कानपुर के जीआईसी चुन्नीगंज में 4.92 करोड़ से बन रहा इंडोर मिनी स्टेडियम, समय पर पूरा करने के निर्देश

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: शहर के चुन्नीगंज स्थित राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) परिसर में विद्यार्थियों और उभरती खेल प्रतिभाओं के लिए इंडोर मिनी स्टेडियम का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। करीब 4.92 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस परियोजना में बैडमिंटन कोर्ट, टेबल टेनिस सहित कई इंडोर खेलों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मंगलवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने निर्माणाधीन परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया और कार्य की प्रगति, गुणवत्ता तथा भूमि चयन से जुड़े पहलुओं की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को निर्माण कार्य में आवश्यक तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए और निर्माण के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता तथा तकनीकी मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए।

4.92 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा स्टेडियम

माध्यमिक शिक्षा विभाग की इस परियोजना का निर्माण उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, निर्माण खंड कानपुर-01 द्वारा कराया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परियोजना का निर्माण कार्य 6 मार्च 2026 को शुरू हुआ था और इसे 1 जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इंडोर मिनी स्टेडियम का उद्देश्य जीआईसी चुन्नीगंज के विद्यार्थियों को स्कूल परिसर में ही बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके निर्माण के बाद विद्यार्थियों को विभिन्न इंडोर खेलों के अभ्यास के लिए उपयुक्त स्थान मिल सकेगा।

इसके अलावा, विद्यालय में पढ़ने वाले ऐसे विद्यार्थियों को भी अपनी खेल प्रतिभा विकसित करने का अवसर मिलेगा, जो बैडमिंटन, टेबल टेनिस या अन्य इंडोर खेलों में रुचि रखते हैं।

डीएम ने किया निर्माण कार्य का निरीक्षण

मंगलवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह निर्माणाधीन इंडोर मिनी स्टेडियम का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने परियोजना के निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति को देखा और संबंधित अधिकारियों से कार्य की प्रगति के बारे में जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी धन से तैयार होने वाली परियोजनाओं में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य की नियमित निगरानी की जाए। साथ ही, तकनीकी मानकों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित किया जाए, ताकि परियोजना पूरी होने के बाद विद्यार्थियों को सुरक्षित और उपयोगी खेल परिसर उपलब्ध हो सके।

भूमि चयन को लेकर डीएम ने मांगा स्पष्टीकरण

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने इंडोर मिनी स्टेडियम के लिए चयनित भूमि को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने मौके पर देखा कि प्रस्तावित निर्माण के पीछे भी पर्याप्त भूमि उपलब्ध है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि यदि स्टेडियम के निर्माण के लिए परिसर में पीछे उपलब्ध भूमि का चयन किया जाता, तो सामने स्थित भूमि का भविष्य में अन्य आवश्यक कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता था।

इसी बिंदु को लेकर जिलाधिकारी ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने अधिकारियों को यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए कि पीछे पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने के बावजूद निर्माण के लिए सामने की भूमि का चयन किन परिस्थितियों और किस आधार पर किया गया।

भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने पर जोर

जिलाधिकारी के निरीक्षण में भूमि के बेहतर उपयोग का मुद्दा महत्वपूर्ण रहा। सरकारी संस्थानों के परिसरों में उपलब्ध भूमि का उपयोग भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर करने पर जोर दिया जाता है।

इसी क्रम में जिलाधिकारी ने अधिकारियों से भूमि चयन के निर्णय का आधार स्पष्ट करने को कहा। उनका कहना था कि परिसर में उपलब्ध जमीन का उपयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए, जिससे वर्तमान परियोजना के साथ-साथ भविष्य में होने वाले विकास कार्यों के लिए भी पर्याप्त विकल्प उपलब्ध रहें।

भूमि चयन से संबंधित स्पष्टीकरण मिलने के बाद इस पहलू पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

समयसीमा में पूरा करना प्राथमिकता

परियोजना के लिए 1 जनवरी 2027 की पूर्णता तिथि निर्धारित की गई है। ऐसे में जिलाधिकारी ने निर्माण कार्य में अनावश्यक देरी नहीं होने देने के निर्देश दिए।

उन्होंने कार्यदायी संस्था से कहा कि निर्धारित समयसीमा को ध्यान में रखते हुए निर्माण की गति बढ़ाई जाए। साथ ही, जल्दबाजी में गुणवत्ता से समझौता न किया जाए।

