सीपीग्राम ने बदली जन शिकायत निवारण की तस्वीर, 15 दिन में हो रहा शिकायतों का समाधान
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: भारत में जन शिकायतों के निवारण की व्यवस्था पिछले एक दशक में तेजी से डिजिटल और नागरिक-केंद्रित हुई है। केंद्रीकृत जन शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली यानी सीपीग्राम (CPGRAMS) ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डिजिटल तकनीक, संस्थागत सुधार और नागरिकों की प्रतिक्रिया को केंद्र में रखते हुए विकसित की गई यह व्यवस्था अब सरकारी सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के समाधान का एक प्रमुख मंच बन चुकी है।
सीपीग्राम के माध्यम से नागरिक केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।
इसके अलावा, शिकायत के निस्तारण की स्थिति की जानकारी भी ऑनलाइन प्राप्त की जा सकती है। इस प्रकार यह प्रणाली शिकायत दर्ज करने से लेकर उसके समाधान तक की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने में मदद कर रही है।
जवाबदेह शासन में सीपीग्राम की अहम भूमिका
जन शिकायतों का समयबद्ध समाधान किसी भी जवाबदेह शासन व्यवस्था की महत्वपूर्ण कसौटी माना जाता है। नागरिकों को जब सरकारी सेवाओं से संबंधित समस्या का सामना करना पड़ता है, तो उनके लिए शिकायत दर्ज कराने और उसका समाधान पाने की सरल व्यवस्था आवश्यक होती है।
इसी उद्देश्य से सीपीग्राम को विकसित किया गया है। यह एक एकीकृत डिजिटल मंच है, जो विभिन्न सरकारी संस्थानों को जन शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया से जोड़ता है। नागरिक यहां सार्वजनिक सेवाओं से संबंधित अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद संबंधित विभाग या मंत्रालय शिकायत पर कार्रवाई करता है।
साथ ही, तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था के कारण शिकायतों की प्रगति पर नजर रखना भी आसान हुआ है। इससे नागरिकों को यह जानने में सुविधा मिलती है कि उनकी शिकायत किस स्तर पर है और उसके समाधान के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है।
एक दशक में शिकायत निवारण व्यवस्था में बड़ा बदलाव
वर्ष 2014 के बाद देश की जन शिकायत निवारण व्यवस्था में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है। पहले शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया काफी हद तक बिखरी हुई और मैन्युअल थी। हालांकि, डिजिटल तकनीक के विस्तार के साथ यह व्यवस्था अब अधिक एकीकृत और प्रौद्योगिकी-संचालित हो गई है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में जहां करीब 3.01 लाख शिकायतों का निस्तारण किया गया था, वहीं वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर लगभग 27 लाख हो गई। यानी एक दशक में हर साल निस्तारित की जाने वाली शिकायतों की संख्या में लगभग नौ गुना वृद्धि हुई।
यह वृद्धि केवल शिकायतों की संख्या बढ़ने का संकेत नहीं है, बल्कि इससे यह भी पता चलता है कि अधिक से अधिक नागरिक डिजिटल माध्यम से अपनी समस्याएं सरकारी तंत्र तक पहुंचा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप शिकायत निवारण प्रणाली का दायरा भी लगातार विस्तृत हुआ है।
शिकायत निवारण अधिकारियों की संख्या में भी वृद्धि
सीपीग्राम व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए शिकायतों पर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का नेटवर्क भी बढ़ाया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2014 में शिकायत निवारण अधिकारियों की संख्या 10,232 थी। वहीं, वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1.11 लाख से अधिक हो गई।
इस विस्तार का सीधा प्रभाव शिकायतों के निस्तारण की गति पर पड़ा है। अधिक अधिकारियों को शिकायत निवारण व्यवस्था से जोड़ने के कारण संबंधित शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाने और उन पर कार्रवाई करने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया गया है।
157 दिन से घटकर 15 दिन हुआ औसत समाधान समय
सीपीग्राम के विकास का एक महत्वपूर्ण परिणाम शिकायतों के समाधान में लगने वाले समय में कमी के रूप में सामने आया है। वर्ष 2014 में केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में शिकायतों के समाधान में औसतन 157 दिन लगते थे। वहीं, वर्ष 2025 में यह औसत समय घटकर केवल 15 दिन रह गया।
इस बदलाव से स्पष्ट है कि डिजिटल तकनीक और बेहतर संस्थागत निगरानी के जरिए शिकायत निवारण की प्रक्रिया को काफी तेज किया गया है। हालांकि, किसी भी शिकायत का वास्तविक समाधान उसके विषय, संबंधित विभाग और मामले की प्रकृति पर निर्भर करता है।
सीपीग्राम पर कैसे दर्ज कर सकते हैं शिकायत?
