अवैध कॉलोनाइजरों पर एमवीडीए का बुलडोजर एक्शन, नोटिस के बाद सीधे ध्वस्तीकरण; 63 कॉलोनियों पर कार्रवाई
रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज
मथुरा। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) ने अवैध कॉलोनियों और अनाधिकृत निर्माण के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। प्राधिकरण की ओर से ऐसे कॉलोनाइजरों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है, जो बिना स्वीकृत नक्शे और लेआउट के कॉलोनियां विकसित कर लोगों को प्लॉट बेचने का काम कर रहे हैं। पिछले करीब 12 से 14 महीनों में एमवीडीए ने 75 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में विकसित की जा रही 63 अनाधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की है।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई का उद्देश्य केवल अवैध निर्माण हटाना नहीं है, बल्कि मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में अनियोजित विकास पर रोक लगाना और आम लोगों को अपनी मेहनत की कमाई गलत जगह निवेश करने से बचाना भी है। खास बात यह है कि वर्ष 2026 में कार्रवाई की रफ्तार पिछले वर्ष की तुलना में काफी बढ़ी है।
2026 में सात महीने में 39 कॉलोनियों पर कार्रवाई
एमवीडीए के सचिव आशीष कुमार सिंह की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच प्राधिकरण ने 24 अनाधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी। इन कॉलोनियों का कुल क्षेत्रफल करीब 33.04 हेक्टेयर था। इन जमीनों की अनुमानित लागत लगभग 164.20 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
इसके बाद वर्ष 2026 में कार्रवाई ने और रफ्तार पकड़ी। महज सात महीने की अवधि में 39 अनाधिकृत कॉलोनियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। इन कॉलोनियों का क्षेत्रफल करीब 41.99 हेक्टेयर बताया गया है, जबकि इनकी अनुमानित भूमि लागत लगभग 209.95 करोड़ रुपये आंकी गई।
इस तरह वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में अब तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में 62.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों से साफ है कि एमवीडीए ने अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान को प्राथमिकता देते हुए कार्रवाई की गति बढ़ाई है।
करीब 373 करोड़ रुपये की जमीन पर कार्रवाई
एमवीडीए की समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब एक वर्ष में प्राधिकरण ने 75 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर विकसित की जा रही अनाधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इन जमीनों की अनुमानित लागत करीब 373.15 करोड़ रुपये बताई गई है।
अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में कार्रवाई की प्रक्रिया में विशेष तेजी लाई गई है। पहले नोटिस जारी होने के बाद मामलों में लंबी प्रक्रिया के चलते ध्वस्तीकरण में समय लग जाता था। अब प्राधिकरण की ओर से विधिक प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत तेजी से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
नोटिस जारी होने के बाद संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया जाता है। इसके बाद नियमानुसार आदेश पारित किया जाता है। यदि निर्माण या कॉलोनी अनाधिकृत पाई जाती है और उसे हटाने का आदेश जारी होता है तो मौके पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है।
नोटिस के बाद मामलों को लंबित रखने पर रोक
एमवीडीए उपाध्यक्ष लक्ष्मी नागप्पन ने अवैध निर्माण और अनाधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की समीक्षा की। उन्होंने अभियंताओं और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्रवाई में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की अनुमति के बिना विकसित की जा रही कॉलोनियों और अनधिकृत निर्माण पर नियमानुसार कार्रवाई में तेजी लाई जाए। साथ ही क्षेत्र में होने वाले नए निर्माण और विकसित की जा रही कॉलोनियों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इसके अलावा अधिकारियों से कहा गया है कि जैसे ही किसी अनाधिकृत निर्माण या अवैध कॉलोनी की जानकारी मिले, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू की जाए। इसका उद्देश्य यह है कि अवैध निर्माण शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके और बाद में बड़े विवाद की स्थिति पैदा न हो।
