मायावती की सरकारों से अपील, बेरोजगारी-पेपर लीक पर तुरंत हो कार्रवाई, युवाओं को मिले रोजगार
Digital UP News Desk
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने देश में बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों से प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं को केवल राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय उनके स्थायी समाधान की दिशा में ठोस काम किया जाना चाहिए। मायावती ने सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों पर समयबद्ध और पारदर्शी भर्ती शुरू करने की भी मांग की है।
बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवाल अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा का विषय बन चुके हैं।
सीजेपी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर चला आंदोलन 36 दिनों तक जारी रहा था। आंदोलन के दौरान परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। इसके बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम की राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई और युवाओं से जुड़े मुद्दे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आए।
मायावती ने बेरोजगारी को बताया गंभीर चुनौती
मायावती ने अपने बयान में कहा कि बेरोजगारी केवल युवाओं की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण शिक्षित युवा लंबे समय तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहते हैं। दूसरी ओर, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, परीक्षा संबंधी विवाद और पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी परेशानियों को और बढ़ा देती हैं।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील करते हुए कहा कि युवाओं की वास्तविक चिंताओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए। इसके साथ ही महंगाई, गरीबी, अशिक्षा, कमजोर स्वास्थ्य सुविधाओं, पिछड़ेपन, मजबूरी में पलायन और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी प्रभावी नीतियां लागू करने की आवश्यकता है।
मायावती का कहना है कि सरकारों को केवल घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय रोजगार और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, युवाओं को रोजगार मिलने से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और समाज में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
BSP सरकार के कार्यकाल का किया जिक्र
बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी की सरकार के कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान पुलिस और पंचायती राज विभाग में करीब सवा दो लाख नए सरकारी पद सृजित किए गए थे। साथ ही, उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में भर्ती पर लगी रोक हटाकर बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया था।
मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में सर्वसमाज के लोगों को सरकारी सेवाओं में अवसर देने की कोशिश की गई थी। उन्होंने मौजूदा सरकारों से भी इसी प्रकार सरकारी विभागों में खाली पदों को भरने और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की।
हालांकि, इन आंकड़ों को मायावती के राजनीतिक दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके बयान का मुख्य जोर वर्तमान समय में सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती प्रक्रिया को तेज करने और युवाओं के सामने मौजूद रोजगार संकट को दूर करने पर रहा।
पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मायावती ने कहा कि सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने पेपर लीक और भ्रष्टाचार की शिकायतों को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि परीक्षाओं का आयोजन ऐसी व्यवस्था के तहत होना चाहिए, जिसमें अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर मिल सके।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से सरकारी विभागों में खाली पड़े लाखों पदों को भरने के लिए समयबद्ध भर्ती अभियान चलाने की मांग की। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से लाखों युवाओं की उम्र निकल जाती है और उनकी तैयारी पर भी असर पड़ता है।
सीजेपी आंदोलन के दौरान भी परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे प्रमुख रहे थे। आंदोलन के बाद केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई और 25 जुलाई 2026 को आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई थी। इसी घटनाक्रम के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी सामने आया।
‘हर परिवार को कम से कम एक सरकारी नौकरी’ की बात
मायावती ने सरकारी रोजगार को लेकर एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि यदि प्रत्येक परिवार में कम से कम एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिल जाए तो बड़ी संख्या में परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी का महत्व केवल वेतन तक सीमित नहीं है। इसके साथ परिवार को सामाजिक और आर्थिक स्थिरता भी मिलती है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए नियमित रोजगार परिवार की शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है।
बसपा प्रमुख ने एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों से जुड़े आरक्षण के मुद्दे को भी अपने बयान में शामिल किया। उन्होंने कहा कि इन वर्गों के युवाओं को संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार रोजगार के अवसर मिलना जरूरी है। साथ ही उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
निजीकरण पर भी मायावती ने सरकार को घेरा
मायावती ने राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों में दिए जाने के मुद्दे पर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकारों को लाभ कमाने की व्यापारिक प्रवृत्ति के बजाय संविधान की कल्याणकारी भावना के अनुरूप नीतियों को आगे बढ़ाना चाहिए।
उनका तर्क है कि सरकारी संस्थानों और विभागों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसलिए सरकारी क्षेत्र में खाली पदों को भरने के साथ रोजगार सृजन की दीर्घकालिक नीति तैयार की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के विकास का लाभ तभी व्यापक स्तर पर दिखाई देगा, जब युवाओं को शिक्षा के बाद रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलेंगे। इसके लिए सरकारों को उद्योग, कृषि, सेवा क्षेत्र और सरकारी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करने होंगे।
युवाओं के मुद्दे पर बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
सीजेपी आंदोलन के बाद युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ी है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में बेरोजगारी, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं और सरकारी भर्ती जैसे मुद्दे आने वाले राजनीतिक विमर्श में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मायावती ने अपने बयान में इसी व्यापक संदर्भ में केंद्र और राज्य सरकारों से युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से लेने की अपील की है। उनका कहना है कि बेरोजगारी जैसे मुद्दों का समाधान केवल चुनावी वादों से नहीं, बल्कि स्थायी नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन से संभव है।
संसद में चर्चा और गतिरोध खत्म करने की अपील
बसपा प्रमुख ने संसद के मौजूदा सत्र में जारी गतिरोध का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि छात्र और बेरोजगार युवाओं से जुड़े विषयों पर संसद में पर्याप्त बहस और चर्चा होनी चाहिए।
मायावती ने सरकार और विपक्ष दोनों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने की अपील की। उनका कहना है कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर विस्तृत चर्चा के बाद ही कानून बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं को संसद के भीतर भी गंभीरता से उठाया जाना चाहिए, ताकि परीक्षा व्यवस्था, रोजगार, भर्ती और शिक्षा से जुड़े विषयों पर व्यापक नीति बनाई जा सके।
‘हर हाथ को काम’ पर मायावती का जोर
मायावती ने अपने संदेश में रोजगार को देश की आर्थिक और सामाजिक समस्याओं के समाधान से जोड़ते हुए ‘हर हाथ को काम’ की नीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रोजगार बढ़ने से परिवारों की आय में सुधार होगा और इसके साथ गरीबी, पलायन तथा आर्थिक असुरक्षा जैसी समस्याओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों से बेरोजगारी, भर्ती में देरी, पेपर लीक, भ्रष्टाचार और युवाओं से जुड़े अन्य मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका संदेश स्पष्ट है कि युवाओं के भविष्य को लेकर सरकारों को दीर्घकालिक और पारदर्शी नीति अपनानी चाहिए। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों की राजनीति में रोजगार और युवा मुद्दों की भूमिका कितनी बढ़ती है, यह चुनावी राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा।

