डीपीआईआईटी के 5 बड़े एमओयू, स्टार्टअप्स को डिजिटल पेमेंट, क्लाउड, एआई और ग्लोबल मार्केट का मिलेगा लाभ

3

Digital UP News Desk

नई दिल्ली: भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने देश के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए उद्योग जगत और स्टार्टअप क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख संस्थाओं के साथ कई रणनीतिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इन साझेदारियों में कैशफ्री पेमेंट्स, डार्विन डायनामिक्स, वाल्टर इंडिया, कार्स24 और काउंसिल फॉर स्टार्टअप इंडिया शामिल हैं।

इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को डिजिटल भुगतान, वित्तीय तकनीक, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मोबिलिटी, निवेश, मेंटरशिप और वैश्विक बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाओं से जोड़ना है। इसके साथ ही टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।

सरकार और निजी क्षेत्र की इन साझेदारियों से स्टार्टअप्स को अपने कारोबार को विस्तार देने, नई तकनीक अपनाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।

कैशफ्री पेमेंट्स के साथ डिजिटल भुगतान को बढ़ावा

डीपीआईआईटी ने कैशफ्री पेमेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया है। इसका उद्देश्य डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को डिजिटल भुगतान अवसंरचना, फिनटेक समाधान और क्षमता निर्माण से जुड़ी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है।

इस साझेदारी के तहत पात्र स्टार्टअप्स को सुरक्षित और विस्तार योग्य पेमेंट एवं पेआउट समाधान, पहचान सत्यापन तथा जोखिम प्रबंधन सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। इसके अलावा, उन्हें प्राथमिक ऑनबोर्डिंग सहायता और कुछ व्यावसायिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

इतना ही नहीं, डिजिटल भुगतान, अनुपालन, धोखाधड़ी की रोकथाम, केवाईसी, सीमा-पार लेनदेन और उभरती तकनीकों जैसे विषयों पर संस्थापक कार्यशालाएं और मेंटरिंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही एआई बिल्डाथॉन, हैकाथॉन और ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रमों के जरिए स्टार्टअप्स की तकनीकी और व्यावसायिक क्षमता को मजबूत किया जाएगा।

डार्विन डायनामिक्स से समावेशी उद्यमिता पर जोर

दूसरी महत्वपूर्ण साझेदारी डार्विन डायनामिक्स एलएलपी के साथ की गई है। इसका उद्देश्य भारत में उद्यमिता को अधिक समावेशी बनाना और नवाचार आधारित स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना है।

विशेष रूप से टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, संस्थागत नेटवर्क, बाजार के अवसर और क्षमता निर्माण से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराने की योजना है।

डार्विन डायनामिक्स स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु तकनीक और उन्नत विनिर्माण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए काम करेगा।

इसके अलावा, उद्यमिता बूटकैंप, मेंटर नेटवर्क, निवेशकों से संपर्क, अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच और नीति अनुसंधान जैसे कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। इससे विशेष रूप से युवा उद्यमियों, महिला संस्थापकों, पहली पीढ़ी के उद्यमियों और कम सुविधा वाले क्षेत्रों के नवोन्मेषकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

वाल्टर इंडिया से क्लाउड और तकनीकी संसाधनों तक पहुंच

स्टार्टअप्स की तकनीकी क्षमता मजबूत करने के लिए डीपीआईआईटी ने वाल्टर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ भी समझौता किया है। इस साझेदारी का फोकस क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल अवसंरचना तक स्टार्टअप्स की पहुंच बेहतर करने पर है।

डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त पात्र स्टार्टअप्स को वाल्टर इंडिया के स्टार्टअप कार्यक्रमों के माध्यम से क्लाउड क्रेडिट, प्राथमिकता वाली कीमतों और तकनीकी सहायता का अवसर मिल सकता है।

साथ ही, क्लाउड कंप्यूटिंग, स्टोरेज, डेटाबेस, कुबेरनेट्स, नेटवर्किंग और एप्लिकेशन डिप्लॉयमेंट जैसे विषयों पर प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाएगा। इससे स्टार्टअप्स को अपने डिजिटल उत्पादों और सेवाओं को अधिक प्रभावी ढंग से विकसित करने और बड़े स्तर पर विस्तार करने में सहायता मिल सकती है।

