जिला मान्यता प्राप्त पत्रकारों की दोबारा नहीं होगी LIU जांच, पढ़िए सूचना निदेशक ने दिए निर्देश
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा: उत्तर प्रदेश के जिला मान्यता प्राप्त पत्रकारों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक विशाल सिंह ने निर्देश दिया है कि जिला मान्यता प्राप्त संवाददाताओं की दोबारा एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) जांच नहीं कराई जाएगी। यह निर्णय उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के साथ आयोजित समन्वय बैठक के दौरान लिया गया।
लखनऊ स्थित सूचना निदेशालय के कांफ्रेंस हॉल में आयोजित इस बैठक में पत्रकारों की विभिन्न समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक विशाल सिंह ने की। वहीं, समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने पत्रकारों से जुड़े मुद्दों को विभाग के समक्ष रखा।
दोबारा LIU जांच का मामला बैठक में उठा
जिला मान्यता प्राप्त संवाददाताओं की दोबारा एलआईयू जांच का मुद्दा बैठक में प्रमुखता से उठाया गया। इससे पहले इस मामले को लेकर कई जिलों के पत्रकारों ने अपनी आपत्ति और शिकायत समिति के समक्ष दर्ज कराई थी।
ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ. कमल कांत उपमन्यु एडवोकेट ने भी इस मामले में उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी से बातचीत कर अपना विरोध पत्र सौंपा था। इसके अलावा अन्य जिलों के पत्रकारों की ओर से भी समिति को इस संबंध में शिकायतें मिली थीं।
समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी और सचिव भारत सिंह द्वारा इस मामले को विभाग के सामने प्रमुखता से रखा गया। मामले को संज्ञान में लेते हुए सूचना निदेशक विशाल सिंह ने जिला मान्यता प्राप्त संवाददाताओं की दोबारा एलआईयू जांच कराने संबंधी आदेश को निरस्त करने की दिशा में शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इस फैसले से उन जिला मान्यता प्राप्त पत्रकारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो दोबारा जांच की प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे थे।
पत्रकारों की समस्याओं पर हुई विस्तार से चर्चा
बैठक केवल एलआईयू जांच तक सीमित नहीं रही। समिति ने पत्रकारों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मांगों को भी सूचना निदेशक के सामने रखा। समिति के सचिव भारत सिंह ने पत्रकारों के हितों से संबंधित मांग पत्र क्रमवार प्रस्तुत किया।
वहीं, अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने प्रत्येक मांग के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए उनके शीघ्र समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के सजग प्रहरी के रूप में लगातार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। ऐसे में उनके सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, आवास और सम्मान से जुड़े विषयों पर समयबद्ध तरीके से निर्णय लिया जाना आवश्यक है।
58 वर्ष की आयु में पेंशन की मांग
समिति की प्रमुख मांगों में पत्रकारों को 58 वर्ष की आयु से पेंशन सुविधा उपलब्ध कराने का मुद्दा शामिल रहा। समिति का कहना है कि लंबे समय तक पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान देने वाले पत्रकारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए पेंशन की व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
इसके साथ ही राज्य और जिला मुख्यालयों के मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई। इसमें प्लॉट, आवास और फ्लैट आवंटन की व्यवस्था किए जाने का प्रस्ताव शामिल है।
समिति ने यह भी मांग रखी कि राज्य और जिला मुख्यालय के मान्यता प्राप्त पत्रकार जब निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु तक पहुंचें तो उनकी मान्यता स्वतः वरिष्ठ एवं स्वतंत्र पत्रकार की श्रेणी में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाए।
मान्यता संबंधी मामलों के त्वरित निस्तारण की मांग
