ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर तंज: राहुल गांधी की प्रयागराज रैली को लेकर बोले ‘बड़का-छोटका भैया’
Digital UP News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर तीखा राजनीतिक तंज कसा है। राजभर ने राहुल गांधी की प्रयागराज में हुई रैली का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठाए। उन्होंने दोनों नेताओं को ‘बड़का भैया’ और ‘छोटका भैया’ बताते हुए अखिलेश यादव पर राहुल गांधी की रैली में अपेक्षित भीड़ नहीं जुटाने का आरोप लगाया।
ओमप्रकाश राजभर ने रविवार को अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव को निशाने पर लिया। उन्होंने पोस्ट की शुरुआत राहुल गांधी और अखिलेश यादव के रिश्ते को लेकर तंज से की। राजभर ने लिखा कि राहुल गांधी को अपना भाई बताने वाले अखिलेश यादव को भाईचारा निभाना भी चाहिए था। इसी क्रम में उन्होंने प्रयागराज में हुई राहुल गांधी की सभा का जिक्र करते हुए सपा नेतृत्व पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी की प्रयागराज रैली को लेकर राजभर का दावा
ओपी राजभर ने अपने पोस्ट में दावा किया कि राहुल गांधी की प्रयागराज सभा में उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुट सकी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी की सभा के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लंबे समय तक तैयारी की थी और बड़ी संख्या में पोस्टर, बैनर तथा झंडे लगाए गए थे।
हालांकि, रैली में वास्तविक उपस्थिति को लेकर राजभर द्वारा किए गए दावे को उनके राजनीतिक बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। भीड़ का आंकड़ा किसी स्वतंत्र या आधिकारिक स्रोत से पुष्ट होने की स्थिति में ही अंतिम तथ्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
राजभर ने इसी मुद्दे को आधार बनाकर अखिलेश यादव पर राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि अखिलेश यादव अपने समर्थकों को राहुल गांधी की सभा में भेजते तो कांग्रेस नेता की सभा में अधिक भीड़ दिखाई देती और उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा को फायदा होता।
‘बड़का भैया’ और ‘छोटका भैया’ के बहाने गठबंधन पर निशाना
अपने बयान में ओपी राजभर ने राहुल गांधी को ‘बड़का भैया’ और अखिलेश यादव को ‘छोटका भैया’ कहकर संबोधित किया। यह पूरा बयान सपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक रिश्तों पर तंज के रूप में सामने आया है।
राजभर का कहना है कि दोनों दल राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर गठबंधन की राजनीति कर रहे हैं, लेकिन सीटों और राजनीतिक प्रभाव को लेकर दोनों के बीच मतभेद दिखाई देते हैं। उन्होंने अपने बयान में सीट बंटवारे का मुद्दा भी उठाया और दोनों दलों के बीच संभावित सीटों को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चा पर कटाक्ष किया।
दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन पहले भी कई मौकों पर चर्चा का विषय रहा है। चुनावी परिस्थितियों के अनुसार दोनों दलों के बीच सीटों के तालमेल और राजनीतिक रणनीति को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं। ऐसे में राजभर का यह बयान विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर सत्तापक्ष के हमले के रूप में देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव पर सोशल मीडिया के जरिए हमला
ओपी राजभर पिछले कुछ समय से अखिलेश यादव की राजनीति पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। इस बार उन्होंने राहुल गांधी की प्रयागराज रैली को आधार बनाकर सपा प्रमुख पर निशाना साधा। राजभर ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि अखिलेश यादव को राहुल गांधी का सहयोग करना चाहिए था।
उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव राजनीतिक तौर पर राहुल गांधी के साथ गठबंधन की बात तो करते हैं, लेकिन जरूरत के समय अपेक्षित सहयोग नहीं करते। राजभर ने इसे दोनों दलों के बीच राजनीतिक सौदेबाजी से जोड़ते हुए सीटों के बंटवारे पर भी कटाक्ष किया।
हालांकि, अखिलेश यादव की ओर से इस बयान पर तत्काल प्रतिक्रिया सामने आने की स्थिति में उसे अलग से देखा जाना चाहिए। राजनीतिक बयानों के बीच यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी नेता द्वारा लगाए गए आरोप या किए गए दावे स्वतः प्रमाणित तथ्य नहीं माने जाते।
राहुल गांधी की रैली को लेकर क्या कहा राजभर ने?