क्लाउड कंपनी की ओर से स्टार्टअप इंडिया और डीपीआईआईटी के कार्यक्रमों में भागीदारी के जरिए स्टार्टअप समुदाय के साथ जुड़ाव बढ़ाने की भी योजना है।

कार्स24 के साथ ऑटो-टेक और एआई पर फोकस

डीपीआईआईटी ने कार्स24 सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के साथ भी रणनीतिक साझेदारी की है। इसका उद्देश्य भारत के मोबिलिटी और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देना है।

इस सहयोग के तहत एआई आधारित नवाचार, संस्थापक विकास, मोबिलिटी और ऑटो-टेक स्किलिंग, निवेश के अवसर और सड़क सुरक्षा से जुड़ी पहलों को समर्थन देने का लक्ष्य रखा गया है।

कार्स24 स्टार्टअप संस्थापकों को संरचित मार्गदर्शन देने के साथ-साथ मोबिलिटी और ऑटो-टेक से जुड़े कौशल कार्यक्रमों को बढ़ावा देगा। इसके अलावा, एआई आधारित तकनीकों को अपनाने और नए स्टार्टअप समाधान विकसित करने के लिए नवाचार चुनौतियां और हैकाथॉन आयोजित किए जा सकते हैं।

इस साझेदारी से मोबिलिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में काम करने वाले उभरते स्टार्टअप्स को निवेश, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ने के अवसर मिलने की उम्मीद है।

काउंसिल फॉर स्टार्टअप इंडिया से निवेश और ग्लोबल स्केलिंग

पांचवीं प्रमुख साझेदारी काउंसिल फॉर स्टार्टअप इंडिया (CSI) के साथ की गई है। इसका उद्देश्य डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को निवेश, रणनीतिक साझेदारी, मेंटरशिप, नेतृत्व विकास और वैश्विक बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना है।

एमओयू के तहत सीएसआई स्टार्टअप्स को निवेश के लिए तैयार करने, कॉरपोरेट सहभागिता बढ़ाने, सीएफओ मैचमेकिंग, वैश्विक बाजार पहुंच और अंतरराष्ट्रीय नवाचार सहयोग जैसे क्षेत्रों में सहायता देगा।

इसके अलावा, संस्थापकों को सुशासन, वित्तीय तैयारी, अनुपालन और अंतरराष्ट्रीय विस्तार के संबंध में मार्गदर्शन देने की योजना है। इससे स्टार्टअप्स, निवेशकों, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग को और मजबूत किया जा सकेगा।

भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगी नई गति

इन पांच समझौतों को एक साथ देखें तो इनका दायरा केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है। डिजिटल भुगतान से लेकर क्लाउड कंप्यूटिंग, एआई, ऑटो-टेक, निवेश और वैश्विक बाजार तक पहुंच—स्टार्टअप्स के विकास के लिए जरूरी कई क्षेत्रों को इन साझेदारियों में शामिल किया गया है।

वहीं, टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने से देश में उद्यमिता के अवसरों का भौगोलिक विस्तार भी हो सकता है। इससे छोटे शहरों के युवाओं और नए उद्यमियों को अपने विचारों को कारोबार में बदलने के लिए बेहतर संसाधन मिल सकते हैं।

इसके अलावा, महिला उद्यमियों और पहली पीढ़ी के संस्थापकों के लिए मेंटरशिप तथा नेटवर्किंग के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। इससे भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में अधिक विविधता और भागीदारी को बढ़ावा मिल सकता है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होंगे स्टार्टअप

आज के समय में किसी स्टार्टअप के लिए केवल अच्छा उत्पाद तैयार करना पर्याप्त नहीं है। उसे तकनीकी अवसंरचना, वित्तीय संसाधन, बाजार, कुशल टीम, नियामकीय समझ और वैश्विक नेटवर्क की भी जरूरत होती है। ऐसे में डीपीआईआईटी की ये साझेदारियां स्टार्टअप्स को एक व्यापक समर्थन तंत्र उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

डीपीआईआईटी के इन पांच एमओयू से भारतीय स्टार्टअप्स को डिजिटल पेमेंट, क्लाउड तकनीक, एआई, मोबिलिटी, निवेश और वैश्विक बाजार तक पहुंच के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। सरकार और उद्योग जगत के बीच इस तरह का सहयोग भारत को नवाचार आधारित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।

You may have missed