मथुरा में हाथियों की देखभाल के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वाइल्ड लाइफ एसओएस ने बढ़ाई विशेषज्ञता
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा: विश्व हाथी दिवस से पहले वाइल्ड लाइफ एसओएस ने बचाए गए हाथियों की आजीवन देखभाल और कल्याण को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय हाथी देखभाल विशेषज्ञ माइक मैक्लूअर के नेतृत्व वाली मैक्लूअर इंटरनेशनल कंसल्टिंग (MIC) के साथ नया अंतरराष्ट्रीय सहयोग शुरू किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य भारत में बचाए गए हाथियों की देखभाल, पुनर्वास और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता और स्थानीय अनुभव को एक साथ लाना है।
इस सहयोग के माध्यम से वाइल्ड लाइफ एसओएस के भारत में हाथियों के बचाव और पुनर्वास से जुड़े लगभग दो दशकों के अनुभव को हाथियों की देखभाल और केयरगिवर्स के प्रशिक्षण के क्षेत्र में MIC की अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता से जोड़ा गया है। इसके तहत मैक्लूअर इंटरनेशनल कंसल्टिंग की टीम ने हाल ही में मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में एक सप्ताह बिताया।
इस दौरान अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने वाइल्ड लाइफ एसओएस के पशु चिकित्सकों और हाथियों की देखभाल करने वाली टीम के साथ मिलकर कई प्रैक्टिकल ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए। इन प्रशिक्षण सत्रों में हाथियों के स्वास्थ्य, व्यवहार और समग्र जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक तथा साक्ष्य आधारित तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
हाथियों की आजीवन देखभाल पर विशेष जोर
वाइल्ड लाइफ एसओएस के अनुसार, किसी हाथी को बचाना उसकी देखभाल और पुनर्वास की लंबी यात्रा की शुरुआत होती है। इसके बाद उसकी शारीरिक और मानसिक आवश्यकताओं को समझते हुए जीवन भर उचित देखभाल उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होता है। इसी उद्देश्य से संगठन ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ सहयोग को आगे बढ़ाया है।
प्रशिक्षण के दौरान हाथियों की मौजूदा जरूरतों का आकलन करने के साथ-साथ उनकी दैनिक देखभाल को बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की गई। इसके अलावा, देखभाल करने वाली टीमों को ऐसी तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई, जिनके माध्यम से हाथियों के स्वास्थ्य और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
वहीं, लगातार जानकारी साझा करने और आपसी सीखने की प्रक्रिया को भी इस सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। इससे वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जा रहे बेहतर तरीकों को समझने और उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।
पैरों की देखभाल और चलने-फिरने की क्षमता पर ध्यान
क्षमता निर्माण कार्यक्रम के दौरान हाथियों की देखभाल से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया। इनमें पैरों की बेहतर देखभाल और चलने-फिरने की क्षमता को विशेष महत्व दिया गया। बचाए गए कई हाथियों को लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में उनके आराम और गतिशीलता को बेहतर बनाना उनकी जीवन गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसके साथ ही सकारात्मक प्रोत्साहन आधारित प्रशिक्षण पर भी चर्चा की गई। इस तकनीक का उद्देश्य हाथियों के साथ सुरक्षित और सकारात्मक तरीके से संवाद स्थापित करना है। इससे देखभाल करने वाली टीमों को हाथियों के व्यवहार को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिल सकती है।
इसके अलावा, हाथियों के सामाजिक मेलजोल, उनके आसपास के वातावरण को बेहतर बनाने और देखभाल करने वालों के कौशल विकास पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
सामाजिक व्यवहार और बेहतर वातावरण पर जोर
हाथी सामाजिक प्राणी हैं और उनके सामाजिक व्यवहार को समझना उनकी देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए प्रशिक्षण में हाथियों के सामाजिक मेलजोल और उनके बीच सकारात्मक संबंधों को बढ़ावा देने के तरीकों पर भी ध्यान दिया गया।
