कक्षा 3 से 8 तक AI की पढ़ाई शुरू, CBSE ने लॉन्च किया नया CT&AI पाठ्यक्रम
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: स्कूली शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की बढ़ती भूमिका को देखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए Computational Thinking and Artificial Intelligence (CT&AI) पाठ्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही तकनीक की बुनियादी समझ देने के साथ-साथ उनमें तार्किक सोच, समस्या समाधान और व्यवस्थित तरीके से निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है।
हालांकि, इस पहल को केवल AI की पढ़ाई शुरू करने के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। CBSE के नए पाठ्यक्रम में Computational Thinking यानी कम्प्यूटेशनल थिंकिंग, Artificial Intelligence, Ethics और Unplugged Learning को एक साथ जोड़ा गया है। इस तरह विद्यार्थियों को तकनीक का इस्तेमाल करने के साथ यह समझने का अवसर भी मिलेगा कि AI का जिम्मेदार और नैतिक उपयोग किस प्रकार किया जाना चाहिए।
कक्षा 3 से 8 तक AI शिक्षा की नई शुरुआत
CBSE ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय स्कूली शिक्षा पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCFSE) 2023 के दृष्टिकोण के अनुरूप यह पाठ्यक्रम शुरू किया है। बोर्ड का मानना है कि वर्तमान समय में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI भविष्य के लिए जरूरी बुनियादी कौशल बनते जा रहे हैं।
इसी वजह से विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित रखने के बजाय उनकी सोच को तकनीक और समस्या समाधान से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। नए पाठ्यक्रम के जरिए बच्चों में किसी समस्या को समझने, उसे छोटे हिस्सों में बांटने, उसमें मौजूद पैटर्न को पहचानने और व्यवस्थित तरीके से समाधान तलाशने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।
इस पहल की खास बात यह है कि AI को बच्चों की उम्र और सीखने की क्षमता के अनुरूप समझाने की कोशिश की जाएगी। यानी प्राथमिक और मध्य कक्षाओं के विद्यार्थियों को जटिल तकनीकी अवधारणाओं से सीधे परिचित कराने के बजाय गतिविधियों और रोजमर्रा के उदाहरणों के माध्यम से बुनियादी समझ विकसित की जाएगी।
Computational Thinking क्या है?
Computational Thinking को सरल भाषा में किसी समस्या को व्यवस्थित ढंग से समझने और उसका समाधान निकालने की प्रक्रिया कहा जा सकता है। इसमें समस्या को छोटे हिस्सों में बांटना, जरूरी जानकारी पहचानना, पैटर्न ढूंढना और समाधान के लिए चरण तय करना शामिल है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी विद्यार्थी को किसी बड़ी समस्या का समाधान करना है तो वह उसे एक साथ हल करने के बजाय छोटे-छोटे चरणों में बांट सकता है। इसके बाद प्रत्येक चरण का समाधान तलाशकर पूरी समस्या को हल किया जा सकता है। यही सोच आगे चलकर कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, डेटा साइंस और AI जैसे क्षेत्रों में भी उपयोगी होती है।
CBSE ने इसी कारण गणित को कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की तैयारी में महत्वपूर्ण आधार माना है। साथ ही विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और भाषा सीखने जैसे विषयों में भी CT और AI की अवधारणाओं को जोड़ने पर जोर दिया गया है।
सिर्फ कंप्यूटर की पढ़ाई नहीं होगा नया पाठ्यक्रम
नए पाठ्यक्रम को लेकर यह समझना जरूरी है कि इसका उद्देश्य बच्चों को केवल कंप्यूटर चलाना या AI टूल का इस्तेमाल करना सिखाना नहीं है। इसके पीछे विद्यार्थियों की सोचने और सीखने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने का उद्देश्य भी है।
CBSE ने पाठ्यक्रम में अंतर्विषयक और परियोजना आधारित सीखने को बढ़ावा देने की बात कही है। इससे बच्चों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि तकनीक का संबंध केवल कंप्यूटर विषय से नहीं है, बल्कि गणित, विज्ञान, भाषा और सामाजिक विज्ञान जैसे क्षेत्रों से भी है।
इसके अलावा, रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई देने वाली समस्याओं को उदाहरण बनाकर विद्यार्थियों को AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की अवधारणाएं समझाई जा सकती हैं। इससे सीखने की प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक और रुचिकर बनाने में मदद मिलेगी।
AI के नैतिक इस्तेमाल पर भी रहेगा जोर
AI तकनीक के तेजी से विस्तार के साथ उसके जिम्मेदार इस्तेमाल का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए CBSE ने नए CT&AI पाठ्यक्रम में Ethics and Responsible Use of AI को प्रमुख विषयों में शामिल किया है।
विद्यार्थियों को उम्र के अनुरूप यह समझाने पर जोर दिया जाएगा कि AI का उपयोग जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। इसके साथ ही डेटा, निष्पक्षता और AI से जुड़े नैतिक पहलुओं की बुनियादी समझ विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज विद्यार्थी इंटरनेट, डिजिटल प्लेटफॉर्म और AI आधारित तकनीकों के संपर्क में काफी कम उम्र से आ जाते हैं। ऐसे में उन्हें केवल तकनीक का इस्तेमाल करना सिखाना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ यह समझ भी जरूरी है कि तकनीक का उपयोग किस उद्देश्य से और किस जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
