प्रयागराज में 20 साल पुराने पार्क कब्जे की फाइल खुली, आजम खान पर लगे आरोपों की SIT करेगी जांच
Digital UP News Desk
प्रयागराज: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान से जुड़ा करीब 20 साल पुराना एक मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। प्रयागराज के दरियाबाद मोहल्ले में पार्क की जमीन और उससे लगी सड़क पर कथित कब्जे के मामले की अब उच्चस्तरीय जांच होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया है।
जांच के दायरे में वर्ष 2006 में हुई कथित कब्जे की घटना के साथ-साथ उस समय की प्रशासनिक भूमिका भी शामिल बताई जा रही है। खास तौर पर यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत मिलने के बाद तत्कालीन अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो इसके पीछे क्या वजह थी।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जिस संपत्ति को लेकर विवाद है, उसकी मौजूदा कीमत करीब 4 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि, जमीन के वास्तविक मूल्य, स्वामित्व और कब्जे से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि SIT की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
तीन सदस्यीय SIT करेगी पूरे मामले की जांच
दरियाबाद के इस पुराने मामले की जांच के लिए गठित SIT में प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, टीम में एडीएम सिटी सत्यम कुमार मिश्र, PDA सचिव विनीत कुमार सिंह और DCP सिटी मनीष शांडिल्य शामिल हैं। जांच टीम पुराने राजस्व रिकॉर्ड, जमीन से जुड़े दस्तावेज, शिकायतों और तत्कालीन प्रशासनिक कार्रवाई की पड़ताल करेगी।
SIT यह भी देख सकती है कि वर्ष 2006 में पार्क की जमीन की स्थिति क्या थी, जमीन किस विभाग या संस्था के रिकॉर्ड में दर्ज थी और उस समय वहां किसी तरह का निर्माण अथवा कब्जा हुआ था या नहीं। इसके अलावा स्थानीय लोगों की शिकायतों और प्रशासनिक स्तर पर लिए गए निर्णयों की भी जांच किए जाने की संभावना है।
इस जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि कथित कब्जे के दौरान किन लोगों की भूमिका रही और जमीन से संबंधित दस्तावेजों में कोई बदलाव हुआ था या नहीं।
2006 में क्या हुआ था?
बताया जा रहा है कि पूरा मामला वर्ष 2006 का है। उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और आजम खान प्रदेश सरकार में नगर विकास मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
आरोप है कि अगस्त 2006 में लगातार तीन दिन सार्वजनिक अवकाश का फायदा उठाकर अतीक अहमद के करीबियों ने दरियाबाद इलाके में पार्क की सरकारी जमीन पर कथित तौर पर कब्जा शुरू किया। आरोपों के मुताबिक, पार्क के साथ लगी सड़क की जमीन भी इस पूरे विवाद का हिस्सा थी।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के जरिए होनी बाकी है। यही वजह है कि SIT के गठन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि जमीन पर कब्जे की शुरुआत कैसे हुई और उस समय प्रशासनिक स्तर पर क्या-क्या कदम उठाए गए थे।
स्थानीय लोगों ने किया था विरोध
मामले में स्थानीय निवासियों की शिकायतों का भी जिक्र सामने आया है। बताया जाता है कि जब पार्क की जमीन पर कथित कब्जे की गतिविधियां शुरू हुईं तो स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की।
आरोप यह भी है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही आजम खान पर तत्कालीन अधिकारियों को कार्रवाई से रोकने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, यह आरोप भी जांच का विषय है और SIT उपलब्ध दस्तावेजों तथा संबंधित लोगों के बयान के आधार पर इसकी पड़ताल करेगी।
यही कारण है कि करीब दो दशक बाद मामले की दोबारा जांच को अहम माना जा रहा है। यदि जांच में पुराने आरोपों से संबंधित ठोस दस्तावेज या अन्य साक्ष्य सामने आते हैं, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की स्थिति तय हो सकती है।
20 साल बाद क्यों खुली पुरानी फाइल?
