यूपी में दिख रहा ‘मिशन सेफ फ्यूचर’ का असर: लगातार जारी है स्कूली वाहनों की फिटनेस और परमिट जांच
रिपोर्ट – सर्वेश शर्मा
कानपुर: उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने राज्यव्यापी ‘मिशन सेफ फ्यूचर’ अभियान शुरू किया है। यह विशेष अभियान 1 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है। अभियान के तहत स्कूली वाहनों की फिटनेस, परमिट, सुरक्षा उपकरणों और अन्य आवश्यक मानकों की गहन जांच की जा रही है। परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि 7 जुलाई 2026 तक सभी स्कूल अपने वाहनों की फिटनेस और परमिट को वैध करवा लें। निर्धारित समय सीमा के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सीज किया जाएगा।
यह अभियान हाल के दिनों में सामने आई सुरक्षा संबंधी घटनाओं से सबक लेते हुए शुरू किया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को सुरक्षित और मानक अनुरूप परिवहन सुविधा उपलब्ध हो।
बच्चों की सुरक्षा को दी जा रही सर्वोच्च प्राथमिकता
परिवहन विभाग का कहना है कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा किसी भी स्थिति में समझौते का विषय नहीं हो सकती। इसी कारण इस विशेष अभियान के तहत केवल दस्तावेजों की जांच ही नहीं, बल्कि वाहनों की वास्तविक स्थिति का भी भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक वाहन की फिटनेस, ब्रेक सिस्टम, टायर, आपातकालीन निकास, फायर एक्सटिंग्विशर, प्राथमिक उपचार किट और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि वाहन निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं या नहीं।
प्रदेशभर में चल रहा है यह विशेष अभियान
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन के निर्देश पर पूरे उत्तर प्रदेश में यह अभियान एक साथ संचालित किया जा रहा है। अभियान के दौरान परिवहन विभाग की टीमें विभिन्न जिलों में स्कूलों का निरीक्षण कर रही हैं।
कानपुर सहित कई जिलों में अधिकारियों ने स्कूल परिसरों में पहुंचकर वाहनों की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान दस्तावेजों के साथ-साथ वाहनों की तकनीकी स्थिति का भी परीक्षण किया जा रहा है।
पोर्टल के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 65,162 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। हालांकि, इनमें से बड़ी संख्या ऐसे वाहनों की है जिनके दस्तावेज अद्यतन नहीं हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार—
- कुल ऑनबोर्ड स्कूली वाहन: 65,162
- फिटनेस समाप्त या फेल वाहन: 5,647
- परमिट समाप्त हो चुके वाहन: 7,418
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि बड़ी संख्या में ऐसे वाहन हैं जिन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप अपडेट किए जाने की आवश्यकता है। यही कारण है कि परिवहन विभाग ने अभियान को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया है।
स्कूल प्रबंधन को जारी किए गए नोटिस
आरटीओ (प्रवर्तन) राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि जिन स्कूलों के वाहनों की फिटनेस अथवा परमिट की अवधि समाप्त हो चुकी है, उन्हें नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त संबंधित स्कूल प्रबंधन से टेलीफोन के माध्यम से भी संपर्क किया जा रहा है। कई स्थानों पर विभागीय अधिकारी स्वयं स्कूलों में पहुंचकर आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं ताकि समय सीमा समाप्त होने से पहले सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।
7 जुलाई तक दिया गया अंतिम अवसर
परिवहन विभाग ने सभी स्कूल संचालकों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि वे 7 जुलाई 2026 तक अपने सभी वाहनों की फिटनेस जांच पूरी कराकर परमिट का नवीनीकरण करवा लें।
यदि निर्धारित समय सीमा के बाद कोई भी वाहन बिना वैध फिटनेस प्रमाणपत्र या परमिट के संचालित पाया गया, तो उसके विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर ऐसे वाहनों को मौके पर ही सीज भी किया जा सकता है।
अधिकारी करेंगे भौतिक सत्यापन
इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि परिवहन विभाग केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं रहेगा। विभागीय अधिकारी और कर्मचारी स्वयं स्कूल परिसरों में जाकर वाहनों का भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) करेंगे। निरीक्षण के दौरान निम्न बिंदुओं की विशेष रूप से जांच की जाएगी—
- वाहन की समग्र फिटनेस
- फायर एक्सटिंग्विशर की उपलब्धता एवं वैधता
- प्राथमिक उपचार किट
- आपातकालीन निकास व्यवस्था
- सीटों की स्थिति
- वाहन के दस्तावेज
- चालक का लाइसेंस और आवश्यक योग्यता
- सुरक्षा संबंधी अन्य अनिवार्य मानक
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को पूरी तरह सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराया जा सके।
अब तक 92 वाहनों का किया जा चुका है निरीक्षण
अभियान के तहत अब तक 92 स्कूली वाहनों का निरीक्षण किया जा चुका है। जांच के दौरान विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर 8 वाहनों के चालान भी किए गए हैं।
परिवहन विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा मानकों से नहीं होगा समझौता
आरटीओ (प्रवर्तन) राहुल श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा,
“बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं। देश के इस भविष्य को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराना परिवहन विभाग का प्राथमिक दायित्व है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
उन्होंने स्कूल प्रबंधन से भी अपील की कि वे केवल कानूनी औपचारिकताओं तक सीमित न रहें, बल्कि वाहनों की वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करें।
पढ़िए यह हैं अभिभावकों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश
विभागीय विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा केवल स्कूल और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि अभिभावकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
अभिभावक समय-समय पर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जिस वाहन से उनका बच्चा विद्यालय आता-जाता है, उसमें आवश्यक सुरक्षा उपकरण मौजूद हों। यदि किसी प्रकार की कमी दिखाई दे, तो इसकी जानकारी तुरंत स्कूल प्रशासन को दी जानी चाहिए।
सड़क सुरक्षा के प्रति बढ़ रही जागरूकता
‘मिशन सेफ फ्यूचर’ केवल एक प्रवर्तन अभियान नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास है। इससे स्कूल संचालकों, वाहन चालकों और अभिभावकों में सुरक्षा मानकों के पालन के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।
सम्बंधित विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी संबंधित पक्ष निर्धारित नियमों का ईमानदारी से पालन करें, तो स्कूली परिवहन को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘मिशन सेफ फ्यूचर’ स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अभियान के माध्यम से प्रदेशभर में स्कूली वाहनों की फिटनेस, परमिट और सुरक्षा मानकों की व्यापक जांच की जा रही है। परिवहन विभाग ने स्कूलों को 7 जुलाई तक आवश्यक दस्तावेज अद्यतन कराने का अंतिम अवसर दिया है, जिसके बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक छात्र सुरक्षित और मानक अनुरूप वाहन से विद्यालय पहुंचे। यदि सभी स्कूल, वाहन संचालक और अभिभावक मिलकर इस अभियान में सहयोग करें, तो प्रदेश में स्कूली परिवहन व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद बनाया जा सकता है।

