चंदौली में सपा को झटका, महिला सभा की नगर अध्यक्ष आरती यादव ने पद से दिया इस्तीफा

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Digital UP News Desk

चंदौली: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले चंदौली की सियासत में हलचल बढ़ती नजर आ रही है। समाजवादी पार्टी की महिला सभा की जिलाध्यक्ष गार्गी सिंह पटेल के पार्टी छोड़ने के बाद अब महिला सभा की नगर अध्यक्ष आरती यादव ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

आरती यादव ने अपने इस्तीफे के पीछे पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों द्वारा लगातार नजरअंदाज किए जाने को प्रमुख कारण बताया है। हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि वह समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्य बनी रहेंगी और आगे भी पार्टी की विचारधारा के साथ काम करती रहेंगी।

सुभाष नगर से सभासद भी हैं

आरती यादव डीडीयू नगर के वार्ड नंबर 21 सुभाष नगर से सभासद भी हैं। इसके साथ ही वह समाजवादी पार्टी महिला सभा की नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। मंगलवार को उनके अचानक पद से इस्तीफा देने की खबर सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं।

खास बात यह है कि कुछ समय पहले ही महिला सभा की जिलाध्यक्ष गार्गी सिंह पटेल के पार्टी छोड़ने की बात सामने आई थी। ऐसे में अब आरती यादव के पद छोड़ने से संगठन के भीतर की स्थिति को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

आरती यादव ने पद से इस्तीफा क्यों दिया?

आरती यादव ने अपने इस्तीफा पत्र में पार्टी के स्थानीय संगठन में खुद को नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वह लंबे समय से महिला सभा की नगर अध्यक्ष के पद पर रहते हुए संगठन और जनता के बीच काम करती रही हैं। हालांकि, पार्टी की बैठकों और अन्य कार्यक्रमों में उन्हें अपेक्षित महत्व नहीं मिलने से वह निराश थीं।

इस्तीफा पत्र में आरती यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी उनके लिए केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी रही है। उन्होंने वंचित वर्ग और आम जनता के बीच काम करने को अपना संकल्प बताया। इसके बावजूद जब पार्टी की बैठकें या कार्यक्रम आयोजित होते थे, तो उनके मुताबिक जिला अध्यक्ष, जिला महासचिव और विधानसभा अध्यक्ष की ओर से उन्हें लंबे समय से नजरअंदाज किया जाता रहा।

उन्होंने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी पदाधिकारी की उपस्थिति को ही जरूरी न समझा जाए तो वह पद केवल नाम तक सीमित रह जाता है। इसी वजह से उन्होंने महिला सभा की नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी से अलग होने का फैसला किया।

‘पद से ज्यादा जरूरी पार्टी की इज्जत और जनता का विश्वास’

आरती यादव ने अपने इस्तीफा पत्र में आगामी विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 का चुनाव सामने है और ऐसे समय में संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं और जनता के बीच मजबूत संपर्क बेहद जरूरी है।

उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और वार्डवासियों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक यदि संगठन अपने जमीनी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज करता है तो चुनावी स्तर पर इसका असर पड़ सकता है।

आरती यादव ने कहा कि पार्टी की वास्तविक ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ताओं में होती है। इसलिए कार्यकर्ताओं की उपेक्षा संगठन को कमजोर कर सकती है। उन्होंने इसी भावना के साथ महिला सभा के नगर अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का फैसला किया।

हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे के साथ यह भी स्पष्ट किया कि उनका समाजवादी पार्टी से नाता खत्म नहीं हुआ है। वह साधारण कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी में बनी रहेंगी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की समाजवादी विचारधारा के अनुरूप काम करती रहेंगी। उन्होंने अपने पत्र में यह संदेश दिया कि उनके लिए पद से अधिक महत्वपूर्ण पार्टी की प्रतिष्ठा और जनता का विश्वास है।

गार्गी पटेल के बाद आरती यादव का इस्तीफा चर्चा में

चंदौली में समाजवादी पार्टी की महिला इकाई से जुड़े घटनाक्रम लगातार चर्चा में हैं। महिला सभा की जिलाध्यक्ष गार्गी सिंह पटेल के पार्टी छोड़ने के बाद अब नगर अध्यक्ष आरती यादव के पद से इस्तीफा देने से स्थानीय संगठन को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को और हवा मिली है।

हालांकि, दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं और आरती यादव ने फिलहाल पार्टी की सदस्यता छोड़ने से इनकार किया है। उन्होंने केवल महिला सभा की नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी से खुद को अलग किया है।

यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर उनके फैसले को पार्टी छोड़ने के बजाय संगठनात्मक असंतोष के रूप में देखा जा रहा है। आरती यादव ने भी अपने पत्र में पार्टी के साथ बने रहने और समाजवादी विचारधारा पर काम करते रहने की बात कही है।

वार्ड की समस्याओं को लेकर मुखर रही हैं आरती यादव

आरती यादव केवल राजनीतिक पद के कारण ही चर्चा में नहीं रही हैं। वह डीडीयू नगर के वार्ड नंबर 21 सुभाष नगर से सभासद होने के कारण स्थानीय समस्याओं को लेकर भी सक्रिय रही हैं।

क्षेत्र में सड़क, नाली, जल निकासी, अतिक्रमण और तालाब की भूमि के सीमांकन जैसे बुनियादी मुद्दों को लेकर वह समय-समय पर आवाज उठाती रही हैं। स्थानीय स्तर पर नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता की चर्चा राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी होती रही है।

उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि होने का उद्देश्य केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। बल्कि वार्ड के लोगों की समस्याओं को संबंधित विभाग और प्रशासन के सामने रखना भी उनकी जिम्मेदारी है। इसी वजह से वह स्थानीय विकास से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाती रही हैं।

निकाय चुनाव के दौरान भी चर्चा में रहा नाम

वर्ष 2023 के निकाय चुनाव के दौरान भी आरती यादव और उनके पति श्रवण यादव का नाम स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाओं में आया था। वार्ड स्तर की राजनीति में उनकी सक्रियता के चलते वह स्थानीय स्तर पर एक जाना-पहचाना चेहरा बनी हुई हैं।

सभासद के रूप में वार्ड से जुड़े मुद्दों को उठाने के साथ-साथ वह सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहती हैं। यही कारण है कि महिला सभा की नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई थी।

अब पद से इस्तीफा देने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि वह पार्टी के साधारण कार्यकर्ता के तौर पर किस तरह अपनी राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाती हैं।

महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रियता

आरती यादव की सक्रियता केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं रही है। वह महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी आवाज उठाती रही हैं। हाल ही में सुभाष नगर क्षेत्र की महिलाओं को लेकर फेसबुक पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ उन्होंने मुगलसराय कोतवाली में तहरीर दी थी।

इस मामले में उन्होंने महिलाओं के सम्मान और सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदार व्यवहार की आवश्यकता को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इससे भी यह संकेत मिलता है कि वह स्थानीय सामाजिक मुद्दों को राजनीतिक गतिविधियों के साथ जोड़कर देखती हैं।

2027 के चुनाव से पहले संगठन के लिए अहम समय

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 का विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने की कोशिश करते हैं।

ऐसे में चंदौली में समाजवादी पार्टी की महिला सभा से जुड़े लगातार सामने आ रहे घटनाक्रम पार्टी के स्थानीय संगठन के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, आरती यादव ने पार्टी छोड़ने की बात नहीं कही है। इसलिए उनका इस्तीफा फिलहाल केवल संगठनात्मक पद से अलग होने का फैसला है।

इसके बावजूद महिला संगठन के दो प्रमुख चेहरों से जुड़े घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीतिक माहौल को जरूर चर्चा में ला दिया है। आने वाले समय में पार्टी नेतृत्व इन घटनाक्रमों को किस तरह देखता है और संगठन में क्या बदलाव होते हैं, इस पर स्थानीय कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर रहेगी।

साधारण कार्यकर्ता के रूप में जारी रखेंगी काम

आरती यादव के इस्तीफे की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने पार्टी से दूरी बनाने के बजाय साधारण कार्यकर्ता के रूप में काम जारी रखने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रतिबद्धता समाजवादी विचारधारा के प्रति बनी रहेगी।

उनके मुताबिक संगठन में पद महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन जनता का विश्वास उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि उन्होंने नगर अध्यक्ष पद से हटने का फैसला किया, जबकि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता बरकरार रखने का निर्णय लिया।

कुल मिलाकर, चंदौली में समाजवादी पार्टी की महिला सभा की नगर अध्यक्ष आरती यादव का इस्तीफा स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। गार्गी सिंह पटेल के पार्टी छोड़ने के बाद सामने आए इस घटनाक्रम ने महिला संगठन को लेकर चर्चाओं को और बढ़ा दिया है। हालांकि, आरती यादव ने पार्टी की सदस्यता बनाए रखने और समाजवादी विचारधारा के साथ काम करने की बात कही है।

अब आगामी समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समाजवादी पार्टी का स्थानीय संगठन इस स्थिति को किस तरह संभालता है और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिला कार्यकर्ताओं एवं जमीनी संगठन को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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