संसद में NDA और कांग्रेस का आमना-सामना, प्रियंका गांधी और मुकेश दलाल के बीच भी हुई तीखी बातचीत
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध खुलकर सामने आया। संसद परिसर में NDA और कांग्रेस समेत विपक्षी सांसदों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने के आरोप लगाए। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे सांसद आमने-सामने भी आ गए, जिसके बाद संसद परिसर में राजनीतिक माहौल काफी गरम नजर आया। ताजा घटनाक्रम की रिपोर्टों में भी दोनों पक्षों के समानांतर प्रदर्शन और आमने-सामने आने की जानकारी सामने आई है।
संसद परिसर में आमने-सामने आए NDA और विपक्षी सांसद
मंगलवार को संसद परिसर में NDA सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया। सत्ता पक्ष के सांसदों का आरोप था कि विपक्ष संसद में चर्चा से बच रहा है और लगातार कार्यवाही को बाधित कर रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संबंधित मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे थे।
इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी भी हुई। कुछ समय के लिए स्थिति ऐसी बन गई कि NDA और विपक्षी सांसद एक-दूसरे के सामने आ गए। सुरक्षा कर्मियों को दोनों समूहों के बीच व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क रहना पड़ा।
दरअसल, संसद के मानसून सत्र में पिछले कई दिनों से सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। यही वजह है कि सदन की कार्यवाही बार-बार प्रभावित हो रही है। मंगलवार को भी यही स्थिति देखने को मिली।
प्रियंका गांधी और मुकेश दलाल के बीच हुई बातचीत
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और BJP सांसद मुकेश दलाल का भी आमना-सामना हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रियंका गांधी के संसद परिसर में पहुंचने के दौरान BJP सांसद राहुल गांधी को लेकर नारे लगा रहे थे।
इसी दौरान मुकेश दलाल ने राहुल गांधी को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी झारखंड में छात्र प्रदर्शनकारियों से मिलने क्यों नहीं जा रहे हैं। इस पर प्रियंका गांधी मुस्कुराते हुए उनके पास पहुंचीं और जवाब दिया कि राहुल गांधी वहां जा चुके हैं और छात्र प्रदर्शनकारियों से मुलाकात भी कर चुके हैं। इस बातचीत का वीडियो और घटनाक्रम मंगलवार को चर्चा में रहा।
यह आमना-सामना ऐसे समय हुआ है जब झारखंड में छात्रों से जुड़े प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे को लेकर एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं।
अमित शाह के जवाब की मांग पर अड़ा विपक्ष
कांग्रेस और विपक्षी दलों का मुख्य जोर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जवाब पर है। विपक्ष दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को संसद में उठाना चाहता है।
विपक्ष की मांग है कि गृह मंत्री सदन में इस पूरे मामले पर जवाब दें और यह स्पष्ट किया जाए कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के संबंध में निर्णय किस स्तर पर लिया गया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार से सीधे जवाब की मांग की है।
हालांकि, सरकार की ओर से सोमवार को कहा गया था कि अमित शाह इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी संसद में गतिरोध समाप्त करने के लिए चर्चा का रास्ता अपनाने की बात कही थी, लेकिन इसके लिए विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने की अपील की गई।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
विपक्ष की ओर से राहुल गांधी का कहना है कि केवल गृह मंत्री की राय सुनना इस मुद्दे का पर्याप्त जवाब नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और कथित गोलीबारी के आदेश के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि आखिर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश किसने दिया था। कांग्रेस इसी सवाल को संसद में प्रमुखता से उठाने की कोशिश कर रही है।
वहीं, सरकार का पक्ष है कि वह चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को संसद की कार्यवाही बाधित करने के बजाय सदन में चर्चा का अवसर देना चाहिए। इस तरह दोनों पक्षों के रुख में अंतर बना हुआ है।
लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही प्रभावित
मंगलवार को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में हंगामा देखने को मिला। लगातार नारेबाजी और विरोध के बीच कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। इससे संसद के कामकाज पर एक बार फिर असर पड़ा।
संसद में जारी गतिरोध को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही चलने नहीं दे रहा, जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त जवाब देने से बच रही है।
इससे पहले भी मानसून सत्र के दौरान कई मौकों पर हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी है। अब सत्र के अंतिम दिनों में गतिरोध खत्म कराने की चुनौती सरकार और विपक्ष दोनों के सामने है।
मानसून सत्र के सिर्फ तीन दिन बाकी
20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है। 13 अगस्त को सत्र का आखिरी दिन निर्धारित है। ऐसे में अब केवल तीन दिन का समय बचा है।
महत्वपूर्ण विधायी कामकाज और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए सीमित समय बचने के कारण संसद में गतिरोध को लेकर चिंता बढ़ रही है। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बनती है तो आने वाले दिनों में भी कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका बनी रह सकती है।
संसदीय कार्यवाही को लेकर सत्ता पक्ष लगातार विपक्ष से सहयोग की अपील कर रहा है। वहीं, विपक्ष का कहना है कि जिन मुद्दों पर वह सरकार से जवाब मांग रहा है, उन पर स्पष्ट चर्चा के बिना वह पीछे नहीं हटेगा।
सियासी टकराव के बीच चर्चा का रास्ता कितना संभव?
मंगलवार के घटनाक्रम से साफ है कि संसद के भीतर और बाहर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। एक तरफ NDA सांसद विपक्ष पर संसद में चर्चा से भागने का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस और विपक्षी दल सरकार से छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों पर जवाब मांग रहे हैं।
हालांकि, सरकार की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने का संकेत दिया जा चुका है। ऐसे में अब देखना होगा कि क्या दोनों पक्ष सदन में चर्चा के लिए कोई साझा रास्ता निकाल पाते हैं।
दरअसल, संसद लोकतांत्रिक संवाद और जनहित के मुद्दों पर चर्चा का प्रमुख मंच है। इसलिए मौजूदा गतिरोध के बीच सभी पक्षों की जिम्मेदारी है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सदन की कार्यवाही को अधिकतम समय तक चलाने का प्रयास किया जाए।
फिलहाल, मंगलवार के प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मानसून सत्र के अंतिम दिनों में भी सरकार और विपक्ष के बीच टकराव कम नहीं हुआ है। प्रियंका गांधी और मुकेश दलाल के बीच हुई बातचीत तथा संसद परिसर में दोनों पक्षों के आमने-सामने आने की घटना ने इस राजनीतिक खींचतान को और सुर्खियों में ला दिया है। अब सबकी नजर 13 अगस्त को समाप्त होने वाले मानसून सत्र के बाकी दिनों की कार्यवाही पर है।

