कानपुर में इंदिरा गांधी प्रतिमा स्थल पर कथित अतिक्रमण को लेकर कांग्रेस का विरोध, मेट्रो प्रबंधन से कार्रवाई की मांग

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रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी

कानपुरः कानपुर में भारत रत्न एवं देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की प्रतिमा स्थल के मुख्य द्वार पर कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए मेट्रो परियोजना प्रबंधन से तत्काल हस्तक्षेप करने और विवादित निर्माण को हटाने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि प्रतिमा स्थल के प्रवेश द्वार पर सुनियोजित तरीके से अतिक्रमण किया गया है, जिससे न केवल ऐतिहासिक स्थल की गरिमा प्रभावित हो रही है बल्कि सार्वजनिक भावनाओं को भी ठेस पहुंच रही है।

मेट्रो प्रबंधन से मिलने पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल नरोना चौराहा, माल रोड स्थित मेट्रो परियोजना कार्यालय पहुंचा। प्रतिनिधियों का कहना है कि उनका उद्देश्य परियोजना प्रबंधक से मुलाकात कर प्रतिमा स्थल के मुख्य द्वार पर किए गए कथित अवैध निर्माण के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराना था। हालांकि, कांग्रेस नेताओं के अनुसार जब वे कार्यालय पहुंचे तो परियोजना प्रबंधक वहां मौजूद नहीं थे।

प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि परियोजना प्रबंधक उनसे मिलने के बजाय कार्यालय से चले गए। कांग्रेस नेताओं ने इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा कि यदि सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर अधिकारी संवाद से बचेंगे तो इससे लोगों में असंतोष बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच संवाद होना आवश्यक है।

सुरक्षा अधिकारी के माध्यम से हुई बातचीत

कांग्रेस नेताओं के अनुसार काफी प्रयास और विरोध दर्ज कराने के बाद परियोजना प्रबंधक से उनके सुरक्षा अधिकारी राकेश तिवारी के मोबाइल फोन के माध्यम से बातचीत कराई गई। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कथित अतिक्रमण का मुद्दा विस्तार से उठाया।

बातचीत के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इंदिरा गांधी प्रतिमा स्थल के साथ पहले भी छेड़छाड़ की जा चुकी है। उनका आरोप है कि मेट्रो परियोजना के दौरान प्रतिमा स्थल के मूल स्वरूप को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया था। अब प्रतिमा स्थल के मुख्य द्वार पर कथित अवैध निर्माण कर उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित किया जा रहा है।

कांग्रेस ने जताई नाराजगी

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों से जुड़े स्मारकों का सम्मान बनाए रखना सभी सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रतिमा स्थल की गरिमा को प्रभावित करने वाली किसी भी कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि कथित अतिक्रमण को शीघ्र नहीं हटाया गया तो कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन और अन्य शांतिपूर्ण आंदोलनों के माध्यम से अपना विरोध जारी रखेगी। साथ ही उन्होंने प्रशासन से भी मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।

परियोजना प्रबंधक ने दिया आश्वासन

मोबाइल पर हुई बातचीत के दौरान परियोजना प्रबंधक ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी। कांग्रेस नेताओं के अनुसार परियोजना प्रबंधक ने यह भी कहा कि संबंधित निर्माण के संबंध में बातचीत कर उचित निर्णय लिया जाएगा तथा आवश्यकता होने पर उसे दूसरी जगह स्थानांतरित कराने का प्रयास किया जाएगा।

हालांकि कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे। उनका कहना है कि जब तक प्रतिमा स्थल के मुख्य द्वार से कथित अतिक्रमण नहीं हटाया जाता, तब तक इस विषय पर उनकी निगरानी बनी रहेगी।

प्रतिमा स्थल की गरिमा बनाए रखने की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि नरोना चौराहा स्थित इंदिरा गांधी प्रतिमा स्थल शहर की एक महत्वपूर्ण पहचान है। यहां समय-समय पर राष्ट्रीय पर्वों और विभिन्न अवसरों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में यदि प्रवेश द्वार पर किसी प्रकार का अवैध निर्माण होता है तो इससे न केवल आने-जाने में असुविधा होगी बल्कि स्मारक की गरिमा भी प्रभावित होगी।

कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से मांग की कि सार्वजनिक स्मारकों और राष्ट्रीय महत्व के स्थलों के आसपास किसी भी प्रकार के निर्माण से पहले सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यदि कहीं अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे तत्काल हटाया जाए।

लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी विकास परियोजना का विरोध करना नहीं है। यदि मेट्रो परियोजना के कार्यों के दौरान किसी ऐतिहासिक स्थल या सार्वजनिक स्मारक की गरिमा प्रभावित होती है तो संबंधित एजेंसी को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि प्रशासन और मेट्रो प्रबंधन इस मामले में समय रहते उचित कार्रवाई नहीं करते हैं तो कांग्रेस संगठन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से धरना, प्रदर्शन तथा जनजागरण अभियान चलाएगा।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे ये नेता

मेट्रो परियोजना कार्यालय पहुंचे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व पार्षद अनिल बाजपेई, पूर्व प्रदेश कांग्रेस सचिव सुनील राठौर, पीसीसी सदस्य ग्रीन बाबू सोनकर, पीसीसी सदस्य अनूप श्रीवास्तव, लायर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रमाकांत मिश्रा, दिनेश दीक्षित, विनय पाण्डेय, भूपिंदर सिंह भदौरिया, प्रमोद गुप्ता, दीप पाण्डेय, चुन्नू निगम, बंटू बाजपेई और मुन्ना खां सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।

आगे क्या?

फिलहाल कांग्रेस ने मेट्रो प्रबंधन को अपनी आपत्ति से अवगत करा दिया है और परियोजना प्रबंधक की ओर से मामले पर कार्रवाई का आश्वासन भी मिलने की बात कही है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि संबंधित एजेंसियां इस मामले में क्या निर्णय लेती हैं। यदि कथित अतिक्रमण को लेकर प्रशासन या मेट्रो प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक कार्रवाई होती है, तो उससे पूरे विवाद की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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