दरियाबाद पार्क की जमीन का मामला लंबे समय से पुरानी फाइलों में रहा। अब मुख्यमंत्री स्तर पर मामला पहुंचने के बाद प्रशासन ने इसकी नए सिरे से जांच शुरू कराई है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से प्रयागराज में सरकारी और विवादित जमीनों से जुड़े मामलों पर प्रशासन की सक्रियता बढ़ी है। अतीक अहमद और उसके करीबियों से जुड़ी कथित संपत्तियों की जांच और कार्रवाई भी लगातार सुर्खियों में रही है। प्रशासन की ओर से ऐसी जमीनों को कब्जामुक्त कराने और उनका सार्वजनिक उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
इसी व्यापक कार्रवाई के बीच दरियाबाद की पुरानी फाइल का दोबारा खुलना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
SIT किन बिंदुओं पर करेगी पड़ताल?
विशेष जांच दल के सामने कई अहम सवाल होंगे। सबसे पहले यह देखा जाएगा कि वर्ष 2006 में संबंधित जमीन सरकारी रिकॉर्ड में किस रूप में दर्ज थी। इसके बाद जमीन की पैमाइश, राजस्व अभिलेख और मौके की स्थिति के बीच कितना अंतर था, इसकी जांच की जा सकती है।
इसके अलावा SIT यह भी देखेगी कि स्थानीय लोगों की शिकायत कब और किस अधिकारी के पास पहुंची थी। शिकायत के बाद क्या कार्रवाई की गई, कोई रिपोर्ट तैयार हुई या नहीं और संबंधित अधिकारियों ने क्या निर्णय लिया, इन सभी पहलुओं को जांच में शामिल किया जा सकता है।
साथ ही कथित कब्जे से जुड़े लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की भी जांच की जाएगी। यदि किसी स्तर पर सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर या नियमों की अनदेखी के प्रमाण मिलते हैं तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।
आजम खान की मौजूदा स्थिति
आजम खान इस समय रामपुर जेल में बंद हैं। वह उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख नेताओं में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं और रामपुर विधानसभा सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं।
उनके खिलाफ अलग-अलग मामलों में कानूनी कार्रवाई चलती रही है। हाल के वर्षों में जमीन, फर्जी दस्तावेज और अन्य मामलों को लेकर भी उनका नाम चर्चा में रहा है। हालांकि, प्रत्येक मामले में आरोप और न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य अलग-अलग होते हैं। इसलिए दरियाबाद पार्क मामले में भी अंतिम स्थिति SIT की जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
वर्ष 2022 के चुनावी हलफनामे में आजम खान और उनकी पत्नी तंजीन फातिमा की कुल चल-अचल संपत्ति करीब 6.14 करोड़ रुपये बताई गई थी।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
दरियाबाद के पार्क की जमीन से जुड़ा विवाद करीब दो दशक पुराना है। अब SIT के गठन के बाद इस मामले में पुराने दस्तावेज और प्रशासनिक रिकॉर्ड फिर से खंगाले जाएंगे। जांच के दौरान उस समय के अधिकारियों, शिकायतकर्ताओं और जमीन से जुड़े अन्य लोगों से जानकारी लिए जाने की भी संभावना है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि SIT की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वर्ष 2006 में सरकारी जमीन पर वास्तव में क्या हुआ था, कथित कब्जे के पीछे कौन लोग थे और तत्कालीन प्रशासन की भूमिका क्या रही।
इसलिए अभी किसी व्यक्ति को इस मामले में दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी।
प्रयागराज में सरकारी जमीनों से जुड़े पुराने मामलों की जांच के बीच दरियाबाद का यह प्रकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें करीब 20 साल पुरानी घटनाओं के रिकॉर्ड दोबारा सामने आएंगे। अब सबकी नजर SIT की जांच और उसकी रिपोर्ट पर है।