Unplugged Learning भी पाठ्यक्रम का हिस्सा
CBSE ने नए पाठ्यक्रम में Unplugged Learning को भी शामिल किया है। इसका अर्थ है कि कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI से जुड़ी कई बुनियादी अवधारणाओं को बिना कंप्यूटर या डिजिटल डिवाइस के भी गतिविधियों के माध्यम से समझाया जा सकता है।
इससे उन स्कूलों के लिए भी सीखने के अवसर बढ़ सकते हैं जहां तकनीकी संसाधन सीमित हैं। साथ ही छोटे बच्चों को खेल, पहेली, गतिविधि और कक्षा आधारित अभ्यास के जरिए तार्किक सोच विकसित करने में मदद मिल सकती है।
CBSE के अनुसार CT + AI + Ethics + Unplugged Learning इस पाठ्यक्रम के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को तकनीक के साथ-साथ ऐसी सोच विकसित करने में मदद करना है, जो भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी हो।
शिक्षकों की ट्रेनिंग पर भी विशेष ध्यान
किसी भी नए पाठ्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए CBSE ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए Computational Thinking and Understanding AI को अपने प्रशिक्षण का प्रमुख विषय बनाया है।
बोर्ड के अनुसार, शिक्षकों को ऐसी शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराने पर जोर दिया जाएगा, जिनके माध्यम से वे विभिन्न विषयों में CT और AI की अवधारणाओं को शामिल कर सकें। इसके लिए जिला स्तर पर कार्यशालाओं और प्रशिक्षण गतिविधियों का भी प्रावधान किया गया है।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल शिक्षकों को AI की जानकारी देना नहीं है। बल्कि उन्हें ऐसी गतिविधियां तैयार करने में सक्षम बनाना है, जिनके जरिए विद्यार्थी स्वयं सीख सकें, सवाल पूछ सकें और समस्याओं का समाधान खोज सकें।
2030 तक AI-Literate Learners तैयार करने का लक्ष्य
CBSE ने कक्षा 3 से 8 के लिए CT&AI पाठ्यक्रम का उद्देश्य वर्ष 2030 तक AI-literate learners तैयार करने से जोड़ा है। इसका मतलब ऐसे विद्यार्थी तैयार करना है, जिन्हें AI और उससे संबंधित तकनीकों की बुनियादी समझ हो और जो इनके इस्तेमाल को लेकर जिम्मेदार दृष्टिकोण रखते हों।
आज AI का प्रभाव शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, उद्योग, संचार, परिवहन और कई अन्य क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। ऐसे में भविष्य के विद्यार्थियों के लिए तकनीकी बदलावों को समझना और उनके साथ तालमेल बैठाना महत्वपूर्ण होगा।
हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि कक्षा 3 से 8 के प्रत्येक विद्यार्थी को AI विशेषज्ञ या प्रोग्रामर बनाया जाएगा। बल्कि पाठ्यक्रम का मूल उद्देश्य बच्चों में भविष्य के लिए आवश्यक सोच और कौशल विकसित करना है।
NCERT की भी होगी आगे भूमिका
CBSE के आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, कक्षा 3 से 8 के CT&AI पाठ्यक्रम का ढांचा CBSE ने जारी किया है। वहीं कक्षा 9 से 12 के लिए NCERT की ओर से CT&AI मॉड्यूल उपलब्ध कराने की बात कही गई है, जिन्हें 2026-27 में आंतरिक मूल्यांकन के लिए मॉड्यूल के रूप में पढ़ाया जाना है।
इससे स्पष्ट होता है कि स्कूली शिक्षा में AI को अलग-अलग आयु वर्ग के अनुसार धीरे-धीरे शामिल करने की व्यापक योजना पर काम हो रहा है। शुरुआती कक्षाओं में बुनियादी सोच और समझ विकसित करने के बाद आगे की कक्षाओं में AI से जुड़े विषयों को अधिक विस्तार दिया जा सकता है।
विद्यार्थियों को मिलेंगे भविष्य के जरूरी कौशल
नए पाठ्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों में कई ऐसे कौशल विकसित करने का लक्ष्य है, जो आगे की शिक्षा और रोजगार दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इनमें तार्किक सोच, समस्या समाधान, पैटर्न पहचान, रचनात्मक सोच, डेटा को समझने की क्षमता और तकनीक का जिम्मेदार इस्तेमाल प्रमुख हैं।
इसके अलावा, परियोजना आधारित और अंतर्विषयक सीख विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं से जोड़ सकती है। इससे बच्चों में केवल किताबी ज्ञान के बजाय व्यावहारिक सोच विकसित करने में मदद मिलेगी।
शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव
कुल मिलाकर, कक्षा 3 से 8 के लिए CT&AI पाठ्यक्रम की शुरुआत स्कूली शिक्षा में तकनीकी और कौशल आधारित बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल बच्चों को कम उम्र से AI की बुनियादी समझ देने के साथ-साथ कम्प्यूटेशनल थिंकिंग विकसित करने पर केंद्रित है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाठ्यक्रम में AI के नैतिक और जिम्मेदार इस्तेमाल को भी शामिल किया गया है। इससे विद्यार्थियों को तकनीक के अवसरों के साथ उससे जुड़ी जिम्मेदारियों को समझने में मदद मिल सकती है।
आने वाले वर्षों में इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्कूल और शिक्षक इसे कितनी प्रभावी ढंग से लागू करते हैं। यदि CT&AI को गतिविधि आधारित, सरल और विद्यार्थियों के दैनिक जीवन से जोड़कर पढ़ाया जाता है, तो यह बच्चों में भविष्य के लिए जरूरी कौशल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

