यूपी BJP में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, 6 क्षेत्र और 7 मोर्चों के प्रभारी घोषित, जानें पूरी लिस्ट
Digital UP News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन को और अधिक सक्रिय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने शनिवार को प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों और सात मोर्चों के लिए नए प्रभारियों की घोषणा की। इसके साथ ही पार्टी ने मुख्यालय, मीडिया, विस्तारक योजना और ‘मन की बात’ जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक कार्यों के लिए भी अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है।
भाजपा की ओर से जारी नई जिम्मेदारियों को संगठन के जमीनी ढांचे को मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। खासतौर पर वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय संगठन और विभिन्न मोर्चों की भूमिका अहम होने वाली है। ऐसे में पार्टी ने अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों के बीच संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने के लिए अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी दी है।
छह संगठनात्मक क्षेत्रों की कमान किसे मिली?
भाजपा ने उत्तर प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों के लिए प्रभारियों की घोषणा की है। पार्टी की सूची के अनुसार राम प्रताप सिंह चौहान को पश्चिम क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है। गीता शाक्य को ब्रज क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं शंकर लोधी को कानपुर क्षेत्र और दिलीप पटेल को अवध क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
इसी क्रम में रमेश सिंह को काशी क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि अभिजात मिश्रा को गोरखपुर क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है। पार्टी के इन छह संगठनात्मक क्षेत्रों में अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समीकरण हैं। इसलिए इन प्रभारियों के सामने स्थानीय स्तर पर संगठन को सक्रिय रखने और पार्टी की गतिविधियों को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी।
क्षेत्रवार प्रभारी, पश्चिम क्षेत्र: राम प्रताप सिंह चौहान, ब्रज क्षेत्र: गीता शाक्य, कानपुर क्षेत्र: शंकर लोधी, अवध क्षेत्र: दिलीप पटेल, काशी क्षेत्र: रमेश सिंह, गोरखपुर क्षेत्र: अभिजात मिश्रा।
इस नियुक्ति के बाद इन नेताओं की भूमिका अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन और प्रदेश नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण होगी।
सात मोर्चों के लिए भी नए प्रभारी
क्षेत्रीय प्रभारियों के साथ भाजपा ने सात प्रमुख मोर्चों की जिम्मेदारी भी अलग-अलग नेताओं को सौंपी है। युवा मोर्चा की जिम्मेदारी प्रदेश महामंत्री राजेश चौधरी को दी गई है। पिछड़ा मोर्चा का प्रभारी संजय राय को बनाया गया है।
वहीं अनुसूचित मोर्चा की जिम्मेदारी प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह को मिली है। महिला मोर्चा का प्रभार प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह संभालेंगे। अनुसूचित जनजाति मोर्चा की जिम्मेदारी डॉ. प्रियंका रावत को सौंपी गई है।
इसके अलावा देवेश कोरी को अल्पसंख्यक मोर्चा और शंकर गिरी को किसान मोर्चा का प्रभारी नियुक्त किया गया है। इस तरह पार्टी ने अलग-अलग सामाजिक और संगठनात्मक समूहों तक अपनी गतिविधियों को पहुंचाने के लिए मोर्चा स्तर पर भी जिम्मेदारियां स्पष्ट कर दी हैं।
मोर्चावार प्रभारी, युवा मोर्चा: राजेश चौधरी, पिछड़ा मोर्चा: संजय राय, अनुसूचित मोर्चा: डॉ. धर्मेंद्र सिंह, महिला मोर्चा: कामेश्वर सिंह, अनुसूचित जनजाति मोर्चा: डॉ. प्रियंका रावत, अल्पसंख्यक मोर्चा: देवेश कोरी, किसान मोर्चा: शंकर गिरी।
मुख्यालय की जिम्मेदारी गोविंद नारायण शुक्ला को
भाजपा ने संगठन के मुख्यालय से जुड़े कामकाज को भी नई जिम्मेदारी दी है। एमएलसी और पूर्व प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला को मुख्यालय प्रभारी बनाया गया है।
मुख्यालय प्रभारी की भूमिका संगठन की विभिन्न गतिविधियों में समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व, संगठनात्मक पदाधिकारियों और अलग-अलग इकाइयों के बीच सूचनाओं और कार्यक्रमों का बेहतर तालमेल बनाए रखना इस जिम्मेदारी का प्रमुख हिस्सा होगा।
इस नियुक्ति के जरिए पार्टी ने प्रदेश मुख्यालय से संबंधित संगठनात्मक गतिविधियों के लिए भी जिम्मेदारी तय कर दी है।
मीडिया और ‘मन की बात’ के लिए भी जिम्मेदारियां
भाजपा ने मीडिया से जुड़े काम के लिए भी नई जिम्मेदारी तय की है। पार्टी की सूची के अनुसार प्रदेश मंत्री यतेंद्र शर्मा को मीडिया प्रभारी बनाया गया है। मीडिया प्रभारी के तौर पर उनकी भूमिका पार्टी के कार्यक्रमों और नीतियों को मीडिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण होगी।
इसके अलावा प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रज बहादुर को विस्तारक योजना का संयोजक बनाया गया है। वहीं प्रदेश उपाध्यक्ष अर्चना मिश्रा को ‘मन की बात’ का संयोजक नियुक्त किया गया है। प्रदेश मंत्री राहुल वाल्मीकि को ‘मन की बात’ का सह-संयोजक बनाया गया है।
