसके लिए संवाद की प्रक्रिया को मजबूत करना जरूरी है।
संगठन ने कहा कि व्यापारी सरकार को राजस्व उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए कर व्यवस्था के अनुपालन के साथ-साथ व्यापारियों की व्यावहारिक समस्याओं को भी समझना आवश्यक है।
पारदर्शी कर व्यवस्था पर जोर
व्यापार मंडल ने अपने मांग-पत्र में कहा कि व्यापारियों और कर विभाग के बीच विश्वास का वातावरण तभी बनेगा, जब जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया पारदर्शी हो। संगठन ने अधिकारियों से आग्रह किया कि शिकायतों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाए और किसी भी व्यापारी के खिलाफ केवल तकनीकी कमियों के आधार पर अनावश्यक कार्रवाई न हो।
साथ ही, व्यापारियों से भी नियमों का पालन करने और जीएसटी से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने की अपेक्षा की गई है। इससे जांच के दौरान अनावश्यक विवादों को कम किया जा सकता है।
व्यापार मंडल का कहना है कि उसका उद्देश्य विभाग के खिलाफ माहौल बनाना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और व्यापारियों की समस्याओं का समाधान कराना है। संगठन चाहता है कि ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यापारियों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो और कर प्रशासन के प्रति उनका भरोसा बना रहे।
इन पदाधिकारियों ने सौंपा मांग-पत्र
मांग-पत्र सौंपने वालों में भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री रवीन्द्र त्रिपाठी के साथ कानपुर प्रभारी सुभाष चंद्र गुप्ता, प्रदेश संगठन मंत्री श्याम कनोडिया, प्रदेश उपाध्यक्ष अजय मित्तल, स्क्रैप व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश अग्रहरी, प्रदेश मंत्री अरविंद पांडे, प्रकाश गुप्ता, अमित, बब्बू यादव, विजय नारायण समेत अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
पदाधिकारियों ने अपर आयुक्त राज्य कर संध्या छाबड़ा से मांग की कि व्यापारियों की ओर से उठाए गए सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किया जाए और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल व्यापार मंडल की ओर से उठाए गए आरोप और मांगें विभागीय स्तर पर जांच एवं कार्रवाई के विषय हैं। यदि संबंधित शिकायतों की जांच होती है तो उसके निष्कर्ष के आधार पर ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, व्यापार मंडल को उम्मीद है कि विभाग की ओर से शिकायतों का संज्ञान लेकर व्यापारियों को राहत देने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

