यूपी में जारी है 15 जुलाई तक ‘मिशन सेफ फ्यूचर’ अभियान, स्कूल वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा पर है सख्त निगरानी
रिपोर्ट – सर्वेश शर्मा
कानपुर: उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में 1 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक “मिशन सेफ फ्यूचर” अभियान चलाने का निर्णय लिया है। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन के निर्देश पर चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत स्कूल वाहनों की फिटनेस, वैध परमिट, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता तथा अन्य सुरक्षा मानकों की गहन जांच की जाएगी।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अभियान के दौरान विभागीय टीमें स्वयं स्कूलों में पहुंचकर वाहनों का भौतिक निरीक्षण करेंगी। साथ ही स्कूल प्रबंधन को निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
प्रदेश सरकार ने हाल के दिनों में सार्वजनिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच स्कूली परिवहन व्यवस्था की व्यापक समीक्षा का निर्णय लिया है। इसी क्रम में “मिशन सेफ फ्यूचर” अभियान शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य स्कूल वाहनों को पूरी तरह सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित करना है।
अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए अभियान के दौरान प्रत्येक स्कूल वाहन की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।
5647 स्कूल वाहनों की फिटनेस फेल
परिवहन विभाग के अनुसार, इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल पर प्रदेशभर के 65,162 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं।
इनमें से 5,647 वाहनों की फिटनेस प्रमाणित नहीं है, जबकि 7,418 वाहनों के परमिट की वैधता समाप्त हो चुकी है। विभाग ने इन आंकड़ों को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित स्कूल प्रबंधनों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
7 जुलाई तक का दिया गया अल्टीमेटम
आरटीओ प्रवर्तन राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि जिन स्कूल वाहनों की फिटनेस या परमिट वैध नहीं हैं, उनके संचालकों और प्रबंधकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
इसके अलावा व्यक्तिगत संपर्क और टेलीफोन के माध्यम से भी उन्हें जागरूक किया जाएगा। विभाग ने सभी स्कूलों को 7 जुलाई तक अपने वाहनों की फिटनेस प्रमाणित कराने और परमिट का नवीनीकरण कराने के निर्देश दिए हैं।
यदि निर्धारित समय सीमा तक आवश्यक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
हर स्कूल में पहुंचेगी परिवहन विभाग की टीम
अभियान के तहत परिवहन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी प्रत्येक स्कूल का दौरा करेंगे। निरीक्षण के दौरान वाहनों की वास्तविक स्थिति, तकनीकी फिटनेस, सुरक्षा उपकरण, दस्तावेजों की वैधता और अन्य आवश्यक मानकों की जांच की जाएगी।
भौतिक निरीक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्कूल वाहन सड़क पर चलने योग्य स्थिति में हैं और बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी प्रावधानों का पालन किया जा रहा है।
अग्निशमन उपकरणों की भी होगी जांच
अभियान के दौरान केवल वाहन की फिटनेस ही नहीं, बल्कि बसों और स्कूल परिसरों में अग्निशमन उपकरणों (फायर एक्सटिंग्विशर) की उपलब्धता और उनकी कार्यशीलता की भी जांच की जाएगी।
परिवहन विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा संबंधी सभी उपकरण निर्धारित मानकों के अनुसार उपलब्ध हों और आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग किया जा सके।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर विभाग की प्रतिबद्धता
आरटीओ प्रवर्तन राहुल श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना परिवहन विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
जनप्रतिनिधियों का भी लिया जाएगा सहयोग
परिवहन विभाग इस अभियान में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी सुनिश्चित करेगा। विभाग के अनुसार स्थानीय स्तर पर सांसदों और विधायकों से संपर्क कर स्कूल प्रबंधकों को सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
इसके साथ ही मीडिया के माध्यम से भी लोगों और स्कूल संचालकों को सुरक्षित परिवहन व्यवस्था के महत्व से अवगत कराया जाएगा।
स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि स्कूल प्रबंधन की भी समान जिम्मेदारी है।
वाहनों का नियमित रखरखाव, समय-समय पर फिटनेस जांच, प्रशिक्षित चालक, वैध दस्तावेज और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रत्येक स्कूल संचालक का दायित्व है।
नियमों के पालन से ही बढ़ेगी सुरक्षा
परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूल बसों में सुरक्षा मानकों का पालन करने से सड़क दुर्घटनाओं की आशंका काफी हद तक कम की जा सकती है।
फिटनेस प्रमाणपत्र, वैध परमिट, आपातकालीन निकास, फायर एक्सटिंग्विशर, प्राथमिक उपचार किट और प्रशिक्षित चालक जैसी व्यवस्थाएं बच्चों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1 से 15 जुलाई तक चलाया जा रहा “मिशन सेफ फ्यूचर” अभियान स्कूली बच्चों की सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अभियान के तहत हजारों स्कूल वाहनों की फिटनेस, परमिट और सुरक्षा व्यवस्थाओं की व्यापक जांच की जाएगी।
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 7 जुलाई तक सभी स्कूलों को अपने वाहनों की फिटनेस और परमिट संबंधी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। प्रशासन का उद्देश्य बच्चों के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना या लापरवाही की संभावना को कम किया जा सके।

