स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को बड़ी राहत: 3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा, 1,713 करोड़ रुपये के ऋण वितरित

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकारों को स्पष्ट और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई स्वामित्व योजना देशभर में तेजी से आगे बढ़ रही है।

केंद्र सरकार के अनुसार, योजना के तहत अब तक 3.30 लाख गांवों में ड्रोन आधारित सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही स्वामित्व संपत्ति कार्ड के आधार पर 1,713 करोड़ रुपये के 11,147 ऋण भी वितरित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों को औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिली है।

यह जानकारी केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने 5 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।

क्या है स्वामित्व योजना?

स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्तियों का आधिकारिक अधिकार रिकॉर्ड (Property Record) उपलब्ध कराना है।

इस योजना के तहत गांवों की आबादी वाले क्षेत्रों का ड्रोन सर्वेक्षण किया जाता है और अत्याधुनिक सतत संचालन संदर्भ स्टेशन (CORS) तकनीक की मदद से अत्यधिक सटीक डिजिटल मानचित्र तैयार किए जाते हैं।

इन मानचित्रों के आधार पर प्रत्येक संपत्ति की सीमा स्पष्ट रूप से चिन्हित की जाती है और उसके बाद संपत्ति कार्ड जारी किए जाते हैं।

ड्रोन तकनीक से बढ़ी सटीकता

सरकार के अनुसार, स्वामित्व योजना में पारंपरिक सर्वेक्षण के बजाय आधुनिक ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

ड्रोन सर्वेक्षण से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल डेटा की सहायता से गांवों के आबादी क्षेत्रों का अत्यंत सटीक जीआईएस (GIS) आधारित नक्शा तैयार किया जाता है।

इसके लिए Survey of India, पंचायती राज मंत्रालय और राज्य सरकारें मिलकर कार्य कर रही हैं।

संपत्ति विवाद कम करने में मिल रही मदद

स्वामित्व योजना का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से चले आ रहे संपत्ति विवादों को कम करना है।

जब प्रत्येक संपत्ति की सीमा वैज्ञानिक तरीके से निर्धारित होती है और उसका आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार किया जाता है, तो भविष्य में विवाद की संभावनाएं कम हो जाती हैं।

इसके अलावा, योजना के तहत जमीनी सत्यापन और पारदर्शी विवाद समाधान प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय बनते हैं।

1,713 करोड़ रुपये के ऋण वितरित

सरकार के अनुसार, योजना का लाभ केवल संपत्ति रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है।

स्वामित्व संपत्ति कार्ड के आधार पर अब तक 11,147 लाभार्थियों को 1,713 करोड़ रुपये के ऋण उपलब्ध कराए गए हैं।

इससे ग्रामीण परिवारों को बैंकिंग प्रणाली से जुड़ने, कृषि एवं छोटे व्यवसायों के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में मदद मिली है।

3.30 लाख गांवों में पूरा हुआ ड्रोन सर्वे

पंचायती राज मंत्रालय ने बताया कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत अब तक 3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है।

मंत्रालय नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से राज्यों और Survey of India के साथ मिलकर योजना के क्रियान्वयन की निगरानी भी कर रहा है, ताकि सर्वेक्षण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।

ग्राम मानचित्र ऐप बना विकास का नया आधार

स्वामित्व योजना के तहत तैयार किए गए भू-स्थानिक (Geospatial) आंकड़ों का उपयोग ग्राम मानचित्र (Gram Manchitra) ऐप के माध्यम से किया जा रहा है।

यह ऐप ग्राम पंचायतों को डिजिटल मानचित्र पर गांव की महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराता है, जिसमें शामिल हैं—

  • आवासीय क्षेत्र
  • सड़कें
  • सार्वजनिक भवन
  • जल स्रोत
  • प्राकृतिक संसाधन
  • सामुदायिक संपत्तियां
  • अन्य ग्रामीण अवसंरचना

इससे पंचायतों को विकास योजनाएं तैयार करने में काफी सुविधा मिल रही है।

जीपीडीपी को मिलेगा मजबूत आधार

ग्राम मानचित्र ऐप, ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

यह ऐप विभिन्न सरकारी योजनाओं और स्वामित्व योजना से प्राप्त भू-स्थानिक आंकड़ों को एकीकृत कर पंचायतों को साक्ष्य आधारित योजना बनाने में सहायता प्रदान करता है।

इसके माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं की पहचान अधिक सटीक तरीके से की जा सकती है।

विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने में मदद

ग्राम मानचित्र ऐप के जरिए पंचायतें आसानी से यह तय कर सकती हैं कि गांव में किन क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, पेयजल, सार्वजनिक भवन या अन्य सुविधाओं की अधिक आवश्यकता है।

साथ ही चल रही परियोजनाओं की निगरानी, परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के संसाधनों का समन्वय भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

डिजिटल शासन को मिल रही मजबूती

स्वामित्व योजना केवल संपत्ति रिकॉर्ड तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण शासन को भी अधिक पारदर्शी और डिजिटल बना रही है।

जीआईएस आधारित डिजिटल मानचित्रों की सहायता से पंचायतों को निर्णय लेने में सुविधा मिल रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव हो रहा है।

ग्रामीण विकास को मिलेगा दीर्घकालिक लाभ

स्पष्ट संपत्ति रिकॉर्ड से न केवल विवाद कम होंगे, बल्कि ग्रामीणों को वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने, निवेश बढ़ाने और संपत्ति आधारित आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का अवसर भी मिलेगा।

स्वामित्व योजना ग्रामीण भारत में संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है। 3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा होना, हजारों ग्रामीणों को संपत्ति कार्ड के आधार पर ऋण मिलना और ग्राम मानचित्र ऐप के माध्यम से डिजिटल ग्राम योजना को बढ़ावा मिलना इस योजना की प्रगति को दर्शाता है।

केंद्र सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक, पारदर्शी रिकॉर्ड प्रणाली और भू-स्थानिक योजना के माध्यम से ग्रामीण विकास को अधिक प्रभावी, विवाद-मुक्त और टिकाऊ बनाया जा सकेगा।

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