इसके साथ ही, हाथियों के रहने के वातावरण को अधिक अनुकूल बनाने के उपायों पर चर्चा की गई। बेहतर वातावरण उन्हें प्राकृतिक व्यवहार प्रदर्शित करने और अधिक सहज रहने में सहायता कर सकता है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के अनुसार, ऐसे प्रयास विशेष रूप से उन हाथियों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जो पुरानी चोटों या लंबे समय से चली आ रही शारीरिक समस्याओं के साथ जीवन बिता रहे हैं। उचित देखभाल और नियमित निगरानी के माध्यम से उनके आराम तथा चलने-फिरने की क्षमता को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा सकता है।
मथुरा डीएफओ ने सहयोग को बताया उपयोगी
मथुरा के डीएफओ वेंकट श्रीकर पटेल आईएफएस ने कहा कि बचाए गए हाथियों की भलाई के लिए लगातार सीखने, जिम्मेदारी पूर्ण देखभाल और मजबूत सहयोग की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल जानकारी साझा करने और हाथियों की देखभाल से जुड़ी टीमों की क्षमता बढ़ाने का बेहतर अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने वाइल्ड लाइफ एसओएस के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम मथुरा स्थित केंद्र में रखे गए हाथियों की देखभाल के मानकों को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
वाइल्डलाइफ एसओएस ने बताया बचाव के बाद देखभाल को महत्वपूर्ण
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि हाथी का रेस्क्यू उसकी ठीक होने की यात्रा की शुरुआत है। संगठन की जिम्मेदारी है कि बचाए गए प्रत्येक हाथी को जीवन भर बेहतर देखभाल मिले।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ इस तरह का सहयोग लगातार सीखने और कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने का अवसर देता है। साथ ही, इससे हाथियों के पुनर्वास और कल्याण से जुड़ी जटिल चुनौतियों के लिए नए दृष्टिकोण विकसित करने में भी सहायता मिलती है।
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि बचाए गए प्रत्येक हाथी की अपनी अलग कहानी होती है। उनके अनुसार, हाथियों के बेहतर पुनर्वास के लिए धैर्य, विशेषज्ञता और निरंतर सुधार आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता के साथ संगठन के अनुभव को जोड़कर हाथियों की देखभाल की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ ने साझा किया अनुभव
माइक मैक्लूअर ने कहा कि वाइल्डलाइफ एसओएस ने हाथियों के चुनौतीपूर्ण मामलों से निपटने के अनुभव वाली एक मजबूत टीम तैयार की है। उन्होंने इस सहयोग को ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान का अवसर बताया।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष मिलकर हाथियों की भलाई के लिए नए तरीकों पर काम कर सकते हैं। इससे भविष्य में हाथियों की देखभाल और पुनर्वास के क्षेत्र में बेहतर प्रक्रियाओं को विकसित करने में सहायता मिल सकती है।
उत्तर प्रदेश वन विभाग के साथ मिलकर जारी प्रयास
वाइल्डलाइफ एसओएस में कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर बैजू राज एम.वी. ने कहा कि उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त पहल के तहत संचालित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र को ऐसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रमों से लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि हाथियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने, उनके सामाजिक व्यवहार को समझने और देखभाल से जुड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के बेहतर तरीकों को अपनाने से टीमों को लगातार सीखने का अवसर मिलता है।
उन्होंने यह भी कहा कि संगठन हाथियों की भलाई के क्षेत्र में लगातार बेहतर करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केंद्र में रहने वाले बचाए गए हाथियों को उनके पूरे जीवन के दौरान आवश्यक देखभाल, उचित वातावरण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहें।
विश्व हाथी दिवस से पहले महत्वपूर्ण पहल
12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस से पहले शुरू किया गया यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग हाथियों के संरक्षण और कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस पहल के माध्यम से स्थानीय अनुभव और वैश्विक विशेषज्ञता को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है।
कुल मिलाकर, मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम से हाथियों की शारीरिक देखभाल, व्यवहार, सामाजिक मेलजोल और जीवन गुणवत्ता से जुड़े कई पहलुओं पर काम करने का अवसर मिला है। आगे भी इस प्रकार के ज्ञान-साझाकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रहने से बचाए गए हाथियों की देखभाल के तरीकों को और बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

