पिता की इच्छा पूरी करने कंधों पर उठाई विशेष कांवड़, चार बेटों की सेवा-भावना बनी मिसाल
रिपोर्ट- नन्द कुमार
एटाः श्रावण मास की पावन कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश के एटा जनपद में एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला जिसने श्रद्धालुओं, राहगीरों और प्रशासनिक अधिकारियों सहित सभी का मन जीत लिया। जहां एक ओर लाखों शिवभक्त भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए उत्साह और श्रद्धा के साथ कांवड़ यात्रा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आगरा जनपद के एत्मादपुर क्षेत्र के गांव मदरा (डा. नगला सबल) निवासी वृद्ध गोदन सिंह के चार पुत्रों ने अपने पिता की वर्षों पुरानी इच्छा को पूरा करने के लिए ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है।
चारों पुत्रों ने अपने वृद्ध पिता को विशेष रूप से तैयार की गई कांवड़ में बैठाकर शिवधाम तक ले जाने का संकल्प लिया। यह दृश्य भारतीय संस्कृति में माता-पिता के प्रति सम्मान, सेवा और समर्पण की उस परंपरा को जीवंत करता है, जिसे आज भी समाज में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।
विशेष कांवड़ में बैठाकर पूरी की पिता की मनोकामना
श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक करने की इच्छा लंबे समय से गोदन सिंह के मन में थी। हालांकि बढ़ती उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण उनके लिए पैदल कांवड़ यात्रा करना संभव नहीं था। ऐसे में उनके चारों पुत्र—जयप्रकाश, किशन, टिंकू और बंटी—ने अपने पिता की इस इच्छा को अधूरा नहीं रहने दिया।
उन्होंने एक विशेष कांवड़ तैयार करवाई, जिसमें गोदन सिंह आराम से बैठ सकें। इसके बाद चारों भाई बारी-बारी से उस कांवड़ को अपने कंधों पर उठाकर शिव मंदिर की ओर रवाना हुए। इस दौरान परिवार की श्रद्धा, सेवा-भाव और आपसी समर्पण देखने योग्य था।
रास्ते में अधिकारियों की नजर पड़ी तो रुक गया काफिला
इसी बीच रतीभानपुर से भैसूली होते हुए जलेसर मार्ग पर भ्रमण के दौरान जिलाधिकारी अरविन्द सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इला मारन की नजर इस विशेष कांवड़ पर पड़ी। वृद्ध गोदन सिंह को कांवड़ में बैठा देखकर दोनों अधिकारी कुछ क्षणों के लिए रुके और पूरे परिवार से मुलाकात की।
इसके बाद अधिकारियों ने चारों भाइयों से बातचीत की और उनके इस सेवा-भाव की खुलकर सराहना की। प्रशासनिक अधिकारियों ने न केवल उनका उत्साहवर्धन किया बल्कि उनकी सुरक्षित एवं सफल यात्रा के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
डीएम बोले—आज के दौर में ऐसा समर्पण दुर्लभ
जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में माता-पिता के प्रति इस प्रकार का समर्पण बहुत कम देखने को मिलता है। उन्होंने चारों भाइयों को “आधुनिक युग का श्रवण कुमार” बताते हुए कहा कि माता-पिता की सेवा करना ही वास्तविक अर्थों में ईश्वर की सेवा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव परिवार और संस्कारों पर आधारित रही है। यदि प्रत्येक संतान अपने माता-पिता के प्रति इसी प्रकार सम्मान और सेवा का भाव रखे तो समाज और अधिक मजबूत तथा संस्कारित बन सकता है।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं केवल एक परिवार की कहानी नहीं होतीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले प्रेरक उदाहरण बन जाती हैं।
एसएसपी डॉ. इला मारन ने की संस्कारों की सराहना
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इला मारन ने भी चारों भाइयों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह केवल कांवड़ यात्रा नहीं बल्कि भारतीय पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार चारों भाइयों ने अपने पिता की इच्छा को सर्वोपरि मानते हुए उन्हें अपने कंधों पर बैठाकर यात्रा कराने का निर्णय लिया, वह नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक संदेश है। उन्होंने परिवार की मंगलमय और सुरक्षित यात्रा की कामना भी की।
श्रद्धालुओं और राहगीरों ने भी की जमकर सराहना
जैसे-जैसे यह विशेष कांवड़ यात्रा आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे इसे देखने वालों की संख्या बढ़ती गई। रास्ते में मौजूद श्रद्धालु और राहगीर इस भावुक दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते दिखाई दिए।
कई लोगों ने चारों भाइयों के इस कार्य को भारतीय संस्कृति की पहचान बताया। वहीं कुछ श्रद्धालुओं ने कहा कि आज के समय में जब अक्सर परिवारों में दूरियां बढ़ने की बातें सुनने को मिलती हैं, ऐसे उदाहरण समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
भारतीय संस्कृति में माता-पिता की सेवा का विशेष महत्व
भारतीय परंपरा में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है। धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में भी माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताया गया है। श्रवण कुमार की कथा सदियों से समाज को यही संदेश देती रही है कि माता-पिता की इच्छा और सम्मान संतान का सर्वोच्च कर्तव्य है।
एटा में सामने आया यह दृश्य उसी परंपरा को आधुनिक समय में जीवंत करता हुआ दिखाई दिया। चारों भाइयों ने यह साबित कर दिया कि यदि संकल्प और श्रद्धा हो तो किसी भी परिस्थिति में माता-पिता की इच्छा पूरी की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर भी मिल रही सराहना
इस अनूठी कांवड़ यात्रा की चर्चा स्थानीय लोगों के बीच ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी तेजी से हो रही है। लोग चारों भाइयों की सेवा-भावना की प्रशंसा करते हुए इसे भारतीय संस्कारों का उत्कृष्ट उदाहरण बता रहे हैं। कई लोगों ने इसे श्रावण मास की सबसे प्रेरणादायक तस्वीरों में से एक बताया।
समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश
यह घटना केवल एक धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, संस्कार, सेवा और सम्मान का ऐसा संदेश देती है जिसे हर पीढ़ी अपनाना चाहेगी। आज जब व्यस्त जीवनशैली के कारण परिवारों में समय की कमी महसूस की जाती है, तब चारों भाइयों का यह समर्पण समाज को यह याद दिलाता है कि माता-पिता की खुशी से बढ़कर कोई दूसरी उपलब्धि नहीं होती।
श्रावण मास में भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ माता-पिता की सेवा का यह अद्भुत उदाहरण लोगों के दिलों में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। चारों भाइयों ने यह साबित कर दिया कि सच्ची भक्ति केवल मंदिरों तक सीमित नहीं होती, बल्कि अपने माता-पिता की सेवा और सम्मान में भी ईश्वर का साक्षात रूप देखा जा सकता है।

