ऑस्ट्रेलिया पहुंचा मिथिला मखाना, बिहार से पहली बार 18 मीट्रिक टन जीआई-टैग वाली समुद्री खेप निर्यात

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Digital UP News Desk

पटना: बिहार के प्रसिद्ध मिथिला मखाना ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी एपीडा (APEDA) ने पहली बार जीआई-टैग वाले मिथिला मखाना की 18 मीट्रिक टन की वाणिज्यिक समुद्री खेप को बिहार से ऑस्ट्रेलिया भेजने की सुविधा प्रदान की है। यह खेप बिहार के बीआईएडीए औद्योगिक क्षेत्र, बिहटा से रवाना की गई।

इस पहल को बिहार के मखाना किसानों और निर्यात क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दरभंगा जिले के किसानों से सीधे प्राप्त किए गए प्रीमियम गुणवत्ता वाले कच्चे जीआई-टैग वाले मिथिला मखाना को बिहटा में पैक करने के बाद ऑस्ट्रेलिया के लिए भेजा गया।

इससे एक ओर जहां बिहार के प्रमुख कृषि उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर किसानों को निर्यात आधारित बाजारों से जोड़कर बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दिखाई हरी झंडी

मिथिला मखाना की इस पहली समुद्री निर्यात खेप को बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने रवाना किया। इस अवसर पर बिहार सरकार के उद्यान निदेशक, एपीडा के अधिकारी, निर्यातक के प्रतिनिधि, लॉजिस्टिक्स साझेदार और क्षेत्र के प्रगतिशील मखाना उत्पादक मौजूद रहे।

इस दौरान मखाना की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ाने, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और निर्यात के लिए जरूरी गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। साथ ही, बिहार के मखाना उत्पादकों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए आगे भी ऐसे प्रयास जारी रखने की बात कही गई।

किसानों को बाजार दर से करीब 18 प्रतिशत अधिक लाभ

इस निर्यात पहल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में किसानों को मिलने वाला बेहतर मूल्य भी शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस निर्यात श्रृंखला से जुड़े किसानों को प्रचलित बाजार दरों की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक लाभ प्राप्त करने में मदद मिली है।

दरअसल, जब किसानों का उत्पाद सीधे निर्यात आधारित मूल्य श्रृंखला से जुड़ता है, तो उन्हें स्थानीय बाजारों की तुलना में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ती है। इसके अलावा, गुणवत्ता, पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन पर ध्यान देने से कृषि उत्पादों का मूल्य भी बढ़ाया जा सकता है।

इस प्रकार मिथिला मखाना की यह खेप केवल एक निर्यात उपलब्धि नहीं है, बल्कि बिहार के किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

दरभंगा के किसानों से सीधे खरीदा गया मखाना

ऑस्ट्रेलिया भेजी गई इस खेप में शामिल मखाना सीधे दरभंगा जिले के किसानों से प्राप्त किया गया। इसके बाद इसे बिहार के बिहटा स्थित बीआईएडीए औद्योगिक क्षेत्र में पैक किया गया।

इस प्रक्रिया में किसानों से लेकर पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स तक पूरी मूल्य श्रृंखला को निर्यात बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया। इससे स्थानीय किसानों और निर्यातकों के बीच प्रत्यक्ष बाजार संपर्क को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

विशेष रूप से, जीआई टैग वाले उत्पाद की पहचान बनाए रखना अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी विश्वसनीयता और ब्रांड वैल्यू के लिए महत्वपूर्ण है। मिथिला मखाना की भौगोलिक पहचान बिहार के इस पारंपरिक कृषि उत्पाद को अलग पहचान प्रदान करती है।

एनआईएडी ग्रीन ने किया निर्यात

इस समुद्री खेप का निर्यात M/s एनआईएडी ग्रीन द्वारा किया गया। वहीं, लॉजिस्टिक्स सहायता M/s जित्बन सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड ने प्रदान की। यह स्टार्टअप एपीडा के भारती कार्यक्रम के तहत समर्थित है।

भारती का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में निर्यात नवाचार, एग्रीटेक, लचीलापन, उन्नति और इनक्यूबेशन को बढ़ावा देना है। ऐसे में इस निर्यात में स्टार्टअप की लॉजिस्टिक्स भूमिका कृषि उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बिहार की पहचान है मखाना: कृषि मंत्री

