फर्रुखाबाद में आशा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
रिपोर्ट: हर्ष वर्मा
फर्रुखाबाद। अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में आशा कार्यकर्ता यूनियन से जुड़ी कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने शासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए अपनी लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के बाद आशा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सीएमओ को सौंपा और छह फरवरी 2026 को हुए समझौते को लागू कराने की मांग की।
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और अभियानों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। यूनियन पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि शासन स्तर पर सहमति बनने के बाद भी उन मांगों को लागू करने की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है।
छह फरवरी के समझौते को लागू करने की मांग
प्रदर्शन के दौरान यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि छह फरवरी 2026 को स्वास्थ्य मंत्री और आशा वर्कर्स यूनियन के प्रतिनिधियों के बीच 13 सूत्रीय मांगों को लेकर समझौता हुआ था। इसमें आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी, विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों से संबंधित प्रोत्साहन राशि का भुगतान और अन्य मांगों पर सहमति बनने की बात कही गई थी।
हालांकि, यूनियन का आरोप है कि समझौते के बावजूद अब तक कई मांगों का समाधान नहीं हुआ है। ऐसे में कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। उन्होंने सरकार से समझौते में शामिल बिंदुओं को जल्द लागू करने की मांग की है।
10 हजार रुपये मासिक मानदेय की मांग
ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं ने प्रतिमाह 10 हजार रुपये मानदेय दिए जाने की मांग प्रमुखता से रखी। इसके साथ ही आयुष्मान कार्ड बनाने और आभा आईडी से संबंधित कार्यों के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का पूरा भुगतान करने की मांग की गई।
यूनियन के मुताबिक आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। इसलिए इन अभियानों के लिए निर्धारित प्रोत्साहन राशि का समय पर भुगतान किया जाना जरूरी है। कार्यकर्ताओं ने पोलियो, फाइलेरिया, दस्तक और संचारी रोग नियंत्रण अभियान की प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर प्रतिदिन 500 रुपये किए जाने की मांग भी की।
लंबित प्रोत्साहन राशि के भुगतान की मांग
आशा कार्यकर्ताओं ने सी बैंक, टीवीवाई कफ रोग, टीबी स्क्रीनिंग, पोलियो, दस्तक और संचारी रोग अभियानों समेत पूर्व वर्षों की लंबित प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान कराने की मांग की। उनका कहना है कि अलग-अलग स्वास्थ्य कार्यक्रमों में किए गए कार्यों के बावजूद कई भुगतान अभी तक लंबित हैं।
कार्यकर्ताओं ने शासन और स्वास्थ्य विभाग से इस संबंध में स्पष्ट व्यवस्था करने की मांग की, ताकि भविष्य में प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अनावश्यक देरी न हो। उनका कहना है कि समय पर भुगतान मिलने से आशा कार्यकर्ताओं को आर्थिक रूप से राहत मिलेगी और वे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों को और बेहतर तरीके से कर सकेंगी।
कैशलेस चिकित्सा और बीमा सुविधा बढ़ाने की मांग
ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जुड़ी राशि में पांच लाख रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी करने की मांग की। इसके अलावा दुर्घटना बीमा की राशि को दो लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की मांग भी रखी गई।
यूनियन ने मातृत्व अवकाश से जुड़ी मांग भी उठाई। कार्यकर्ताओं ने चार माह का मातृत्व अवकाश अनुमन्य किए जाने की मांग की। उनका कहना है कि कार्य की प्रकृति को देखते हुए महिला कर्मियों के लिए बेहतर सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की व्यवस्था जरूरी है।
आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग
आशा कार्यकर्ताओं ने 15 दिसंबर 2025 से छह फरवरी 2026 के बीच चले आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को भी समझौते के अनुसार वापस लेने की मांग की। यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि यदि छह फरवरी के समझौते में इस संबंध में सहमति बनी थी तो उसे भी लागू किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही जीएसकेएस की कमेटियों का गठन किए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनकी समस्याओं के समाधान और अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए संबंधित स्तर पर प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है।
श्रम सम्मेलन की सिफारिशें लागू करने की मांग
यूनियन ने 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी की। पदाधिकारियों ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की और शासन से शीघ्र कार्रवाई की अपील की। उनका कहना है कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण कड़ी हैं, इसलिए उनकी मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
ज्ञापन सौंपने के बाद यूनियन पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने सरकार से छह फरवरी 2026 के समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा ज्ञापन में शामिल सभी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करने की मांग की।
प्रदर्शन में राधा देवी, मंजूलता, रामा देवी, वंदना, संगीता, मीना, ममता, रोली, ऊषा, पिंकी, रेशमा, सुनीता, नीलम, सपना, मिथलेश, सरोजनी और राजकुमारी समेत बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
आशा कार्यकर्ताओं के इस प्रदर्शन से एक बार फिर मानदेय, प्रोत्साहन राशि, बीमा, चिकित्सा सुविधा और अन्य सेवा संबंधी मांगों का मुद्दा सामने आया है। अब कार्यकर्ताओं की नजर शासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से होने वाली अगली कार्रवाई पर है। यदि उनकी मांगों पर समय रहते निर्णय होता है तो विवाद का समाधान संभव है, वहीं मांगें लंबित रहने की स्थिति में यूनियन की ओर से आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी दी गई है।

