फर्रुखाबाद में कमांडेंट ब्रिगेडियर समेत तीन के खिलाफ परिवाद दर्ज, पूर्व सैनिक ने लगाए किराया वसूली के आरोप

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रिपोर्ट- हर्ष वर्मा

फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ स्थित सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट सेंटर के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में दुकान आवंटन और किराये को लेकर सामने आया विवाद अब न्यायालय पहुंच गया है। पूर्व सैनिक विवेक सिंह राठौर की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। मामले में कमांडेंट ब्रिगेडियर मनीष जैन, डिप्टी कमांडेंट गौरव बोस समेत तीन लोगों के खिलाफ शिकायत की गई है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को निर्धारित की गई है।

शिकायतकर्ता ने दुकान के निर्धारित किराये से अधिक राशि लिए जाने, अतिरिक्त वसूली, दुकान बंद कराने की धमकी देने और दुकान में रखे सामान को बाहर नहीं निकालने देने समेत कई आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायालय में होने वाली आगे की कार्यवाही के बाद ही हो सकेगी।

निविदा में 3500 रुपये किराया निर्धारित होने का दावा

कादरीगेट थाना क्षेत्र के आवास विकास कॉलोनी निवासी पूर्व सैनिक विवेक सिंह राठौर के अनुसार, मई 2023 में उन्हें सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट सेंटर के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में एक दुकान आवंटित की गई थी। उनका कहना है कि दुकान के लिए जारी निविदा में मासिक किराया 3500 रुपये निर्धारित किया गया था।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि दुकान आवंटित होने के बाद जब अनुबंध पर हस्ताक्षर कराने की प्रक्रिया हुई तो उसमें कथित तौर पर 3500 रुपये के बजाय 12 हजार रुपये प्रतिमाह किराया दर्ज कराया गया। उनका कहना है कि उन्होंने इस व्यवस्था के तहत दुकान में कारोबार शुरू किया और दुकान को व्यवस्थित करने के लिए लाखों रुपये का फर्नीचर और अन्य सामान लगाया।

इसके बाद कथित तौर पर उनसे 12 हजार रुपये प्रतिमाह किराया देने का दबाव बनाया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि उनसे 20 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि वसूली गई। इसको लेकर विवाद बढ़ने के बाद मामला धीरे-धीरे न्यायालय तक पहुंच गया।

दुकान में लगाया था लाखों रुपये का सामान

विवेक सिंह राठौर के मुताबिक, दुकान मिलने के बाद उन्होंने कारोबार शुरू करने के लिए अपनी पूंजी लगाई। दुकान में फर्नीचर, सामान और अन्य आवश्यक संसाधन लगाए गए। उनका दावा है कि इस पूरी व्यवस्था पर करीब लाखों रुपये खर्च हुए थे।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में दुकान के किराये और अन्य भुगतान को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। उनका कहना है कि निर्धारित किराये की तुलना में अधिक राशि लिए जाने को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई। इसके बावजूद उनसे अधिक किराया देने का दबाव बनाया गया।

इसी बीच दुकान को लेकर विवाद और बढ़ गया। शिकायतकर्ता ने न्यायालय में दाखिल प्रार्थना पत्र में संबंधित अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मामले को सुलझाने के बजाय उन्हें दुकान बंद कराने की धमकी दी गई।

10 जनवरी 2025 को दुकान बंद कराने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 10 जनवरी 2025 को कमांडेंट ब्रिगेडियर मनीष जैन और डिप्टी कमांडेंट गौरव बोस की ओर से दुकान बंद कराने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके बाद दुकान को बंद करा दिया गया।

पूर्व सैनिक का आरोप है कि दुकान बंद होने के बाद उन्हें अंदर रखा अपना सामान निकालने का अवसर नहीं दिया गया। उनका कहना है कि दुकान में फर्नीचर और अन्य सामान मौजूद था, जिसकी कुल कीमत लाखों रुपये थी।

शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया है कि बाद में दुकान का ताला तोड़कर उसे किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित कर दिया गया। इस घटनाक्रम के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने करीब 10 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया है।

पुलिस में शिकायत के बाद न्यायालय की शरण

विवेक सिंह राठौर का कहना है कि उन्होंने पूरे मामले को लेकर पुलिस से भी शिकायत की थी। हालांकि, उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया।

उन्होंने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत तथ्यों और शिकायत के आधार पर सीजेएम ने प्रकरण को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है।

न्यायालय के इस आदेश के बाद अब मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी। अगली सुनवाई 17 सितंबर को निर्धारित की गई है। न्यायालय की आगामी कार्यवाही में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया जाएगा।

आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया में होगी जांच

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि परिवाद दर्ज होने का अर्थ आरोपों का सिद्ध होना नहीं है। शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों पर न्यायालय में आगे की प्रक्रिया के दौरान परीक्षण होगा। संबंधित पक्षों का पक्ष और उपलब्ध दस्तावेज भी मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

वहीं, शिकायत में कमांडेंट ब्रिगेडियर मनीष जैन, डिप्टी कमांडेंट गौरव बोस और एक अन्य व्यक्ति को लेकर आरोप लगाए गए हैं। मामले में संबंधित अधिकारियों या अन्य पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना आवश्यक होगा।

दुकान आवंटन और किराये का विवाद बना न्यायालयी मामला

फतेहगढ़ स्थित सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट सेंटर के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में दुकान आवंटन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन चुका है। शिकायतकर्ता के अनुसार, विवाद की शुरुआत दुकान के निर्धारित किराये और अनुबंध में दर्ज किराये की राशि को लेकर हुई।

एक ओर जहां निविदा में 3500 रुपये मासिक किराया निर्धारित होने का दावा किया गया है, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता का आरोप है कि अनुबंध में 12 हजार रुपये प्रतिमाह किराया दर्ज कराया गया। इसके अलावा 20 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि वसूले जाने का भी आरोप लगाया गया है।

इसके बाद दुकान बंद कराने और उसमें रखे सामान को बाहर नहीं निकालने देने का आरोप सामने आया। शिकायतकर्ता ने इसी क्रम में करीब 10 लाख रुपये के आर्थिक नुकसान का दावा किया है।

अब सीजेएम के आदेश के बाद मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 17 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर मामले की अगली स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल, पूरे प्रकरण में लगाए गए आरोप न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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