इस तरह भाजपा ने संगठन के नियमित कार्यक्रमों और जनसंपर्क से जुड़े अभियानों के लिए भी जिम्मेदारियां तय कर दी हैं।
2027 के चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने की तैयारी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना सभी राजनीतिक दलों के लिए अहम रहता है। भाजपा ने भी इसी दिशा में अपनी गतिविधियों को तेज किया है। छह क्षेत्रों और सात मोर्चों के लिए प्रभारी नियुक्त किए जाने से पार्टी के क्षेत्रीय और सामाजिक नेटवर्क को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की कोशिश दिखाई देती है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में प्रदेश स्तर के फैसलों को बूथ और स्थानीय स्तर तक पहुंचाने के लिए क्षेत्रीय संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसी तरह युवा, किसान, महिला, पिछड़ा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक मोर्चे पार्टी को अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी गतिविधियां संचालित करने में मदद करते हैं।
इसलिए नए प्रभारियों के सामने केवल संगठनात्मक बैठकों तक सीमित रहने के बजाय अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और कार्यक्रमों को सक्रिय बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी।
युवा और सामाजिक मोर्चों पर खास जोर
भाजपा की नई नियुक्तियों में विभिन्न सामाजिक समूहों से जुड़े मोर्चों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। युवा मोर्चा के जरिए पार्टी युवाओं के बीच संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ा सकती है। वहीं किसान मोर्चा के जरिए कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर संपर्क मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी।
इसी प्रकार महिला मोर्चा के माध्यम से महिलाओं से संबंधित कार्यक्रमों और जनसंपर्क गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सकता है। पिछड़ा और अनुसूचित मोर्चा भी पार्टी के सामाजिक संपर्क अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, इन नियुक्तियों का वास्तविक प्रभाव आने वाले महीनों में पार्टी की गतिविधियों और जमीनी संगठन की सक्रियता से ही स्पष्ट होगा।
संगठन और जनसंपर्क पर बढ़ेगा फोकस
भाजपा की ओर से क्षेत्रीय और मोर्चा प्रभारियों की घोषणा ऐसे समय की गई है, जब पार्टी उत्तर प्रदेश में लगातार संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर रही है। नई जिम्मेदारियां मिलने के बाद संबंधित नेता अपने क्षेत्रों में संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और आगामी कार्यक्रमों को लेकर काम शुरू करेंगे।
इसके साथ ही पार्टी की कोशिश प्रदेश स्तर पर तय कार्यक्रमों को क्षेत्र और जिला स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने की होगी। क्षेत्रीय प्रभारियों के लिए स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों को समझना और प्रदेश नेतृत्व की रणनीति के साथ उनका तालमेल बैठाना महत्वपूर्ण रहेगा।
‘हर घर तिरंगा’ अभियान पर भी पार्टी का फोकस
नई संगठनात्मक नियुक्तियों के साथ भाजपा ने 11 से 15 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलाने की भी तैयारी की है। पार्टी के अनुसार इस अभियान में युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जाएगा। शैक्षणिक संस्थानों में गोष्ठियों और अन्य गतिविधियों के जरिए युवाओं से संपर्क बढ़ाने की योजना है।
इस अभियान को संगठनात्मक स्तर पर नई जिम्मेदारियां संभालने वाले नेताओं के लिए भी शुरुआती गतिविधियों में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, संबंधित क्षेत्रों में अभियान का स्वरूप पार्टी के स्थानीय कार्यक्रमों के अनुसार तय होगा।
नई जिम्मेदारियों से संगठन को कितनी मजबूती मिलेगी?
भाजपा की नई सूची से यह स्पष्ट है कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय संगठन और मोर्चों के कामकाज को लेकर जिम्मेदारियां स्पष्ट कर दी हैं। अब इन नेताओं के सामने अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय रखने और पार्टी कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू करने की चुनौती होगी।
खास तौर पर 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए बूथ स्तर तक संगठन की सक्रियता, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और विभिन्न सामाजिक समूहों तक पहुंच महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा प्रदेश नेतृत्व के निर्देशों को स्थानीय स्तर पर लागू करना भी नए प्रभारियों की अहम जिम्मेदारी रहेगी।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश भाजपा की ओर से छह क्षेत्र और सात मोर्चों के प्रभारियों की घोषणा संगठन को चुनावी दृष्टि से सक्रिय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही मुख्यालय, मीडिया, विस्तारक योजना और ‘मन की बात’ जैसे कार्यों के लिए भी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। अब देखना होगा कि नई टीम आने वाले महीनों में संगठनात्मक गतिविधियों को किस तरह गति देती है और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में इसका कितना असर दिखाई देता है।