प्रशासन की ओर से निर्माण कार्य की नियमित निगरानी किए जाने पर भी जोर दिया गया है। इससे परियोजना की प्रगति पर नजर रखने के साथ-साथ निर्माण में सामने आने वाली तकनीकी समस्याओं का समय पर समाधान किया जा सकेगा।

निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष जोर

सरकारी निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता को लेकर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।

इसके साथ ही निर्माण के प्रत्येक चरण की निगरानी करने और तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। परियोजना की मजबूती और लंबे समय तक उपयोगिता के लिए निर्माण सामग्री की गुणवत्ता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि यदि निर्माण के दौरान किसी स्तर पर तकनीकी समस्या सामने आती है तो उसका तत्काल समाधान कराया जाए।

विद्यार्थियों को मिलेंगी इंडोर खेल सुविधाएं

इंडोर मिनी स्टेडियम के तैयार होने के बाद जीआईसी चुन्नीगंज के विद्यार्थियों को स्कूल परिसर में ही कई खेलों के अभ्यास की सुविधा मिल सकेगी।

परियोजना में बैडमिंटन कोर्ट और टेबल टेनिस जैसी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। इसके अलावा विभिन्न इंडोर खेलों के लिए भी स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।

इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियों में भाग लेने का बेहतर अवसर मिलेगा। खासतौर पर उन विद्यार्थियों के लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है, जो खेलों में रुचि रखते हैं और नियमित अभ्यास के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश में रहते हैं।

खेल प्रतिभाओं को मिलेगा प्रोत्साहन

विद्यालय स्तर पर खेल सुविधाओं का विकास विद्यार्थियों में खेल के प्रति रुचि बढ़ाने में मदद कर सकता है। बेहतर अभ्यास स्थल मिलने से विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण ले सकेंगे।

बैडमिंटन और टेबल टेनिस जैसे इंडोर खेलों के लिए मौसम की स्थिति का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहता है। ऐसे में इंडोर मिनी स्टेडियम विद्यार्थियों के लिए पूरे वर्ष अभ्यास का अवसर उपलब्ध कराने में उपयोगी साबित हो सकता है।

इसके अलावा, विद्यालय की खेल गतिविधियों को भी नई दिशा मिल सकती है। प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास के लिए परिसर में ही बेहतर स्थान उपलब्ध होगा।

सरकारी परियोजना से स्कूल को मिलेगा नया खेल परिसर

4.92 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना जीआईसी चुन्नीगंज के लिए महत्वपूर्ण अवस्थापना विकास के रूप में देखी जा रही है। स्टेडियम बनने के बाद विद्यालय परिसर में खेल संबंधी सुविधाओं का विस्तार होगा।

इससे विद्यार्थियों के लिए खेल और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्कूल के वातावरण में भी सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।

हालांकि, परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में और तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार पूरा होता है या नहीं। इसी वजह से जिलाधिकारी ने समयबद्धता और गुणवत्ता दोनों पर समान रूप से जोर दिया है।

नियमित निगरानी के निर्देश

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा और निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परियोजना में किसी प्रकार का अनावश्यक विलंब न हो।

इसके साथ ही निर्माण एजेंसी को कार्य की प्रगति के अनुरूप आवश्यक संसाधनों और श्रमिकों की व्यवस्था करने तथा तय समयसीमा का पालन करने के लिए कहा गया है।

प्रशासन की निगरानी से परियोजना की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। साथ ही, यदि निर्माण कार्य में किसी स्तर पर कमी सामने आती है तो उसे समय रहते दूर किया जा सकेगा।

जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

इंडोर मिनी स्टेडियम का निर्माण 6 मार्च 2026 से शुरू हुआ था और परियोजना को 1 जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अब प्रशासन का जोर निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण पूरा कराने पर है।

जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ-साथ गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। वहीं, भूमि चयन से जुड़े सवाल पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

कुल मिलाकर, कानपुर के जीआईसी चुन्नीगंज में 4.92 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा इंडोर मिनी स्टेडियम विद्यार्थियों के लिए खेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके पूरा होने के बाद बैडमिंटन, टेबल टेनिस समेत कई इंडोर खेलों के अभ्यास की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रशासन ने निर्माण एजेंसी को समयसीमा का पालन करने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं। वहीं, परियोजना के लिए भूमि चयन को लेकर भी अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अब सभी की नजर इस परियोजना के निर्धारित समय पर पूरा होने और विद्यार्थियों को नई खेल सुविधाएं मिलने पर रहेगी।

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