आजमगढ़ में जातिसूचक टिप्पणी और मारपीट का आरोप, कार्रवाई न होने पर एसएसपी से शिकायत

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रिपोर्ट – पित्तेश्वर कुमार 

आजमगढ़: रौनापार थाना क्षेत्र के जमीन चंदापार गांव निवासी अशोक मुसहर ने एक व्यक्ति पर जातिसूचक टिप्पणी करने, गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि घटना के बाद उसने स्थानीय थाने में शिकायत की, लेकिन कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को प्रार्थना पत्र देकर मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, यह घटना सात अगस्त की शाम करीब साढ़े सात बजे मंगरी बाजार में सब्जी की दुकान के पास हुई। अशोक का आरोप है कि वह उस समय सब्जी खरीद रहा था। इसी दौरान मऊ कुतुबपुर निवासी पुष्पेंद्र उर्फ सिंटू राय वहां पहुंचा और खेत पर काम करने के लिए बुलाए जाने के बावजूद नहीं आने के संबंध में उससे पूछताछ करने लगा। अशोक के मुताबिक, उसने अपनी तबीयत खराब होने की बात बताई, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।

सब्जी की दुकान के पास विवाद का आरोप

पीड़ित द्वारा एसएसपी को दिए गए प्रार्थना पत्र के मुताबिक, बातचीत के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। अशोक का कहना है कि उसने गाली देने से मना किया, लेकिन इसके बाद विवाद और बढ़ गया।

आरोप है कि इसी दौरान उसके साथ लात-घूंसों और डंडे से मारपीट की गई। पीड़ित ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि उसके खिलाफ जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि, शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

शोर सुनकर मौके पर पहुंचे लोग

अशोक के अनुसार, विवाद के दौरान शोर सुनकर उसका भाई और आसपास मौजूद कुछ लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। पीड़ित का आरोप है कि इसके बाद संबंधित व्यक्ति वहां से चला गया और जाते समय उसे जान से मारने की धमकी भी दी।

घटना के बाद पीड़ित ने मामले की जानकारी स्थानीय पुलिस को देने की बात कही है। उसका कहना है कि उसने रौनापार थाने में शिकायत देकर घटना के संबंध में कार्रवाई की मांग की, लेकिन उसके अनुसार तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इसके बाद पीड़ित ने चिकित्सकीय जांच भी कराई। शिकायत में बताया गया है कि उसने आजमगढ़ सदर अस्पताल में अपना चिकित्सकीय परीक्षण कराया।

थाने में कार्रवाई न होने का आरोप

पीड़ित का कहना है कि स्थानीय स्तर पर शिकायत देने के बावजूद जब उसे अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली, तो उसने उच्च अधिकारियों से शिकायत करने का निर्णय लिया। इसी क्रम में 10 अगस्त को उसने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया।

एसएसपी को दिए गए प्रार्थना पत्र में अशोक ने घटना का पूरा विवरण देते हुए मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने और आरोपों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

पीड़ित ने अपनी शिकायत में मारपीट, कथित जातिसूचक टिप्पणी और धमकी से संबंधित आरोप लगाए हैं। ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा शिकायत में दिए गए तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट समेत अन्य पहलुओं की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाती है।

पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

मामले में फिलहाल पुलिस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों को अभी आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है। आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस के सामने शिकायत में बताए गए घटनाक्रम, मौके पर मौजूद लोगों, मेडिकल परीक्षण और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा, यदि घटना के संबंध में कोई अन्य प्रमाण या प्रत्यक्षदर्शी उपलब्ध हैं, तो जांच में उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

इस मामले में पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है।

एसएसपी से मुकदमा दर्ज कराने की मांग

अशोक मुसहर ने एसएसपी को दिए प्रार्थना पत्र में मामले की जांच कर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। पीड़ित का कहना है कि वह घटना के बाद से कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है।

शिकायतकर्ता ने स्थानीय पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए अब वरिष्ठ अधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की है। ऐसे में एसएसपी स्तर से शिकायत का संज्ञान लिए जाने के बाद संबंधित थाना पुलिस से घटना के संबंध में रिपोर्ट मांगी जा सकती है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

शिकायत के आधार पर होगी कार्रवाई

कानूनी प्रक्रिया के तहत किसी भी शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच आवश्यक होती है। इसी आधार पर पुलिस घटना से जुड़े लोगों से पूछताछ, मेडिकल रिपोर्ट और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों का परीक्षण कर सकती है।

यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर मामले की दिशा तय होगी।

इस मामले में भी शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस के स्तर से किया जाना बाकी है। इसलिए फिलहाल किसी भी पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

घटना के बाद गांव में चर्चा

रौनापार थाना क्षेत्र के जमीन चंदापार गांव से जुड़ा यह मामला अब एसएसपी तक पहुंचने के बाद चर्चा में है। पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर पुलिस की आगामी कार्रवाई पर लोगों की नजर है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि उसे न्याय दिलाने के लिए मामले में निष्पक्ष जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। वहीं, पुलिस की ओर से अभी तक मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

निष्पक्ष जांच की मांग

पीड़ित पक्ष ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और शिकायत के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत में मारपीट के साथ जातिसूचक टिप्पणी और धमकी के आरोप भी लगाए गए हैं, इसलिए मामले की जांच में घटना से जुड़े सभी पहलुओं को देखा जाना महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल, शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर पुलिस की कार्रवाई का इंतजार है। जांच के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां और आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सकेगा।

कुल मिलाकर, आजमगढ़ के रौनापार थाना क्षेत्र में जातिसूचक टिप्पणी, मारपीट और धमकी के आरोपों से जुड़ा मामला एसएसपी तक पहुंच गया है। पीड़ित ने स्थानीय पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है। अब पुलिस जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

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