बांदा: सर्जन डॉ. अदिति श्रीवास्तव पर मरीज की मौत के मामले में मुकदमा दर्ज, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

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रिपोर्ट- पंकज त्रिपाठी

बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक मरीज की ऑपरेशन के बाद इलाज के दौरान हुई मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण में सर्जन डॉ. अदिति श्रीवास्तव और अस्पताल के कुछ अज्ञात स्टाफ के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। शिकायतकर्ता परिजनों ने आरोप लगाया है कि मरीज का उपचार लापरवाही से किया गया, ऑपरेशन के नाम पर बड़ी धनराशि वसूली गई तथा बाद में विरोध करने पर उन्हें धमकाया भी गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

परिजनों के अनुसार, मरीज को पेट संबंधी समस्या के इलाज के लिए डॉ. अदिति श्रीवास्तव के निजी अस्पताल निखिलम सर्जरी सेंटर में भर्ती कराया गया था। उनका आरोप है कि ऑपरेशन कराने के लिए करीब एक लाख रुपये लिए गए। हालांकि, ऑपरेशन के बाद मरीज की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

इसके बाद मृतक के परिजनों ने पूरे मामले में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की। उनका कहना है कि यदि समय पर सही इलाज मिलता तो मरीज की जान बचाई जा सकती थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इलाज के दौरान डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन ने सही जानकारी साझा नहीं की और बाद में सवाल उठाने पर उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया।

कई आरोपों के आधार पर दर्ज हुई एफआईआर

पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर डॉ. अदिति श्रीवास्तव तथा अस्पताल के अज्ञात स्टाफ के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एफआईआर में गैर इरादतन हत्याआपराधिक धमकी तथा अन्य संबंधित धाराएं शामिल की गई हैं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जांच अधिकारियों के अनुसार, सभी दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड, ऑपरेशन से संबंधित विवरण तथा संबंधित पक्षों के बयान जुटाए जा रहे हैं। इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिला अस्पताल में भी हैं तैनात

जानकारी के अनुसार, डॉ. अदिति श्रीवास्तव की तैनाती जिला अस्पताल में भी है। इसी बीच शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि सरकारी अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पताल भेजे जाने का एक नेटवर्क संचालित किया जाता है। परिजनों का दावा है कि कुछ लोग जिला अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए प्रेरित करते हैं।

हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इन दावों की सत्यता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पहले भी लग चुके हैं आरोप

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि डॉ. अदिति श्रीवास्तव पर पूर्व में भी जिला अस्पताल में इलाज के दौरान धन वसूली से जुड़े आरोप लगाए जा चुके हैं। हालांकि, इन मामलों में क्या कार्रवाई हुई और क्या आरोप सिद्ध हुए, इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

ऐसे में वर्तमान मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली और निजी अस्पतालों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित विभागीय कार्रवाई भी संभव है।

पुलिस कर रही है जांच

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान मेडिकल दस्तावेजों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट (यदि उपलब्ध हो), उपचार संबंधी रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन, संबंधित डॉक्टर, स्टाफ और शिकायतकर्ता पक्ष के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

अधिकारियों ने कहा है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या कानूनी उल्लंघन सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

यह मामला सामने आने के बाद जिले में सरकारी और निजी स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों और उनके परिजनों का विश्वास बनाए रखने के लिए उपचार प्रक्रिया में पारदर्शिता, स्पष्ट जानकारी और चिकित्सा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है।

साथ ही, यदि किसी मरीज या उसके परिजनों को उपचार में लापरवाही का संदेह हो तो वे संबंधित स्वास्थ्य विभाग, पुलिस अथवा सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकते हैं, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

फिलहाल इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। परिजनों ने डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। इसलिए मामले से जुड़े सभी पक्षों के दावों का परीक्षण जांच के आधार पर किया जाएगा। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के बाद ही इस पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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