लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे हाइवे को पंखा लगाकर सूखा जा रहा है, सपा मुखिया अखिलेश यादव ने वीडियो शेयर कर कसा तंज
Digital UP News Desk
उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को लेकर इन दिनों गुणवत्ता और निर्माण मानकों पर चर्चा तेज हो गई है। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में सड़क धंसने और सतह खिसकने की घटनाएं सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। इस बीच मरम्मत कार्य के दौरान सड़क को जल्दी सुखाने के लिए पंखों का उपयोग किए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसने बहस को और बढ़ा दिया।
इन घटनाओं के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर निशाना साधा, वहीं दूसरी ओर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हुए मामले की तकनीकी जांच भी तेज कर दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद बढ़ी चर्चा
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में मरम्मत के दौरान सड़क की सतह को पंखों की मदद से सुखाते हुए दिखाया गया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर वीडियो साझा करते हुए टिप्पणी की कि यदि किसी एक्सप्रेसवे को उद्घाटन के कुछ ही सप्ताह बाद बार-बार मरम्मत की आवश्यकता पड़ रही है, तो यह निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए लिखा कि यह “भाजपाई तरक्की की नई हवा” है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नई सड़क को कुछ ही दिनों में कई बार दुरुस्त करना पड़ रहा है, तो उस पर तेज गति से यात्रा करने को लेकर लोगों का विश्वास कैसे मजबूत होगा।
उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आईं शिकायतें
करीब 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को किया गया था। लगभग 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का उद्देश्य लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा समय कम करना तथा दोनों शहरों के बीच बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है।
हालांकि उद्घाटन के लगभग 20 दिनों के भीतर कुछ स्थानों पर सड़क धंसने और सतह में स्लिपेज जैसी शिकायतें सामने आईं। इसके बाद संबंधित विभागों ने मौके का निरीक्षण किया और मरम्मत कार्य शुरू कराया।
एनएचएआई ने शुरू की कड़ी कार्रवाई
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्राधिकरण ने कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की प्रक्रिया प्रारंभ की है। इसके साथ ही परियोजना से जुड़े कई अधिकारियों के विरुद्ध भी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
जानकारी के अनुसार परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को उनके मूल विभाग भेज दिया गया। पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को आरोपपत्र जारी किया गया। प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक गुप्ता, रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार तथा स्वतंत्र अभियंता टीम के प्रमुख सुरेंद्र कुमार को दो वर्षों के लिए एनएचएआई और सड़क परिवहन मंत्रालय की परियोजनाओं से प्रतिबंधित किया गया।
एनएचएआई का कहना है कि गुणवत्ता से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय की जाएगी।
सड़क धंसने की वजह क्या बताई गई?
एनएचएआई के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, लगातार हुई बारिश के कारण कुछ स्थानों पर सड़क के नीचे की मिट्टी तक पानी पहुंच गया, जिससे कुछ हिस्सों में स्लिपेज की स्थिति बनी।
हालांकि प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक आकलन है। वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही होगी।
आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञ करेंगे जांच
एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता का वैज्ञानिक मूल्यांकन कराने के लिए आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों की समिति गठित की गई है।
यह समिति प्रभावित हिस्सों का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके अलावा पूरे एक्सप्रेसवे की जांच लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक से कराई जा रही है।
इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से सड़क की सतह, समतलता और निर्माण गुणवत्ता का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा, जिससे संभावित तकनीकी कमियों की पहचान हो सके।
मरम्मत का खर्च निर्माण कंपनी उठाएगी
एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित हिस्सों की मरम्मत का लगभग 3 करोड़ रुपये का खर्च निर्माण कंपनी ही वहन करेगी।
प्राधिकरण के अनुसार, जब तक मरम्मत कार्य पूरी तरह संतोषजनक तरीके से पूरा नहीं हो जाता, तब तक यात्रियों से टोल शुल्क नहीं लिया जाएगा।
इसके अलावा मरम्मत अवधि के दौरान टोल से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई भी संबंधित निर्माण एजेंसी से ही कराई जाएगी।
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
एनएचएआई का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
मरम्मत कार्य के दौरान संबंधित हिस्सों की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि यातायात सुरक्षित रूप से संचालित हो सके।
साथ ही तकनीकी रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि अतिरिक्त सुधार की आवश्यकता होगी, तो उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
एक्सप्रेसवे परियोजना का महत्व
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की प्रमुख सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इसके माध्यम से दोनों शहरों के बीच यात्रा समय कम होने, औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी महत्वपूर्ण परियोजना में गुणवत्ता मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है, ताकि लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ सड़क अवसंरचना उपलब्ध कराई जा सके।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
जहां विपक्ष निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठा रहा है, वहीं संबंधित विभागों का कहना है कि सभी शिकायतों की गंभीरता से जांच की जा रही है और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच आम लोगों की अपेक्षा है कि परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें सुरक्षित और बेहतर यात्रा सुविधा मिल सके।
आईआईटी खड़गपुर
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से जुड़ी हालिया घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। सड़क धंसने की शिकायतों के बाद एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों से तकनीकी जांच कराई जा रही है।
मरम्मत कार्य पूरा होने तक टोल वसूली स्थगित रखने और खर्च निर्माण कंपनी से वसूलने का निर्णय भी लिया गया है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और सुधारात्मक कदम तय किए जाएंगे।