नागरिक सीपीग्राम पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए एक बार पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसके बाद नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और संबंधित जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, सीपीग्राम की सुविधा मोबाइल माध्यम से भी उपलब्ध है। नागरिक उमंग (UMANG) से जुड़े मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी इस सेवा का उपयोग कर सकते हैं।
डिजिटल पहुंच को व्यापक बनाने के लिए सामान्य सेवा केंद्र यानी सीएससी (CSC) नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देशभर में 2.5 लाख से अधिक ग्राम स्तरीय उद्यमियों (VLE) से जुड़े 5 लाख से अधिक सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिक शिकायत दर्ज कराने में सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
वहीं, डाक के माध्यम से मिलने वाली ऑफलाइन शिकायतों को भी डिजिटल रूप में परिवर्तित करके सीपीग्राम प्रणाली में दर्ज किया जाता है। इससे उन नागरिकों को भी शिकायत निवारण व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलती है, जो सीधे ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल नहीं कर पाते।
डिजिटल नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल
सीपीग्राम अब केवल शिकायत दर्ज करने वाला पोर्टल नहीं रह गया है। पिछले वर्षों में इसे व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित किया गया है। इसमें तकनीक के साथ-साथ नागरिकों की प्रतिक्रिया और संस्थागत निगरानी को भी महत्व दिया गया है।
प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी और डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों का इस्तेमाल शिकायत निवारण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। इससे शिकायतों की प्रकृति को समझने, बार-बार सामने आने वाली समस्याओं की पहचान करने और सरकारी सेवा वितरण में सुधार के अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, नागरिकों से मिलने वाली प्रतिपुष्टि यानी फीडबैक भी महत्वपूर्ण है। शिकायत के समाधान के बाद नागरिकों की प्रतिक्रिया से यह समझने में मदद मिलती है कि समाधान प्रक्रिया कितनी प्रभावी रही।
पारदर्शिता और नागरिक संतुष्टि पर जोर
सीपीग्राम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में पारदर्शिता और जवाबदेही शामिल हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद उसकी स्थिति को डिजिटल माध्यम से देखा जा सकता है। इससे नागरिकों को अपनी शिकायत के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए बार-बार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होती है।
इसके साथ ही, शिकायतों के निस्तारण के समय में आई कमी सरकारी विभागों की कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, नागरिक शिकायत निवारण व्यवस्था की प्रभावशीलता केवल शिकायत बंद होने से नहीं, बल्कि नागरिक को मिले वास्तविक समाधान से भी तय होती है। इसलिए गुणवत्ता और संतुष्टि को लगातार बेहतर बनाना महत्वपूर्ण है।
सुशासन की दिशा में डिजिटल पहल
कुल मिलाकर, सीपीग्राम ने भारत में जन शिकायत निवारण व्यवस्था को पारंपरिक प्रक्रियाओं से निकालकर डिजिटल और एकीकृत मॉडल की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शिकायतों की संख्या में वृद्धि, निवारण अधिकारियों के नेटवर्क का विस्तार और औसत समाधान समय में बड़ी कमी इस परिवर्तन के प्रमुख संकेतक हैं।
आने वाले समय में डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नागरिक फीडबैक के बेहतर इस्तेमाल से इस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इसका उद्देश्य केवल शिकायतों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि शिकायतों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर सरकारी सेवाओं में लगातार सुधार करना भी है।
इस तरह सीपीग्राम नागरिकों और सरकारी तंत्र के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण डिजिटल माध्यम बनकर उभरा है। पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध कार्रवाई पर जोर देकर यह प्रणाली नागरिक-केंद्रित सुशासन को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