बैठक में पत्रकारों की मान्यता से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए एक अलग मान्यता समिति गठित करने की मांग भी रखी गई। समिति का कहना है कि मान्यता से संबंधित मामलों में समयबद्ध निर्णय होने से पत्रकारों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिल सकती है।
इसके अलावा दारुलशफा स्थित ए-ब्लॉक में फोटोग्राफरों के कार्यालय से संबंधित बकाया राशि के भुगतान का मुद्दा भी उठाया गया। समिति ने इस विषय में आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की।
आयुष्मान कार्ड और कैशलेस चिकित्सा सुविधा पर जोर
पत्रकारों और उनके परिवारों की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं। समिति ने पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराने के लिए विशेष कैंप आयोजित करने की मांग की।
साथ ही पत्रकारों के लिए चिकित्सा उपचार की सुविधा को बेहतर बनाने और कैशलेस कार्ड बनवाने की मांग भी सामने रखी गई। इसके अलावा संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में पत्रकारों के लिए बेहतर चिकित्सकीय व्यवस्था सुनिश्चित करने का मुद्दा भी उठाया गया।
समिति ने पत्रकारों के लिए उपलब्ध चिकित्सा सहायता की सीमा को 25 लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये किए जाने की मांग भी रखी। इस मांग का उद्देश्य पत्रकारों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारी या महंगे उपचार की स्थिति में बेहतर आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना बताया गया।
स्वतंत्र और वरिष्ठ पत्रकारों को भी अवसर देने की मांग
बैठक में स्वतंत्र एवं वरिष्ठ पत्रकारों तथा फोटो जर्नलिस्टों से नियमित रूप से समाचार, आलेख और फोटो सामग्री प्राप्त करने की मांग भी की गई। समिति ने कहा कि ऐसे पत्रकारों की सामग्री को सरकारी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित किए जाने के साथ उन्हें उचित पारिश्रमिक भी दिया जाना चाहिए।
इससे अनुभवी पत्रकारों और फोटो जर्नलिस्टों को अपनी रचनात्मक एवं पत्रकारिता संबंधी सामग्री के लिए उचित मंच और पारिश्रमिक मिल सकेगा।
सभी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद
समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने कहा कि पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, आवास और सम्मान से जुड़े विषयों का समाधान समयबद्ध तरीके से होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सूचना विभाग पत्रकारों की ओर से रखी गई मांगों पर सकारात्मक विचार करेगा और आवश्यक कार्रवाई जल्द शुरू की जाएगी।
वहीं, समिति के सचिव भारत सिंह ने कहा कि समिति की सभी मांगें पत्रकारों के व्यापक हित से जुड़ी हैं। उनका उद्देश्य राज्य और जिला मुख्यालयों के मान्यता प्राप्त पत्रकारों को बेहतर सुविधाएं तथा सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
बैठक में सूचना विभाग के अधिकारियों और समिति के पदाधिकारियों की मौजूदगी में विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। अपर निदेशक अरविन्द कुमार मिश्रा को रखी गई मांगों पर आवश्यक निर्णय लेकर उनके निस्तारण की दिशा में कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
ये पदाधिकारी रहे मौजूद
समन्वय बैठक में अपर निदेशक अरविन्द कुमार मिश्रा, सहायक निदेशक अमित यादव, वित्त नियंत्रक संजय सिंह सहित समिति के उपाध्यक्ष आकाश शेखर शर्मा, अविनाश मिश्रा और राघवेन्द्र त्रिपाठी उपस्थित रहे।
इसके अलावा संयुक्त सचिव विजय कुमार त्रिपाठी और अनिल सैनी, कार्यकारिणी सदस्य रीतेश सिंह, अब्दुल वहीद, रेनू निगम, वेद प्रकाश दीक्षित, राघवेन्द्र प्रताप सिंह, नवेद शिकोह, सत्येंद्र कुमार राय समेत अन्य पदाधिकारी और सदस्य भी बैठक में शामिल हुए।
कुल मिलाकर, जिला मान्यता प्राप्त पत्रकारों की दोबारा LIU जांच नहीं कराने का निर्देश बैठक का प्रमुख निर्णय रहा। इसके साथ ही पत्रकारों की पेंशन, आवास, स्वास्थ्य सुविधा, मान्यता और पारिश्रमिक से संबंधित कई मांगें विभाग के समक्ष रखी गईं। अब पत्रकार संगठनों को इन मांगों पर विभाग की ओर से होने वाली आगामी कार्रवाई का इंतजार है।