अवैध कॉलोनियों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश
एमवीडीए उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मथुरा-वृंदावन विकास क्षेत्र में नए निर्माण कार्यों पर लगातार नजर रखी जाए। खासकर उन इलाकों की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया है, जहां तेजी से आवासीय या व्यावसायिक विकास हो रहा है।
दरअसल, शहर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती आबादी के साथ जमीन की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कुछ स्थानों पर बिना आवश्यक अनुमति के कॉलोनियां विकसित किए जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। कई बार लोगों को सस्ते प्लॉट का लालच देकर जमीन बेचने की कोशिश की जाती है।
ऐसी स्थिति में प्राधिकरण का कहना है कि खरीदारों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी जमीन या प्लॉट को खरीदने से पहले यह जांच करना जरूरी है कि संबंधित कॉलोनी का नक्शा और लेआउट सक्षम प्राधिकरण से स्वीकृत है या नहीं।
लोगों को जागरूक करने पर भी जोर
एमवीडीए की ओर से लोगों को अवैध कॉलोनियों में जमीन खरीदने से बचने के लिए जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आम लोग प्लॉट खरीदने से पहले कॉलोनी की वैधता और जरूरी अनुमतियों की जानकारी जरूर प्राप्त करें।
प्राधिकरण के मुताबिक, बिना स्वीकृत लेआउट वाली कॉलोनी में प्लॉट खरीदने पर भविष्य में कई तरह की समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए खरीदारी से पहले संबंधित दस्तावेजों की जांच और प्राधिकरण से आवश्यक जानकारी लेना बेहद महत्वपूर्ण है।
वहीं, प्राधिकरण की कार्रवाई का एक अहम उद्देश्य यह भी है कि लोगों की जीवनभर की कमाई जोखिम में न पड़े। यदि कोई व्यक्ति बिना जांच-पड़ताल के अवैध कॉलोनी में प्लॉट खरीद लेता है तो बाद में निर्माण अनुमति, सड़क, जल निकासी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी दिक्कतें सामने आ सकती हैं।
अनियोजित विकास पर रोक लगाने की तैयारी
मथुरा-वृंदावन क्षेत्र धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे में यहां तेजी से हो रहा शहरी विस्तार नियोजित तरीके से हो, यह प्राधिकरण की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। अनाधिकृत कॉलोनियों के बढ़ने से भविष्य में सड़क, जल निकासी, यातायात और अन्य नागरिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
इसी वजह से एमवीडीए ने अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई को तेज करने का फैसला किया है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माणकर्ताओं के खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।
कार्रवाई के आंकड़े एक नजर में
- अप्रैल से नवंबर 2025 तक 24 अनाधिकृत कॉलोनियों पर कार्रवाई।
- 2025 में कार्रवाई का क्षेत्रफल करीब 33.04 हेक्टेयर।
- 2025 में प्रभावित जमीन की अनुमानित लागत करीब 164.20 करोड़ रुपये।
- 2026 में सात महीनों में 39 कॉलोनियों पर कार्रवाई।
- 2026 में कार्रवाई का क्षेत्रफल करीब 41.99 हेक्टेयर।
- 2026 में संबंधित जमीन की अनुमानित लागत करीब 209.95 करोड़ रुपये।
- करीब 12-14 महीनों में कुल 63 अनाधिकृत कॉलोनियों पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई।
- कुल प्रभावित क्षेत्रफल 75 हेक्टेयर से अधिक।
- संबंधित जमीन की अनुमानित लागत करीब 373.15 करोड़ रुपये।
- 2026 में पिछले वर्ष की तुलना में ध्वस्तीकरण कार्रवाई में 62.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी।
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
एमवीडीए की समीक्षा से स्पष्ट है कि प्राधिकरण अब अवैध कॉलोनियों के मामलों में केवल नोटिस तक सीमित रहने के बजाय नियमानुसार प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर कार्रवाई को अंजाम देने पर जोर दे रहा है। हालांकि, प्रत्येक मामले में विधिक प्रक्रिया और संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्राधिकरण की ओर से लोगों से भी अपील की जा रही है कि जमीन या प्लॉट खरीदने से पहले संबंधित कॉलोनी की स्वीकृति और दस्तावेजों की जांच जरूर करें। वहीं, अवैध तरीके से कॉलोनी विकसित करने वालों पर निगरानी और कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।

