बिसण्डा के नर्मदेश्वर महादेव मंदिर की जमीन पर कब्जे का आरोप, फर्जी ट्रस्ट बनाने की शिकायत
रिपोर्ट- शैलेन्द्र शानू वर्मा
बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के बिसण्डा थाना क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक नर्मदेश्वर महादेव मंदिर की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। मंदिर से जुड़े पैतृक पुजारी परिवार ने कुछ लोगों पर मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश और कथित तौर पर फर्जी ट्रस्ट बनाकर संपत्ति को हड़पने की साजिश का आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित परिवार की ओर से जिलाधिकारी को लिखित शिकायत देकर मामले की जांच कराने और मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अपर जिलाधिकारी ने अतर्रा के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट होगा कि मंदिर की भूमि के संबंध में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और भूमि एवं ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति क्या है।
मंदिर की करीब 10 बीघा जमीन को लेकर विवाद
मामला बिसण्डा क्षेत्र के दूल्हा थोक, गांधी नगर स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता पुष्पा देवी, निवासी दूल्हा थोक गांधी नगर, बिसण्डा ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि मंदिर से संबंधित भूमि पर कुछ लोगों की ओर से कब्जे का प्रयास किया जा रहा है।
शिकायत में मंदिर से संलग्न गाटा संख्या 2348 की कुल भूमि का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार इस गाटा की कुल भूमि करीब 2.829 हेक्टेयर है। आरोप है कि इसके करीब दो-तिहाई हिस्से, यानी लगभग 10 बीघा भूमि को लेकर कथित तौर पर फर्जी ट्रस्ट तैयार कर उसे अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की जा रही है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया परिवार के सदस्यों को जानकारी दिए बिना की जा रही है। साथ ही उन्होंने कुछ स्थानीय लोगों और अन्य व्यक्तियों पर आपसी मिलीभगत का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पैतृक पुजारी परिवार ने बताई मंदिर से पुरानी जुड़ाव की बात
पुष्पा देवी का कहना है कि नर्मदेश्वर महादेव मंदिर उनके परिवार से लंबे समय से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार उनकी मां श्रीमती कोदिया ने जीवनभर मंदिर की सेवा और देखरेख की। मां के निधन के बाद उन्होंने अपने पिता के साथ मंदिर की व्यवस्था और देखभाल की जिम्मेदारी संभाली।
शिकायतकर्ता का कहना है कि मंदिर की पूजा-अर्चना और देखरेख से उनका परिवार लंबे समय से जुड़ा रहा है। ऐसे में मंदिर से संबंधित भूमि पर किसी बाहरी व्यक्ति या संस्था का दावा उनके परिवार के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर की भूमि से जुड़े पुराने राजस्व अभिलेख, ट्रस्ट से संबंधित दस्तावेज और भूमि के स्वामित्व एवं उपयोग की स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
कई लोगों पर मिलीभगत का आरोप
शिकायती पत्र में पुष्पा देवी ने कुछ लोगों के नाम भी दर्ज कराए हैं। इनमें नीलम पत्नी आशीष, आशीष पुत्र अनुसुइया, अनुसुइया पुत्र केदार और पप्पू पुत्र केदार निवासी रमयापुर, थाना पहाड़ी, जनपद चित्रकूट समेत अन्य लोगों के नाम शामिल होने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि संबंधित लोग आपसी मिलीभगत से मंदिर की संपत्ति पर अपना नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर की भूमि को कथित फर्जी ट्रस्ट के माध्यम से अपने नाम या नियंत्रण में लेने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। प्रशासन की ओर से जांच पूरी होने और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किए जाने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
लेखपाल की भूमिका पर भी उठाए सवाल
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बिसण्डा क्षेत्र के लेखपाल विनोद रावत की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया है कि भूमि से संबंधित प्रक्रिया में उनकी मिलीभगत हो सकती है। शिकायतकर्ता का दावा है कि मंदिर परिवार को जानकारी दिए बिना भूमि से जुड़े दस्तावेजों और कथित ट्रस्ट के संबंध में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
इस आरोप की भी प्रशासनिक जांच की जानी है। राजस्व विभाग के अभिलेखों, भूमि की वर्तमान स्थिति और ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई या नहीं।
भू-माफिया की नजर होने का दावा
पुष्पा देवी ने शिकायत में यह भी दावा किया है कि मंदिर की जमीन पर कुछ दबंग और कथित भू-माफिया की नजर है। उनका आरोप है कि संबंधित लोग मंदिर की संपत्ति को बेचने या अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर सकते हैं।
उन्होंने प्रशासन से मंदिर की जमीन की तत्काल सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि जांच पूरी होने तक भूमि की स्थिति में किसी प्रकार का बदलाव न किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने कथित तौर पर फर्जी ट्रस्ट बनाने और मंदिर की संपत्ति पर कब्जे की कोशिश करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
जिलाधिकारी से जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि मंदिर और उससे जुड़ी भूमि के पुराने दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
इसके अलावा उन्होंने कथित रूप से फर्जी ट्रस्ट बनाने में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता ने मंदिर की जमीन को किसी भी तरह के हस्तांतरण या अवैध कब्जे से बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाने की भी मांग की है।
अपर जिलाधिकारी ने एसडीएम को दिए जांच के निर्देश
शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले को संबंधित अधिकारी के पास भेज दिया है। अपर जिलाधिकारी ने अतर्रा एसडीएम को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
अब एसडीएम स्तर से राजस्व अभिलेखों, गाटा संख्या 2348 की भूमि, मंदिर से संबंधित दस्तावेजों और कथित ट्रस्ट के पंजीकरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। इसके साथ ही संबंधित पक्षों से जानकारी लेकर उनके दावों और आपत्तियों को भी दर्ज किया जा सकता है।
प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मंदिर की भूमि का वास्तविक स्वामित्व किसके नाम दर्ज है, भूमि का वर्तमान उपयोग क्या है और कथित ट्रस्ट का गठन नियमों के तहत हुआ है या नहीं।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर की जमीन को लेकर उठे इस विवाद में फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप ही सामने आए हैं। संबंधित पक्षों का पक्ष और जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल प्रशासन ने जांच के निर्देश देकर यह संकेत दिया है कि मंदिर और उससे जुड़ी भूमि के दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में राजस्व अभिलेखों और ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेजों की जांच इस विवाद की दिशा तय कर सकती है।
मंदिर की भूमि से जुड़े मामले में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि जांच के दौरान संपत्ति की स्थिति सुरक्षित रहे और किसी भी पक्ष द्वारा नियमों के विपरीत भूमि का हस्तांतरण या कब्जा न किया जा सके। यदि जांच में शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो प्रशासन रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करेगा।