इस अवसर पर बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मखाना बिहार की पहचान है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिहार आधारित निर्यातकों की भागीदारी बढ़ने से किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उनके अनुसार, बिहार सरकार उत्पादकों, प्रसंस्करणकर्ताओं और निर्यातकों को सहयोग देकर मखाना की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि मखाना के पारंपरिक प्रसंस्करण से जुड़े फोरी समुदाय को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास जारी रहेंगे। मखाना के प्रसंस्करण में इस समुदाय के पारंपरिक कौशल की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मंत्री ने कहा कि जीआई-टैग वाले मिथिला मखाना की ऑस्ट्रेलिया के लिए पहली समुद्री खेप बिहार के कृषि उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग को दर्शाती है। साथ ही, इससे किसानों और निर्यातकों के लिए नए बाजारों के अवसर भी खुल सकते हैं।

एपीडा की भूमिका से निर्यात को मिला बढ़ावा

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत एपीडा ने बिहार सरकार के कृषि विभाग के सहयोग से इस निर्यात को सुगम बनाया। एपीडा लंबे समय से कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए क्षमता निर्माण, बाजार विकास, निर्यात सुविधा और हितधारकों के बीच समन्वय जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है।

मखाना के मामले में भी एपीडा की ओर से निर्यातकों को बाजार पहुंच और समन्वय संबंधी सहायता उपलब्ध कराई गई। इससे बिहार से ऑस्ट्रेलिया तक मखाना की खेप को समुद्री मार्ग से भेजने की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने में मदद मिली।

इसके परिणामस्वरूप बिहार के मखाना उत्पादकों को अब पारंपरिक बाजारों के अलावा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल रहा है।

देश के मखाना उत्पादन में बिहार की बड़ी हिस्सेदारी

भारत के मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत बताई जाती है। इसलिए देश के मखाना निर्यात को बढ़ाने में बिहार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

मखाना को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से अधिक व्यवस्थित करने के लिए वित्त विधेयक, 2025 के तहत जुलाई 2025 से मखाना के लिए अलग एचएस कोड प्रभावी किया गया। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मखाना और इससे जुड़े उत्पादों की पहचान एवं आंकड़ों को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीका सहित 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को 7,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और मूल्यवर्धित मखाना उत्पादों का निर्यात किया।

वैश्विक बाजार में बढ़ रही भारतीय कृषि उत्पादों की पहुंच

मिथिला मखाना की ऑस्ट्रेलिया के लिए पहली समुद्री खेप भारत के कृषि उत्पादों की वैश्विक मांग में बढ़ोतरी की व्यापक तस्वीर का हिस्सा है। भारतीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने के लिए गुणवत्ता, पैकेजिंग, प्रसंस्करण और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना जरूरी है।

इसी दिशा में एपीडा राज्य सरकारों, निर्यातकों, स्टार्टअप्स, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसान उत्पादक कंपनियों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

आगे भी यदि किसानों को सीधे निर्यात बाजार से जोड़ा जाता है और उन्हें गुणवत्ता एवं मूल्यवर्धन की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है, तो इससे कृषि क्षेत्र में आय के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

किसानों के लिए नए बाजार की उम्मीद

मिथिला मखाना की 18 मीट्रिक टन की यह खेप बिहार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एक स्थानीय और पारंपरिक कृषि उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए स्तर पर पहचान मिलने की संभावना है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्यात श्रृंखला में किसानों की भागीदारी बढ़ने से उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिल सकते हैं। वहीं, निर्यातकों और प्रसंस्करण इकाइयों के लिए भी नए बाजार खुल सकते हैं।

कुल मिलाकर, ऑस्ट्रेलिया के लिए जीआई-टैग वाले मिथिला मखाना की पहली समुद्री खेप बिहार के कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इससे मिथिला मखाना की वैश्विक पहचान मजबूत होने के साथ-साथ बिहार के किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं और निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

आने वाले समय में ऐसे निर्यात बढ़ते हैं तो बिहार के मखाना क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूत स्थान मिल सकता है।

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