हैदराबाद में BRICS भ्रष्टाचार-विरोधी कार्य समूह की बैठक शुरू, तकनीक आधारित पारदर्शी शासन पर भारत का जोर

10

Digital UP News Desk

हैदराबाद: भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) भ्रष्टाचार-विरोधी कार्य समूह (Anti-Corruption Working Group–ACWG) की दूसरी दो दिवसीय बैठक मंगलवार को हैदराबाद में शुरू हुई। 4 और 5 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भ्रष्टाचार से जुड़े सीमा-पार मामलों, भगोड़े आर्थिक अपराधियों की पहचान, संपत्ति की वसूली, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग तथा तकनीक आधारित पारदर्शी शासन जैसे अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा की जा रही है।

इस बैठक के साथ संपत्ति वसूली पर BRICS विशेषज्ञ नेटवर्क की दूसरी बैठक भी आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच चोरी की गई संपत्तियों की पहचान, उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया को तेज करना तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को अधिक प्रभावी बनाना है।

रचना शाह ने किया उद्घाटन

बैठक के उद्घाटन सत्र में भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की सचिव सुश्री रचना शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार आज भी दुनिया के अधिकांश देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि यह समाज के विकास को भी प्रभावित करता है। इसके कारण अस्पताल, स्कूल, सड़क, जलापूर्ति और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए उपलब्ध संसाधन प्रभावित होते हैं तथा नागरिकों का शासन व्यवस्था पर विश्वास भी कमजोर पड़ता है।

“कोई भी देश अकेले नहीं लड़ सकता भ्रष्टाचार से”

रचना शाह ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि आज कोई भी देश भ्रष्टाचार की चुनौती से पूरी तरह अछूता नहीं है। इसी प्रकार कोई भी देश अकेले इस समस्या का समाधान भी नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि अवैध वित्तीय प्रवाह (Illicit Financial Flows) को रोकने, सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार-विरोधी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए सभी देशों के बीच निरंतर, समन्वित और व्यावहारिक सहयोग आवश्यक है।

उनके अनुसार, BRICS देशों को साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ते हुए भ्रष्टाचार के विरुद्ध ठोस और परिणामोन्मुखी कदम उठाने होंगे।

सीमा-पार भ्रष्टाचार पर संयुक्त कार्रवाई की जरूरत

सचिव रचना शाह ने कहा कि BRICS भ्रष्टाचार-विरोधी कार्य समूह की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक स्तर पर ईमानदारी, जवाबदेही, पारदर्शिता और नवाचार को मजबूत करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

उन्होंने कहा कि सीमा-पार भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सदस्य देशों को केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि व्यावहारिक सहयोग को बढ़ाकर ठोस परिणाम भी सुनिश्चित करने होंगे।

भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर सख्त संदेश

अपने संबोधन में रचना शाह ने भगोड़े आर्थिक अपराधियों की समस्या का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी देश की सीमा अपराध से अर्जित धन छिपाने या आर्थिक अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना न बने।

उन्होंने सदस्य देशों से अपील की कि—

  • भगोड़े अपराधियों का पता लगाने में सहयोग बढ़ाया जाए।
  • प्रत्यर्पण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाए।
  • चोरी की गई संपत्तियों की शीघ्र बरामदगी सुनिश्चित की जाए।
  • ऐसी कानूनी और प्रशासनिक खामियों को दूर किया जाए जिनका दुरुपयोग अपराधी सीमा पार गतिविधियों के लिए करते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि BRICS देशों के बीच कानून प्रवर्तन विशेषज्ञों का नेटवर्क इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

संपत्ति वसूली नेटवर्क को मिलेगी मजबूती

बैठक के दौरान BRICS एक्सपर्ट नेटवर्क ऑन एसेट रिकवरी (Asset Recovery) के कार्यान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

रचना शाह ने कहा कि यदि सदस्य देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक मानकीकृत प्रणाली विकसित की जाती है और स्थानीय संपर्क केंद्रों तथा विशेषज्ञों की निर्देशिका तैयार की जाती है, तो कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग और अधिक तेज एवं प्रभावी होगा।

