भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की तेज़ रफ्तार: 2016 के बाद ईवी बिक्री 46 गुना बढ़ी, निर्यात ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: भारत तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बीते कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles-EV) की मांग, उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकारी नीतियों, तकनीकी नवाचार, पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार ने देश में ईवी इकोसिस्टम को नई गति दी है। यही वजह है कि वर्ष 2016 की तुलना में अब भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री लगभग 46 गुना बढ़ चुकी है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जहां वर्ष 2016 में देश में करीब 50 हजार इलेक्ट्रिक वाहन बिके थे, वहीं वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 23 लाख यूनिट से अधिक पहुंच गई।

वहीं, इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात भी वर्ष 2020 के 12 लाख अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2024 में 8.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यह आंकड़े भारत को वैश्विक ईवी उद्योग में तेजी से उभरती हुई ताकत के रूप में स्थापित करते हैं।

साफ-सुथरे भविष्य की ओर बढ़ता भारत

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब केवल परिवहन का विकल्प नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बनती जा रही है। सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था विकसित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में बढ़ते शहरीकरण और यातायात दबाव को देखते हुए इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य की आवश्यकता बन चुके हैं। छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक ईवी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों की परिवहन संबंधी आदतों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।

क्या होते हैं इलेक्ट्रिक वाहन?

इलेक्ट्रिक वाहन ऐसे वाहन होते हैं जो बैटरी में संग्रहित ऊर्जा से चलने वाली इलेक्ट्रिक मोटर का उपयोग करते हैं। इन्हें बाहरी विद्युत स्रोत से चार्ज किया जाता है।

मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहन चार श्रेणियों में आते हैं—

  • बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (BEV)
  • हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (HEV)
  • प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (PHEV)
  • फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक वाहन (FCEV)

इनमें बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन पूरी तरह बिजली से संचालित होते हैं, जबकि अन्य श्रेणियों में पारंपरिक इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर का संयुक्त उपयोग किया जाता है।

सरकारी योजनाओं से मिली नई रफ्तार

भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। इनमें प्रमुख रूप से नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान (NEMMP), एफएएमई इंडिया (FAME India), ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट पीएलआई योजना, पीएम ई-ड्राइव योजना तथा नेशनल मिशन ऑन मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं।

इन योजनाओं के माध्यम से सरकार इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर प्रोत्साहन, चार्जिंग स्टेशन विकसित करने, घरेलू विनिर्माण बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने का प्रयास कर रही है।

2015 से शुरू हुई इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की मजबूत नींव

भारत में संगठित रूप से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की शुरुआत वर्ष 2015 में नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान (NEMMP 2020) और FAME India Scheme के माध्यम से हुई।

इसका उद्देश्य था—

  • पेट्रोल और डीजल के आयात पर निर्भरता कम करना।
  • शहरी वायु प्रदूषण में कमी लाना।
  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाना।
  • घरेलू ईवी उद्योग को प्रोत्साहित करना।
  • रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा करना।

इसके बाद FAME-II योजना के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर सब्सिडी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया गया।

कोविड के बाद तेजी से बढ़ी ईवी की मांग

कोविड-19 महामारी के बाद इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली। वित्तीय वर्ष 2021-22 से सरकार द्वारा दी गई अतिरिक्त सब्सिडी, बेहतर तकनीक, अधिक ड्राइविंग रेंज और नए मॉडलों की उपलब्धता के कारण उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा।

शुरुआती वर्षों में जहां ई-रिक्शा बाजार पर हावी थे, वहीं अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट बन चुके हैं। निजी उपयोग के साथ-साथ व्यावसायिक परिवहन में भी इनका उपयोग लगातार बढ़ रहा है।

ईवी अपनाने की दर में कई गुना वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015-16 में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी कुल वाहन बिक्री का केवल 0.08 प्रतिशत थी। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 तक यह बढ़कर 8.26 प्रतिशत हो गई।

यह वृद्धि दर्शाती है कि उपभोक्ताओं की पसंद तेजी से पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर स्थानांतरित हो रही है।

उत्तर प्रदेश बना देश का सबसे बड़ा ईवी बाजार

वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन बाजार बनकर उभरा है। राज्य में 4 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई, जो देश की कुल ईवी बिक्री का लगभग 18 प्रतिशत है।

इसके बाद—

  • महाराष्ट्र – 2.66 लाख यूनिट (12 प्रतिशत)
  • कर्नाटक – 2 लाख यूनिट (9 प्रतिशत)

का स्थान रहा।

यह दर्शाता है कि बड़े राज्यों में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है।

निर्यात में भी रिकॉर्ड वृद्धि

भारत अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन आपूर्ति श्रृंखला में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

वर्ष 2020 में जहां ईवी निर्यात का मूल्य लगभग 12 लाख अमेरिकी डॉलर था, वहीं वर्ष 2024 में यह बढ़कर 8.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत हुई है।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई तकनीक का विस्तार

देशभर में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही बैटरी तकनीक, फास्ट चार्जिंग सिस्टम, स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट और डिजिटल सेवाओं में भी तेजी से सुधार हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार इसी गति से जारी रहा तो आने वाले वर्षों में ईवी अपनाने की रफ्तार और तेज हो सकती है।

भारत के लिए बड़ा आर्थिक अवसर

इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र विनिर्माण, बैटरी उत्पादन, सॉफ्टवेयर, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुसंधान और रोजगार सृजन के लिए भी बड़े अवसर प्रदान कर रहा है।

सरकार की “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी पहलों को भी इससे नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारत का इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र तेज़ी से विकास के नए चरण में प्रवेश कर चुका है। 2016 के बाद बिक्री में 46 गुना वृद्धि, निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं, बढ़ता चार्जिंग नेटवर्क और उपभोक्ताओं का बढ़ता भरोसा इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।

यदि नीति समर्थन, तकनीकी नवाचार और घरेलू विनिर्माण की गति इसी प्रकार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल दुनिया के सबसे बड़े ईवी बाजारों में शामिल होगा, बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण और निर्यात का भी एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।

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