यूपी में खनन विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: सचिव स्तर के IAS होंगे खनन निदेशक, नई सेवा नियमावली को मंजूरी
Digital UP News Desk
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के खनन विभाग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रशासनिक रूप से प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने समूह ‘क’ सेवा नियमावली को मंजूरी प्रदान करते हुए विभाग की प्रशासनिक संरचना में व्यापक बदलाव का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद अब खनन निदेशक का पद सचिव स्तर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी के पास होगा। साथ ही, विभाग में अतिरिक्त निदेशक और अपर निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित की गई है।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से विभागीय कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और अवैध खनन पर नियंत्रण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, खान अधिकारी के पद पर नियुक्ति के लिए केवल शैक्षिक योग्यता ही नहीं बल्कि संबंधित क्षेत्र का कार्य अनुभव भी अनिवार्य कर दिया गया है। इससे विभाग में विशेषज्ञता और दक्षता दोनों का समावेश होगा।
सचिव स्तर के IAS अधिकारी होंगे खनन निदेशक
नई नियमावली के तहत अब उत्तर प्रदेश के खनन निदेशालय का नेतृत्व सचिव स्तर के IAS अधिकारी के हाथों में रहेगा। अब तक इस पद पर नियुक्ति की व्यवस्था अलग थी, लेकिन सरकार ने प्रशासनिक दक्षता और बेहतर निगरानी को ध्यान में रखते हुए इसे उच्च प्रशासनिक स्तर से जोड़ने का निर्णय लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सचिव स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में विभाग की नीतियों के क्रियान्वयन में गति आएगी। साथ ही, विभाग और शासन के बीच समन्वय भी अधिक मजबूत होगा। इससे खनन से जुड़े मामलों में त्वरित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
अतिरिक्त निदेशक के पद पर होगी विशेष सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति
नई व्यवस्था के अनुसार खनन निदेशालय में विशेष सचिव स्तर के IAS अधिकारी अथवा वरिष्ठ PCS संवर्ग के अधिकारी को अतिरिक्त निदेशक के रूप में नियुक्त किया जाएगा। यह पद विभागीय कार्यों के समन्वय, प्रशासनिक नियंत्रण तथा विभिन्न परियोजनाओं की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभाग के प्रत्येक स्तर पर अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी उपलब्ध रहें, जिससे योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।
अपर निदेशक पद पर भी प्रशासनिक अधिकारी होंगे तैनात
कैबिनेट के फैसले के अनुसार अब अपर निदेशक के पद पर भी प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। इससे विभाग की प्रशासनिक संरचना अधिक व्यवस्थित होगी और निर्णय प्रक्रिया में स्पष्टता आएगी।
विशेष रूप से खनन जैसे संवेदनशील विभाग में प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारियों की नियुक्ति से नीतिगत निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
समूह ‘क’ सेवा नियमावली को मिली मंजूरी
राज्य मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत समूह ‘क’ सेवा नियमावली विभागीय नियुक्तियों, पदोन्नति, सेवा शर्तों तथा प्रशासनिक जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करेगी।
नई नियमावली के लागू होने के बाद अधिकारियों की नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। इसके अलावा, विभाग में जवाबदेही तय करने और कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने में भी यह नियमावली सहायक साबित होगी।
सरकार का कहना है कि बदलते प्रशासनिक और तकनीकी परिवेश को देखते हुए सेवा नियमों का अद्यतन आवश्यक था। इसी उद्देश्य से नई नियमावली तैयार की गई है।
खान अधिकारी बनने के लिए अनुभव भी होगा जरूरी
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब खान अधिकारी के पद पर नियुक्ति के लिए केवल निर्धारित शैक्षिक योग्यता पर्याप्त नहीं होगी। अभ्यर्थियों को संबंधित क्षेत्र में कार्य अनुभव भी प्रस्तुत करना होगा।
इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभाग में ऐसे अधिकारी नियुक्त हों जिन्हें खनन, भूविज्ञान, खनिज प्रबंधन तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं की व्यावहारिक समझ हो। इससे विभागीय कार्यों की गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार केवल शैक्षणिक योग्यता के बजाय व्यावहारिक अनुभव को महत्व देने से नीति निर्माण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
पारदर्शिता और जवाबदेही को मिलेगी मजबूती
खनन विभाग लंबे समय से राजस्व संग्रह, खनिज संसाधनों के प्रबंधन तथा अवैध खनन की रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़ा रहा है। ऐसे में विभाग की प्रशासनिक संरचना को मजबूत करना समय की आवश्यकता माना जा रहा था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभाग में निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक संगठित होगी। इसके साथ ही प्रशासनिक जवाबदेही तय करने में भी आसानी होगी। उम्मीद की जा रही है कि इससे विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी नीतियों का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।
शासन और विभाग के बीच बेहतर होगा समन्वय
चूंकि अब शीर्ष पदों पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तैनात होंगे, इसलिए शासन और खनन निदेशालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की संभावना है। इससे नीतिगत निर्णयों को लागू करने में देरी कम होगी और विभिन्न परियोजनाओं की नियमित समीक्षा भी संभव हो सकेगी।
इसके अतिरिक्त, खनिज संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरणीय मानकों के पालन तथा राजस्व वृद्धि से जुड़े मामलों में भी विभाग अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।
भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय केवल पदों में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभागीय प्रशासन को आधुनिक और अधिक उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक व्यापक सुधार है। यदि नई सेवा नियमावली का प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है, तो आने वाले समय में खनन विभाग की कार्यप्रणाली में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सचिव स्तर के IAS अधिकारी को खनन निदेशक बनाए जाने, अतिरिक्त एवं अपर निदेशक पदों पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति तथा खान अधिकारी के लिए अनुभव को अनिवार्य करने जैसे प्रावधान विभाग की दक्षता और पारदर्शिता को नई दिशा देने वाले साबित हो सकते हैं।

