कानपुर जच्चा-बच्चा अस्पताल में आयोजित किया गया फायर सेफ्टी प्रशिक्षण, नर्सिंग स्टाफ ने सीखे अग्नि सुरक्षा और बचाव के उपाय

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रिपोर्ट – सर्वेश शर्मा 

कानपुर: अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के उद्देश्य से कानपुर के जच्चा-बच्चा अस्पताल में व्यापक फायर सेफ्टी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ, स्वास्थ्यकर्मियों तथा अन्य कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति में बचाव के उपाय, प्राथमिक प्रतिक्रिया और अग्निशमन उपकरणों के सही उपयोग की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का आयोजन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. अनीता गौतम के नेतृत्व में किया गया।

यह प्रशिक्षण ऐसे समय आयोजित किया गया है, जब हाल ही में लखनऊ में हुई अग्निकांड की घटना के बाद शासन ने अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य सार्वजनिक भवनों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। इसी क्रम में स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा मानकों के पालन और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

अग्नि सुरक्षा को लेकर बढ़ी सतर्कता

हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में अस्पतालों और सार्वजनिक भवनों में आग लगने की घटनाओं ने अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। इसी कारण शासन ने सभी सरकारी एवं निजी संस्थानों में फायर सेफ्टी सिस्टम, अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकासी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं।

इसी दिशा में कानपुर के जच्चा-बच्चा अस्पताल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल उपकरणों का प्रदर्शन करना नहीं था, बल्कि कर्मचारियों को व्यावहारिक रूप से प्रशिक्षित करना भी था, ताकि किसी भी आपात स्थिति में वे बिना घबराए त्वरित और सही निर्णय ले सकें।

विशेषज्ञों ने बताए आग से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय

प्रशिक्षण कार्यक्रम में फायर स्टेशन से आए प्रशिक्षित अधिकारियों ने अस्पताल कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार की आग, उसके कारणों और नियंत्रण के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि आग लगने की स्थिति में सबसे पहले घबराने के बजाय शांत रहना चाहिए और निर्धारित आपातकालीन प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। साथ ही यह भी समझाया गया कि किस प्रकार अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) का सही उपयोग किया जाता है और किन परिस्थितियों में कौन-सा उपकरण अधिक प्रभावी होता है।

प्रशिक्षकों ने अस्पताल के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण करते हुए कर्मचारियों को आपातकालीन निकास मार्ग, सुरक्षा उपकरणों की स्थिति तथा मरीजों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी समझाई।

व्यावहारिक प्रशिक्षण पर रहा विशेष जोर

कार्यक्रम के दौरान केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि कर्मचारियों को फायर एक्सटिंग्विशर चलाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी कराया गया।

नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों ने स्वयं अग्निशमन उपकरणों का उपयोग कर अभ्यास किया। इससे उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में उपकरणों के संचालन का अनुभव प्राप्त हुआ।

अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर सही प्रतिक्रिया देने से बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और जनहानि की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है।

मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : डॉ. अनीता गौतम

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनीता गौतम ने कहा कि अस्पताल में भर्ती मरीजों, नवजात शिशुओं और उनके परिजनों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए प्रत्येक कर्मचारी का प्रशिक्षित होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए केवल आधुनिक उपकरण पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उनका सही उपयोग जानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल प्रशासन भविष्य में भी समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा, ताकि सभी कर्मचारी सुरक्षा मानकों के प्रति पूरी तरह जागरूक रहें।

अस्पतालों में फायर सेफ्टी क्यों है आवश्यक

अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अस्पताल ऐसे स्थान होते हैं जहां बड़ी संख्या में मरीज, नवजात शिशु, बुजुर्ग और गंभीर रोगी मौजूद रहते हैं। इनमें कई मरीज स्वयं चलने-फिरने में सक्षम नहीं होते। इसलिए आग लगने जैसी स्थिति में कर्मचारियों की तत्परता और प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

इसके अलावा अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर, विद्युत उपकरण और अन्य संवेदनशील मशीनें भी होती हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सुरक्षा संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता

कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि फायर सेफ्टी केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संस्थान की कार्य संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा होनी चाहिए।

यदि सभी कर्मचारी नियमित रूप से मॉक ड्रिल, प्रशिक्षण और सुरक्षा अभ्यास में भाग लें, तो किसी भी आपातकालीन स्थिति में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।

इसी कारण शासन द्वारा समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विशेष बल दिया जा रहा है।

अस्पताल स्टाफ ने लिया सुरक्षा का संकल्प

प्रशिक्षण के अंत में नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों ने मरीजों की सुरक्षा के प्रति पूरी जिम्मेदारी निभाने तथा अग्नि सुरक्षा से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों का पालन करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में हेड सिस्टर प्रीता रोस्टन सहित अस्पताल के सभी विभागों के कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित होने चाहिए।

जागरूकता से ही दुर्घटनाओं पर लगेगी रोक

अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आग लगने की घटनाओं को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन उचित प्रशिक्षण, समय पर प्रतिक्रिया और सुरक्षा उपकरणों के सही उपयोग से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इसीलिए अस्पतालों सहित सभी सार्वजनिक संस्थानों में नियमित फायर सेफ्टी प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल को अनिवार्य बनाए जाने पर जोर दिया जा रहा है।

कानपुर के जच्चा-बच्चा अस्पताल में आयोजित फायर सेफ्टी प्रशिक्षण कार्यक्रम मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। शासन के निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में कर्मचारियों को अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन बचाव और फायर उपकरणों के प्रभावी उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के नियमित प्रशिक्षण से न केवल कर्मचारियों की दक्षता बढ़ेगी, बल्कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था भी अधिक मजबूत होगी।

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