संभल डाकघरों में 1.40 करोड़ का गबन, सहायक पोस्ट मास्टर गिरफ्तार, बचत योजनाओं का पैसा ड्रीम 11 मे डुबोया

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Digital UP News Desk 

संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में डाकघरों से जुड़ा कथित वित्तीय अनियमितता का एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, बहजोई, चंदौसी और संभल के डाकघरों में खाताधारकों की बचत योजनाओं में जमा रकम में कथित हेराफेरी कर करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये का गबन किया गया। इस मामले में पुलिस ने डाक विभाग के सहायक पोस्ट मास्टर दीपक कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में आरोप है कि आरोपी ने सेविंग अकाउंट, एफडी और अन्य बचत योजनाओं से जुड़ी धनराशि को कथित तौर पर अवैध तरीके से निकाला। इसके बाद इस रकम का इस्तेमाल ऑनलाइन फैंटेसी गेमिंग और सट्टेबाजी में किए जाने का दावा भी पुलिस की ओर से किया गया है। हालांकि, इन सभी आरोपों की विस्तृत जांच अभी जारी है और मामले के सभी पहलुओं को जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट रूप से सामने लाया जा सकेगा।

खाताधारकों की शिकायत से सामने आया मामला

बताया जा रहा है कि मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब कुछ खाताधारकों ने अपने डाकघर खातों में जमा रकम का मिलान किया। खातों में अपेक्षित राशि नहीं मिलने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों के सामने शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और कथित वित्तीय अनियमितताओं की परतें सामने आने लगीं।

पुलिस के मुताबिक, बहजोई डाकघर से जुड़े मामले में अब तक सात खाताधारकों की ओर से एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने दस्तावेजों, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की।

जांच के दौरान कथित तौर पर खाताधारकों की रकम के लेनदेन में अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद पुलिस ने आरोपी सहायक पोस्ट मास्टर दीपक कुमार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।

1.40 करोड़ रुपये के गबन का आरोप

पुलिस का आरोप है कि दीपक कुमार ने अलग-अलग स्थानों पर तैनाती के दौरान खाताधारकों की बचत योजनाओं से जुड़ी रकम में कथित हेराफेरी की। पुलिस के अनुसार, बहजोई, चंदौसी और संभल डाकघरों में सेविंग अकाउंट, एफडी और अन्य बचत योजनाओं से संबंधित धनराशि में अनियमितता की बात सामने आई है।

प्रारंभिक जांच में कथित तौर पर करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये की रकम प्रभावित होने की बात सामने आई है। हालांकि, पुलिस अभी पूरे मामले की जांच कर रही है। इसलिए अंतिम रूप से कितनी रकम का गबन हुआ और कितने खाताधारक इससे प्रभावित हुए, इसका पूरा आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

इस बीच, पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि मामले में केवल एक व्यक्ति की भूमिका थी या फिर अन्य लोग भी इस कथित वित्तीय अनियमितता में शामिल थे।

ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में पैसा लगाने का दावा

पुलिस ने जांच के आधार पर यह दावा भी किया है कि कथित तौर पर निकाली गई रकम का एक बड़ा हिस्सा ऑनलाइन फैंटेसी गेमिंग और सट्टेबाजी में लगाया गया। पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि खातों से रकम कब निकाली गई, किन माध्यमों से ट्रांसफर हुई और उसका इस्तेमाल कहां किया गया। इसके साथ ही डिजिटल लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

यदि जांच में ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं, तो पुलिस उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल इन पहलुओं की जांच जारी है।

सात खाताधारकों ने दर्ज कराई एफआईआर

बहजोई डाकघर से जुड़े इस मामले में अब तक सात खाताधारकों की ओर से एफआईआर दर्ज कराए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायतकर्ताओं ने अपने खातों में जमा रकम से संबंधित कथित गड़बड़ी की जानकारी पुलिस को दी थी।

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उपलब्ध दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू की। इसके बाद आरोपी की भूमिका को लेकर पूछताछ की गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

हालांकि, सात शिकायतों के आधार पर सामने आए मामले को ही अंतिम संख्या नहीं माना जा रहा है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं और खाताधारक इस कथित वित्तीय अनियमितता से प्रभावित तो नहीं हुए हैं।

अन्य खाताधारकों और डाकघरों की भी जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब पुलिस की जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि प्रभावित खाताधारकों की वास्तविक संख्या कितनी है। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या केवल बहजोई डाकघर तक ही कथित अनियमितता सीमित थी या चंदौसी और संभल में तैनाती के दौरान भी इसी तरह के लेनदेन हुए।

इसके अलावा पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। दस्तावेजों, खातों और लेनदेन के रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर रकम निकालने की प्रक्रिया किस तरह हुई।

यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच

मामले की जांच में बैंकिंग रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पुलिस आरोपी के बैंक खातों से जुड़े लेनदेन की पड़ताल कर रही है। इसके साथ ही डिजिटल माध्यम से किए गए संभावित भुगतान और ट्रांसफर की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

जांच के दौरान यह देखा जा रहा है कि खाताधारकों के खातों से कथित तौर पर रकम कब निकाली गई और उसके बाद वह राशि किन खातों या डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंची। इस प्रक्रिया से पुलिस को कथित वित्तीय लेनदेन की पूरी कड़ी समझने में मदद मिल सकती है।

वहीं, डाकघर के रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों का मिलान भी जांच का अहम हिस्सा है। इससे कथित अनियमितताओं की अवधि और वास्तविक वित्तीय नुकसान का आकलन किया जा सकेगा।

पुलिस ने आरोपी को जेल भेजा

संभल पुलिस के अनुसार, शिकायतों और प्रारंभिक जांच के आधार पर सहायक पोस्ट मास्टर दीपक कुमार को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के अनुसार, मामले में दर्ज शिकायतों और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी और वित्तीय अनियमितता से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाया जाएगा।

खाताधारकों के बीच बढ़ी चिंता

डाकघर की बचत योजनाओं में आमतौर पर लोग अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रखने के उद्देश्य से निवेश करते हैं। ऐसे में खातों से रकम में कथित गड़बड़ी की खबर सामने आने के बाद संबंधित खाताधारकों के बीच चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

अब खाताधारकों की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद वास्तविक नुकसान कितना सामने आता है और प्रभावित लोगों की रकम को लेकर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच में कितने खाताधारक प्रभावित पाए जाते हैं।

जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल संभल डाकघर का यह मामला जांच के चरण में है। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि अन्य संभावित आरोपियों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल जारी है।

कुल मिलाकर, करीब 1.40 करोड़ रुपये के कथित गबन का यह मामला डाकघर की बचत योजनाओं और खाताधारकों की रकम से जुड़ा होने के कारण गंभीर है। हालांकि, अभी पुलिस की जांच पूरी नहीं हुई है। इसलिए कथित गबन की अंतिम राशि, प्रभावित खाताधारकों की संख्या और अन्य आरोपियों की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

फिलहाल पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन, डाकघर के दस्तावेजों और शिकायतों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी तथ्य सामने आने की संभावना है।

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