राजभर ने दावा किया कि प्रयागराज में राहुल गांधी की सभा के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने करीब तीन महीने तक तैयारी की। उन्होंने पोस्ट में बड़ी संख्या में झंडे, बैनर और पोस्टर लगाए जाने का उल्लेख किया। इसके बावजूद उन्होंने रैली में कम भीड़ होने का दावा करते हुए इसे विपक्षी गठबंधन की रणनीति से जोड़ दिया।
राजभर ने अपने बयान में राहुल गांधी की सभा को लेकर खर्च का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि रैली के आयोजन पर बड़ी राशि खर्च की गई। हालांकि, इस खर्च से संबंधित आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इसलिए इसे राजभर के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
उन्होंने इसी के साथ अखिलेश यादव की कार्यशैली पर भी कटाक्ष किया। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव सोशल मीडिया और अपने राजनीतिक दायरे तक सीमित हैं। इसके जरिए उन्होंने सपा प्रमुख की जमीनी सक्रियता पर सवाल उठाने की कोशिश की।
सपा-कांग्रेस गठबंधन पर बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की राजनीति को लेकर समय-समय पर राजनीतिक बयानबाजी होती रही है। दोनों दल विपक्षी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में गठबंधन की मजबूती, सीटों का बंटवारा और चुनावी रणनीति जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहते हैं।
इसी पृष्ठभूमि में ओपी राजभर का ताजा बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजभर सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा हैं और इसलिए उनका अखिलेश यादव पर हमला सीधे तौर पर विपक्षी राजनीति पर राजनीतिक प्रहार के रूप में देखा जा सकता है।
वहीं, सपा और कांग्रेस के समर्थक रैली की सफलता का आकलन अलग-अलग राजनीतिक मानकों के आधार पर कर सकते हैं। किसी भी राजनीतिक सभा की सफलता केवल भीड़ की संख्या से तय नहीं होती। उसमें संगठनात्मक प्रभाव, संदेश की पहुंच, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और राजनीतिक माहौल जैसे कई पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं।
सीट बंटवारे को लेकर भी साधा निशाना
ओपी राजभर ने अपने बयान में दो-दो सौ सीटों के बंटवारे का जिक्र करते हुए सपा और कांग्रेस पर व्यंग्य किया। उनके इस बयान को दोनों दलों के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर राजनीतिक खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राजनीतिक राज्य है और लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनावों में भी यहां सीटों का तालमेल किसी गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसलिए सपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर होने वाली किसी भी बातचीत का राजनीतिक असर व्यापक हो सकता है।
राजभर ने इसी संवेदनशील राजनीतिक मुद्दे को अपने बयान का हिस्सा बनाकर अखिलेश यादव को घेरने की कोशिश की। उनके बयान में जहां राहुल गांधी की प्रयागराज रैली का जिक्र था, वहीं दूसरी ओर सपा-कांग्रेस संबंधों और सीटों के समीकरण पर भी निशाना साधा गया।
आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है बयानबाजी
ओपी राजभर के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और कांग्रेस के गठबंधन को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। यदि विपक्षी दलों की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया आती है, तो राजनीतिक बयानबाजी और आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल राजभर का मुख्य निशाना अखिलेश यादव रहे। उन्होंने राहुल गांधी की प्रयागराज रैली में कथित कम भीड़ को आधार बनाकर सपा प्रमुख पर राजनीतिक सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया और दोनों नेताओं के बीच संबंधों पर व्यंग्य किया।
कुल मिलाकर, ओपी राजभर का ताजा बयान उत्तर प्रदेश की गठबंधन राजनीति में जारी आरोप-प्रत्यारोप की कड़ी का हिस्सा है। उनके ‘बड़का भैया’ और ‘छोटका भैया’ वाले तंज ने सपा-कांग्रेस के राजनीतिक रिश्ते को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि अखिलेश यादव या कांग्रेस की ओर से इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और क्या यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक विवाद का रूप लेता है।