इससे सीमा-पार वित्तीय अपराधों की जांच में भी तेजी आने की संभावना है।

तकनीक आधारित पारदर्शी शासन पर भारत का जोर

बैठक में भारत ने तकनीक आधारित शासन व्यवस्था को भ्रष्टाचार रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम बताया।

रचना शाह ने कहा कि डिजिटल पहचान, ई-गवर्नेंस, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवा वितरण और पारदर्शी खरीद प्रणाली जैसी पहलें भ्रष्टाचार की संभावनाओं को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाता है, जिससे जनता का विश्वास भी मजबूत होता है।

GeM और DBT जैसे प्लेटफॉर्म बने उदाहरण

भारत ने बैठक में अपने कई डिजिटल सुधारों को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

रचना शाह ने विशेष रूप से निम्नलिखित पहलों का उल्लेख किया—

  • Government e-Marketplace (GeM) – सरकारी खरीद का डिजिटल प्लेटफॉर्म।
  • Direct Benefit Transfer (DBT) – लाभार्थियों तक सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाने की प्रणाली।
  • फेसलेस और पेपरलेस टैक्स प्रणाली
  • डेटा आधारित निगरानी तंत्र
  • प्रौद्योगिकी-सक्षम सतर्कता प्रणाली
  • मजबूत शिकायत निवारण तंत्र

उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ भ्रष्टाचार की संभावनाओं को भी कम किया है।

फिनटेक और डिजिटल परिसंपत्तियों पर भी चर्चा

दो दिवसीय कार्यक्रम में भ्रष्टाचार से जुड़े नए जोखिमों पर भी विचार किया जा रहा है।

विशेष सत्रों में निम्नलिखित विषय शामिल हैं—

  • वित्तीय प्रौद्योगिकी (FinTech) से उभरती चुनौतियां।
  • वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) का दुरुपयोग।
  • धन शोधन (Money Laundering) के नए तरीके।
  • भ्रष्टाचार से अर्जित आय को छिपाने के लिए डिजिटल माध्यमों के उपयोग की रोकथाम।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल वित्तीय प्रणाली के विस्तार के साथ इन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पहले से अधिक आवश्यक हो गया है।

BRICS अध्यक्ष ने सहयोग की सराहना की

बैठक के उद्घाटन अवसर पर BRICS ACWG के अध्यक्ष श्री जे. अशोक कुमार ने सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरान सदस्य देशों के बीच हुए निरंतर संवाद और सहयोग ने भ्रष्टाचार-विरोधी प्रयासों को नई दिशा दी है।

उनके अनुसार, इस वर्ष का मुख्य उद्देश्य BRICS देशों के बीच ऐसे व्यावहारिक तंत्र विकसित करना रहा है, जो सहयोग को मजबूत करें और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं के साथ अनावश्यक दोहराव से भी बचें।

वैश्विक सहयोग से ही मिलेगा समाधान

सीमा-पार भ्रष्टाचार, अवैध वित्तीय प्रवाह और धन शोधन जैसी चुनौतियों का समाधान केवल राष्ट्रीय स्तर पर संभव नहीं है।

ऐसे में BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच सदस्य देशों को अनुभव साझा करने, कानूनी सहयोग बढ़ाने और आधुनिक तकनीक के उपयोग के माध्यम से भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रभावी रणनीति तैयार करने का अवसर प्रदान करते हैं।

हैदराबाद में आयोजित BRICS भ्रष्टाचार-विरोधी कार्य समूह की यह बैठक वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ सहयोग को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

भारत ने इस मंच पर तकनीक आधारित पारदर्शी शासन, डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं, भगोड़े आर्थिक अपराधियों के प्रत्यर्पण, संपत्ति वसूली और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय पर विशेष जोर दिया है। यदि सदस्य देश इन पहलों को प्रभावी रूप से लागू करते हैं, तो सीमा-पार भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति संभव हो सकेगी।

You may have missed